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भक्तों के बुलाने पर आते हैं भगवान: कौशिक

कथा के छठवें दिन यशोदानंदन की विशेषताएं बताई

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भक्तों के बुलाने पर आते हैं भगवान: कौशिक

भक्तों के बुलाने पर आते हैं भगवान: कौशिक

छतरपुर. भगवान भाव के भूखे होते हैं, बिना भाव के तो साधारण प्राणी भी किसी के यहां नहीं जाता तो फिर भगवान क्यों जाएं। यह बात चेतगिर कॉलोनी के श्री हनुमान मंदिर में चल रही भागवत कथा में मंगलवार को कथावाचक भगवती प्रसाद कौशिक ने कही। उन्होंने कहा कि प्रभु तो उसी भक्त के यहां जाते हैं जो हर घड़ी, हर क्षण उसे याद करते हुए उनकी लीलाओं तथा चरित्र का चिंतन करता है। राजा कंस की भी यही स्थिति थी। वो जिधर भी नजर डालते उसे यशोदा नंदन ही नजर आते थे, और आते भी क्यों नहीं वह भी तो पूर्वजन्म में भगवान का अनन्य भक्त थे।
आचार्य कौशिक के अनुसार शुकदेव कहते हैं कि राजा कंस को घर के दरवाजों पर, पर्दों पर यहां तक कि दासियों के आंखों में लगे काजल पर भी श्रीकृष्ण के दर्शन हो रहे थे। कौशिक आगे कहते है कि सच तो यही है कि जब प्रभु की कृपा भक्त पर होती है तो जहां-जहां भक्त की नजर जाती है, वहीं-वहीं प्रभु पहुंचकर दर्शन देते हैं। कंस अज्ञानता वश यह समझ नहीं पाया और उसने अक्रूर जी से कहा कि तुम मेरे भांजों श्रीकृष्ण और बलराम को धनुष यज्ञ देखने हेतु वृन्दावन से मथुरा लेकर आओ। अक्रूर आज्ञा का पालन करते हुए रथ लेकर वृन्दावन के लिए प्रस्थान किया। वहां पर अक्रूर के आग्रह तथा नंदबाबा और मां यशोदा के रोकने के बाद भी श्रीकृष्ण और बलराम मथुरा जाने के लिए तैयार हुए और वहां पहुंचकर उन्होंने मामा कंस का उद्धार किया।
कथा के अगले प्रसंग में कौशिक कहते हैं कि विदर्भ देश की राजकुमारी रूकमणि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन नारद जी के मुख से सुनकर इतनी प्रभावित हुई कि उन्होंने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति स्वीकार कर लिया। यह प्रस्ताव ब्राह्मणों द्वारा द्वारिकाधीश के पास भेजा गया जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया और वहां पहुंचकर, ब्राह्मणों को साक्षी बनाकर रूकमणि के साथ विवाह किया। इस विवाह की अद्वितीय सचित्र झांकी भी भक्तों द्वारा प्रस्तुत की गई। श्रीमद् भागवत कथा के अन्तिम दिन बुधवार को सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा एवं व्यास पूजन होगा।