
बिना पक्के बिल में दीया जा रहा सोने चांदी का सामान
छतरपुर. त्योहारी और शादी के सीजन में सोने-चांदी की जबर्दस्त डिमांड दिखाई दे रही है। शादी विवाह का सीजन शुरू होने से लोग बाजार में सोने-चांदी के जेवर खरीदने निकल रहे हैं। जिन्हें कच्चे बिलों में सामान दिया जा रहा है। यह हाल शहर के एक-दो नहीं बल्कि अधिकांस आभूषण विक्रेताओं के यहां पर है। वहीं पक्का बिल मांगने की स्थिति में ना नुकुर कर रहे हैं। ऐसे में ग्राहक भी कच्चा बिल लेकर ही चलता कर रहे हैं। ऐसे में सोने की शुद्धता, बिल, मोल-भाव, सोने का करेंट रेट, कहीं 18 कैरेट गोल्ड के लिए 22 कैरेट का दाम लगने आदि की जानकारी नहीं हो पा रही है है।
त्योहारों के बाद अब शादी विवाह आदि का सीजन चल रहा है। जिसको लेकर बाजारों में लोगों की भीड़ उमड़ रहीं है। शहर में हर रोज कई लाखों का सोने चांदी का व्यापार हो रहा है, लेकिन अधिकांस दुकानदार ग्राहकों को जीएसटी बिल नहीं देकर कच्चा बिल थमा रहे हैं। ग्राहकों को सादा कागज या फिर कच्चा बिल देकर रवाना कर रहे हैं, जिससे लोगों के पास सामान वैध रूप नहीं मिल पा रहा है। कानून के अनुसार बिना पक्के बिल के आभूषण होने पर जुमार्ना की प्रावधान है। इसके बाद भी दुकानदार ग्राहकों को कच्चा बिल देकर उनके लिए परेशानी खडी कर रहे हैं ओर अपना टैक्स बचा रहे हैं।
जरूरी है पक्का बिन लेना
अभी सोने की खरीदारी का असली सीजन चल रहा है, सोने चांदी के आभूषण खरीदने के दौरान उस पर हॉलमार्किंग जरूर देखें। बिना बिन के कोई खरीदारी न करें, क्योंकि बाद में वही दुकानदार मुकर सकता है कि आपने उसी से सामान लिया है. बिल लेने का फायदा यह होता है कि जब उसे बेचने जाएंगे तो कई तरह के झंझटों से बच जाएंगे।
इसलिए बचते हैं दुकानदार
कई दुकानदार ग्राहकों को कच्चा बिल या अस्थायी बिल भी देते हैं. इस बिल में सभी बातें दर्ज नहीं होतीं. अस्थाई बिल वह होता है जो एक व्यापारी द्वारा किसी ग्राहक को ऐसी वस्तु की खरीद पर जारी किया जाता है, जो व्यापारी के ऑडिट या लेजर में नहीं दिखाई जाती है। इस प्रकार, वह टैक्स देने से बच सकता है. इधर ग्राहक भी जीएसटी टैक्स का भुगतान करने से बचता है. एक अस्थायी बिल केवल ज्वेलरी स्टोर और आपके द्वारा खरीदे गए ज्वैलरी आइटम का नाम दिखाता है. यह अक्सर कागज के एक खाली टुकड़े पर बनाया जाता है. इस तरह के लेन-देन से काला धन पैदा होता है। दूसरी ओर, एक स्थायी बिल या चालान पूरी तरह से वैध लेनदेन पर आधारित होता है और कई डिटेल देता है।
ध्यान रखें
- हॉलमार्क
- मेकिंग चार्जेस पर मोलभाव
- कीमतों पर रखें नजर
- बिल
- वजन चेक करना
वैध स्वामित्व का प्रमाण न होने पर क्या होगा
दिसंबर 2016 में भारत सरकार ने बरामदगी और तलाशी के दौरान मिलने वाली अघोषित संपत्ति पर जुर्माना लगा दिया है। इसका अर्थ है कि जहां विरासत में मिले उन जेवरों के लिए कोई सीमा-रेखा नहीं है, जिनका हिसाब आपके पास है, वहीं बिना हिसाब वाले जेवरों की सीमा पार होने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। प्रमाण न दे पाने की स्थिति में सीमा से अधिक सोने के लिए 60 फीसद तक जुर्माना और 25 फीसद का सरचार्ज लग सकता है।
Published on:
14 Nov 2022 06:39 pm
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