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छतरपुर

सरकारी रिकॉर्ड में 7 माह में मलेरिया के 8 व डेंगू के सिर्फ 3 मरीज मिले

निजी लैब की रिपोर्ट नहीं करते शामिल, रिकॉर्ड में सब ठीक बता रहे

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छतरपुर. मलेरिया विभाग को डेंगू और मलेरिया के मरीज खोजने से भी नहीं मिलते हैं। केवल सरकारी अस्पताल आंकड़े के आधार पर ही विभाग जिले में मलेरिया व डेगूं को अंडर कंट्रोल मानकर चलता है। जबकि सरकारी से ज्यादा प्राइवेट में मरीज इलाज कराते है, जिनका कोई लेखा जोखा विभाग के पास नहीं होता है। यही वजह है कि सरकारी रिकॉर्ड में जनवरी से अभी तक मलेरिया के आठ और डेंगू के तीन मरीज हो मिल सके है, जबकि निजी असालों में लगातार मलेरिया के केस मिल रहे हैं।


निजी पैथलॉजी की रिपोर्ट मान्य नहीं
मलेरिया विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि निजी पैथोलॉजी की रिपोर्ट मान्य नहीं करते हैं। एक जुलाई से डेंगू माह शुरू हो गया है। राज्य शासन ने विभाग को अलग से 50 हजार रुपए का बजट आवंटित किया है। साथ ही कीटनाशक दवाओं के छिडक़ाव के लिए 6 वर्कर नियुक्त किए गए हैं। इसके बाद भी विभागीय गतिविधियां लगभग सुस्त हैं। शहर में 40 वार्ड है, लेकिन कीटनाशक दवा का छिडक़ाव कुछ ही स्थानों पर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि डेंगू से निपटने के लिए कागजी खानापूर्ति की जा रही है। हर साल बजट को ठिकाने लगा दिया जाता है।


हर साल सामने आ रहे डेंगू-मलेरिया के मरीज
विभाग के मुताबिक 2017 में जिले में मलेरिया के 245 केस सामने आए जबकि डेंगू का एक भी मामला नहीं मिला। 2018 में मलेरिया के 104, डेंगू के 4 केस मिले। 2019 में मलेरिया के 61 और डेंगू के 8 केस सामने आए थे। वर्ष 2020 में छतरपुर शहर के बस स्टैंड इलाके में 11 वर्षीय बच्चे की 7 अक्टूबर को डेगूं से मौत हो गई थी। वहीं, फूला देवी मंदिर इलाके में भी 16 वर्षीय लडक़े की मौत हो गई थी। इसी तरह वर्ष 2021 में डेंगू के 4 मरीज सामने आए। सौंरा गांव के निवासी 18 वर्षीय निहित पटेल पिता दिलीप पटेल को 15 सितंबर को दिए गए सैंपल की मेडिकल कॉलेज ग्वालियर से आई जांच रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव पाई गई। तीन अन्य संदिग्ध मामले भी सामने आए, जो बाद में पॉजिटिव पाए गए। उनमें से एक जांच रिपोर्ट भोपाल और दो ग्वालियर में पॉजिटिव पाई गई थी। अनगौर निवासी 16 वर्षीय युवक का भोपाल में और 30 वर्षीय छापर गांव निवासी व 30 वर्षीय सलैया गांव निवासी युवक का ग्वालियर में इलाज किया गया। वर्ष 2022 में शहर के बकायन खिडक़ी और नजरबाग इलाके में 4 लोग डेंगू की चपेट में आए। जिसमें से 35 साल की महिला की जान चली गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से बीमार हुए, जिन्हें इलाज के लिए बाहर जाना पड़ा।

विभाग के भरोसे न रहें, खुद करें बचाव
जिले में मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। डेंगू के दो मामले सामने आ चुके हैं तो वहीं मलेरिया फैलने की आशंका भी है। इन बीमारियों से बचने के लिए पायराथिन दवा का छिडक़ाव किया जाता है जहां डेंगू का लार्वा मिलता है वहां 50 घरों का लार्वा कलेक्टर करने की गाइड लाइन है। नाली और गमलों में टेमोफास नामक दवा का छिडक़ाव किया जाता है। फिलहाल विभाग के द्वारा किए जाने वाले इन कार्यों में कितनी सच्चाई है यह समझना मुश्किल है लेकिन आम जनता इन बीमारियों से बचने के लिए कदम उठा सकती है। इसके लिए घरों के आसपास मौजूद कूलर, मटके, गमले, गड्ढे आदि में पानी जमा न होने दें। यदि किसी जगह पर पानी जमा है तो वहां जला हुआ आयल डालें। मच्छरों से बचाव करें, खिडक़ी दरवाजों पर मच्छर जाली लगाएं। छोटे बच्चों के लिए ज्यादा खतरा है इसलिए उन्हें पार्कों में भेजने के पहले फुल कपड़े पहनाएं।

निजी अस्पतालों में आ रहे मामले
निजी अस्पतालों में आए दिन मलेरिया के मरीज मिल रहे हैं। इन बीमारियों से बचने के लिए पायरथिन दवा का छिडक़ाव किया जाता है, जहां डेंगू का लार्वा मिलता है, वहां 40 घरों का लार्वा कलेक्ट करने की गाइड लाइन है। नाली और गड्डों में टेमोफास नामक दवा का छिडक़ाव किया जाता है। विभाग द्वारा किए जाने वाले इन कार्यों में कितनी सच्चाई है, यह समझना मुश्किल है। बारिश के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। बारिश के कारण जगह-जगह जलभराव है। जमे हुए पानी कारण जलजनित रोगों के बढऩे की बहुत आशंका रहती है। जमा हुआ पानी मच्छर के पनपने के लिए अनुकूल होता है। मच्छर के काटने से कई रोग जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसे रोगों के प्रसार को आशंका प्रबल रहती है। मलेरिया के सीनियर इंस्पेक्टर विदेश पटेरिया का कहना है कि निजी अस्पतालों में डेंगू के मरीज रिकॉर्ड हम नहीं रखते हैं, क्योंकि प्राइवेट लैब की जांच मान्य नहीं है। जिला अस्पताल में डेंगू की जांच ही रिकॉर्ड में मान्य है।

ऐसा जलभराव लार्वा पनपने का बन रहा जरिया