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अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस-पत्रिका की पहल से दिव्यांग बच्चों के चेहरे पर आई खुशी

अंतरराष्ट्रीय दिवस की थीम समावेशी विकास हेतु परिवर्तनकारी समाधान रखी गई है। इसी थीम को ध्यान में रखते हुए शनिवार की दोपहर दिव्यांग बच्चों को पत्रिका ने पार्क भ्रमण कराया।

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अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस-पत्रिका की पहल से दिव्यांग बच्चों के चेहरे पर आई खुशी

अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस-पत्रिका की पहल से दिव्यांग बच्चों के चेहरे पर आई खुशी

छतरपुर. हमारे समाज में रहने वाले विकलांग (दिव्यांग) जनों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने एवं मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष विश्व विकलांग दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के माध्यम से सभी नागरिकों को विकलांग जनों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करने एवं विकलांग जनों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करके उन्हें विभिन अधिकार प्रदान करने हेतु विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते है। इसी क्रम में पत्रिका समाचार पत्र ने छतरपुर जिले के दिव्यांग बच्चों को पंडित रविशंकर शुक्ल पार्क का भ्रमण कराया। भ्रमण कार्यक्रम के जरिए बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें अन्य बच्चों की तरह खुद को महसूस करने का अवसर मिला।

दिव्यांग बच्चों को बराबरी का महसूस हुआ अधिकार
वर्ष 2022 के लिए विकलांग व्यक्तियों का अंतरराष्ट्रीय दिवस की थीम समावेशी विकास हेतु परिवर्तनकारी समाधान रखी गई है। इसके माध्यम से अन्वेषण के उपयोग द्वारा विकलांग जनों के जीवन को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी थीम को ध्यान में रखते हुए शनिवार की दोपहर दिव्यांग बच्चों को पत्रिका ने पार्क भ्रमण कराया। पार्क भ्रमण के जरिए बच्चों ने समाज में समुचित एवं बराबरी का अधिकार को महसूस किया। कार्यक्रम के सहयोगी एडवोकेट संज खरे ने कहा कि पार्क भ्रमण के माध्यम से विकलांगजनों के अक्षमता के मुद्दे पर नागरिको का ध्यान खींचा गया और प्रतिदिन के जीवन में सहन की जा रही कठिनाइयों के बारे में लोगो को जागरूक किया गया। पत्रिका की यह पहल सराहनीय है। वहीं, कीर्ति यादव, वकील खान, धर्मेन्द्र रैकवार, विक्की रैकवार ने पत्रिका की पहल की सराहना की।

बच्चों को किया प्रोत्साहित, लोगों को जागरुक
शिक्षित वर्ग हो या अशिक्षित, ग्रामीण हो शहरी सभी वर्गों में विकलांगता को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। दिव्यांग आज भी समाज में अपने आप को सहज महसूस नहीं कर पाते हैं। कई बार तो उन्हें खुद उनके परिवार द्वारा तिरस्कार किया जाता है। उन्हें वह सहयोग नहीं मिल पाता है जिसकी वह अपेक्षा करता है। दिव्यांगों के प्रति दया और सहानुभूति की बजाय सहज मानवीय दृष्टि और रचनात्मक व्यवहार विकसित करने की जरूरत है। दिव्यांगों को अगर समुचित प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिला तो वे खुद अपनी मंजिल तय कर लेंगे। समाज में कई ऐसे उदाहरण हैं, जिन्होंने अपनी दिव्यांगता को मात दे कर कामयाबी की मंजिल हासिल की है। पत्रिका ने पार्क भ्रमण के जरिए बच्चों को रचनात्मक रुप से प्रोत्साहित किया, ताकि वे सकारात्मक मनोबल के साथ अपने जीवन में आगे बढ़े और सफलता पाएं।

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ये बोले बच्चे
पार्क भ्रमण से उत्साहित प्रगतिशील विकलांग संसार के दिव्यांग बच्चों के चेहरे पर खुशी झलक पड़ी। छात्र नरेन्द्र ने कहा कि पार्क में फिसलपट्टी पर फिसलने का आनंद लेकर हमें ऐसा महसूस हुआ जैसे हम सभी बच्चों की तरह ही हैं। उत्साह से लबरेज अंकित व कृष्णा ने खुशी जताई कि ऐसे आयोजन से पत्रिका ने हमारे मनोबल को बढ़ाया। छात्र देवी प्रसाद, हेमंत, अंशु और अशोक ने पार्क भ्रमण से मिली सकारात्मक उर्जा के बारे में बखान करते हुए कहा कि हमें बराबरी का अहसास हुआ है। रितिक व विवेक ने पार्क भ्रमण से नई उर्जा मिलने की बात कही।

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