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धूप में तप रहा खजुराहो, मंदिर देखने पहुंचे पर्यटकों के जल रहे पांव, सुविधाओं के अभाव में परेशानी बढ़ी

पर्यटक श्रद्धा से नंगे पांव ही भ्रमण करते हैं। परंतु प्रशासन द्वारा अभी तक मंदिर परिसरों में गर्म पत्थरों से बचाव के लिए जूट के मेट नहीं बिछवाए गए हैं, जो हर वर्ष गर्मियों में लगाए जाते थे।

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khajuraho temple

गर्मी की तपिश के कारण दिन में सूना हो जा रहा मंदिर परिसर

विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के पश्चिमी समूह के मंदिर यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, इन दिनों भीषण गर्मी के चलते पर्यटकों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। अप्रेल की शुरुआत से तापमान लगातार 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में मंदिरों के ग्रेनाइट चबूतरों और सीढयि़ों पर बिना चप्पल-जूते के चलना पर्यटकों के लिए मुश्किल हो गया है।

जूते पहनना वर्जित, मगर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं


खजुराहो के मंदिर धार्मिक आस्था से जुड़े हैं और कई मंदिरों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं, इसलिए पर्यटक श्रद्धा से नंगे पांव ही भ्रमण करते हैं। परंतु प्रशासन द्वारा अभी तक मंदिर परिसरों में गर्म पत्थरों से बचाव के लिए जूट के मेट नहीं बिछवाए गए हैं, जो हर वर्ष गर्मियों में लगाए जाते थे। इससे पर्यटकों के पैर जल रहे हैं और कई लोग दोपहर में भ्रमण छोडऩे को मजबूर हैं।

विदेशी पर्यटकों ने भी जताई चिंता


फ्रांस से आए एनआरआई सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि यूरोप के पर्यटक खजुराहो की ऐतिहासिकता और शिल्पकला से बेहद प्रभावित हैं, पर इतनी तपिश की उन्हें जानकारी नहीं थी। मिस्र के पर्यटक फर्नांडो और उनकी मित्र मारियो ने कहा कि मंदिर बहुत सुंदर हैं, पर दोपहर में मंदिर परिसर की गर्मी असहनीय है। वहीं देशी पर्यटक नीलम सिंह ने कहा कि अब सुबह-शाम ही भ्रमण करना पड़ता है, दिन में लोग होटल में ही बंद रहते हैं।

जगह-जगह बिछने थे जूट के मेट और चलना था फाउंटेन


हर साल गर्मियों में मंदिर परिसरों में पर्यटकों के पांव जलने से बचाने के लिए जूट के मेट बिछाए जाते थे और पास ही स्थित तालाब के फाउंटेन को चालू रखा जाता था, ताकि वातावरण में ठंडक बनी रहे। लेकिन इस वर्ष अप्रेल के मध्य तक भी यह व्यवस्था शुरू नहीं की गई है, जिससे पर्यटक असहज महसूस कर रहे हैं।

पन्ना टाइगर रिजर्व की ओर भी बढ़ रहा रूझान


गर्मी के कारण कुछ पर्यटक अब खजुराहो के साथ-साथ नजदीक स्थित पन्ना टाइगर रिजर्व का भी रुख कर रहे हैं। घना जंगल और अपेक्षाकृत ठंडे वातावरण के चलते यहां राहत मिलती है। गर्मी में झाडिय़ां सूखने से जानवर आसानी से नजर आते हैं, जिससे यह और आकर्षक बन जाता है। गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए ओरछा, मांडू, महेश्वर, बुंदेला महल, ग्वालियर किला जैसे ऐतिहासिक स्थलों की भी बुकिंग और पूछताछ तेजी से बढ़ी है। लोग हेरिटेज साइट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

पुरातत्व विभाग की प्रतिक्रिया


अधीक्षण पुरातत्ववेत्ता डॉ. शिवाकांत वाजपेयी ने कहा तापमान बढ़ा है, इसलिए जूट के मेट की व्यवस्था की जा रही है। सभी स्मारकों के चबूतरों और सीढयि़ों पर यह मेट बिछवाए जाएंगे। साथ ही गर्मी में पक्षियों के लिए सकोरे टांगने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।