
Manipuri group dance of tapasya garnered applause from the audience
खजुराहो. विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो में मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा आयोजित 48 वें खजुराहो नृत्य समारोह का शनिवार को समापन हो गया। समारोह की आखिरी शाम पहली प्रस्तुति में प्रसिद्ध नृत्यांगना स्वेता देवेंद्र द्वारा भरतनाट्यम तथा क्षमा मालवीय द्वारा कथक साथियों के साथ समूह में नृत्य प्रस्तुत किया। दूसरी प्रस्तुति में शमा भाटे और साथियों द्वारा कथक समूह के जरिए बसंत के उल्लास को मंचित किया गया। वहीं,तपस्या इम्फाल के कलाकारों द्वारा मणिपुरी समूह नृत्य से समारोह का पर्दा गिर गया।
शास्त्रीय नृत्य में विशिष्ट प्रतिभा के लिए सुर श्रृंगार संसद-मुंबई तथा श्रृंगारमणि एवं आईईएस समूह भोपाल द्वारा'द्रोणाचार्य'जैसे पुरुस्कारों से सम्मानित होने वाली स्वेता देवेन्द्र विभिन्न राष्ट्रीय मंचों और समारोहों में एकल तथा समूह नृत्य की प्रस्तुति दे चुकी हैं। उनकी साथी कलाकार भोपाल की क्षमा कथक की जानी-मानी नृत्यांगना हैं। खजुराहो नृत्य समारोह में थीन नोरेवनातुति मां नर्मदा स्तुति प्रस्तुत दी, जिसमें नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवन रेखा का एक श्रोत बताते हुए मां का दर्जा देते हुए गंगा के समान बताया गया। पवित्र नर्मदा को जीवन और अमरता की आवाजों को गूंजते हुए, नर्मदा की उत्साही लहरें पहाड़ों से घूमती हैं और घाटियों और मैदानों से निकलना दर्शाया स्तुति में देवी नर्मदा के 15 सुंदर नामों का जाप किया जाता है। पवित्रता से प्रकाशित, नर्मदा की एक-एक बूंद मानव शरीर को छूती है,यह सभी पापों को धोती है और आत्मा को पवित्र करती है। नश्वर सत्ता का अंतिम समर्पण,जिसका अस्तित्व प्रकृति द्वारा समकालिक है, प्रस्तुति में राग बैरागी भैरव और पुरिया धनश्री पर आधारित रही। इसके बाद थान अल्लारिपु'की प्रस्तुति दी जिसका का अर्थ है कमल का खिलना।
नृत्य में जैसे कमल धीरे-धीरे सूर्य की उपस्थिति में अपनी सुंदर पंखुडिय़ों को प्रकट करता है,वैसे ही नृत्यांगनाओं का शरीर रसिकों की गर्म निगाहों में प्रकट होता है। इसके बाद राग संकरा तथा मन्तिका ताल में काली ध्रुपद प्रस्तुत किया, जिसमें भगवति जगदंबा कालिका की स्तुति हैं,इसमें भगवति के स्वरूप का स्मरण करते हुए उन्हें संपूर्ण सृष्टि की संचालिका बताया हैं दुष्टों का नाश करने वाली और शिव जी के हृदय को प्रसन्न करने वाली ऐसी भगवति हैं जो सुखदायी भी है और दुष्टों के लिए दुखदायी भी है।
वसंत आगमन से उल्लास व उमंग का प्रवाह
समारोह की दूसरी प्रस्तुति में नृत्यांगना शमा भाटे और साथियों द्वारा कथक समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया। अपनी नृत्य साधना से देश-विदेश में ख्याति अर्जित कर परम्परागत शास्त्रीय नृत्यांगना चित्रकला,शिल्प और सिनेमा जैसी विधाओं के साथ नृत्य की जुगलबंदी के लिए भी जानी जाती हैं। इन्हें महाराष्ट्र राज्य पुरस्कार,कुंदन लाल गंगानी अवार्ड और नेहरू युवा केन्द्र पुरस्कारों सहित कई राष्ट्रीय प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने खजुराहो नृत्य समारोह में उमंग की प्रस्तुति दी,जिसमें कृष्ण वंदना से बसंत के आगमन,सृष्टि के खिलने की,निरंतर बहते झरनों की,पंछियों के चहकने की,डालियों मे झूलते झूलों की,नए पर्व के उल्हास की उमंगों को दर्शाया गया। इसके बाद ग्वालियर घराने की बंदिश राग बसंत का तराना की प्रस्तुति दी, जिसमें बसंत ऋतू के आगमन के साथ नये इरादे,नई उम्मीदें उजागर होती हैं,रथ में सवार हर्षोल्लास के फूल बिखेरते ऋतुराज वसंत का आगमन बागों में झूले पड़े हैं, चारों ओर सुगंध ही सुगंध है भवरे मंडरा रहे हैं फूल खिले हुए हैं बसंत राग की उमंगे,स्फूर्ती दर्शाई गई। इसके बाद होरी की प्रस्तुति दी,होली का पर्व हर किसी का मनभावन त्योहार चारों और धूम सब दूर हर्ष उल्हास हर कोई आनंदित मस्त गोपी और कृष्ण के प्रेम को दर्शाया। बाजे मुरालिया बाजे में कथक नर्तक कृष्ण की लीलाएं बताते, गाते, नाचते, कभी नहीं थकते सिर्फ़ कृष्ण की कथाएं ही नहीं, तो उनके रूप का वर्णन उनके संगीत का असर नृत्य मे अक्सर दिखता हैं,पंछी उडऩा भूल के हवा में झूमते, तो गौवें चरना छोड़ के.. पेड़-पौधे तक संगीत में मग्न हो जाते थे। गोपियों की गगरी पानी में बह जाती थी, संगीत का एक ऐसा समाज जिसमें हर कोई विलीन हो जाता है।
गोपियों के प्रेम को मार्मिक ढंग से किया प्रस्तुत
समारोह की तीसरी और आखरी प्रस्तुति में तपस्या इम्फाल के कलाकारों द्वारा मणिपुरी समूह नृत्य प्रस्तुत किया गया। मणिपुर की कलाओं और भारतीय संस्कृति की धरोहर को दुनिया भर में पहुंचाने के लिए न्यूयॉर्क,ग्लासको सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियाँ देने वाली नृत्यांगना तपस्या ने खजुराहो नृत्य समारोह में अपनी भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं। नृत्य का आगाज़ नट संकीर्तन से हुआ। यह पूजा का एक रूप है जो महायज्ञ के रूप में माना जाता है। यह श्रीमद भागवत के सौंदर्य तत्व को प्रदर्शित करता है। मणिपुरी शैली में नर्तकों ने पुंग और करताल के साथ मंद अभिनय नृत्य संगीत के साथ इसे पेश किया। यूनेस्को ने मणिपुरी नृत्य संकीर्तन को अपनी प्रतिनिधि सूची में जगह दी है। अगली प्रस्तुति एको गोपी एको श्याम की रही। ये रचना श्रीमद्भागवत के रास पंचाध्याय से ली गई है। इस प्रस्तुति में कृष्ण के प्रति गोपियों के प्यार को बड़े ही उदात्त और मार्मिक ढंग से पेश किया गया। फिर कृष्ण के प्यार में जो अहंकार गोपियों में आया उसे कृष्ण द्वारा तोडऩ और उसका गोपियों को अहसास कराने कि प्रेम में अहंकार की कोई जगह नहीं , इसे मणिपुरी नर्तकों ने बड़ी शिद्दत से पेश किया। अहंकार होने पर कृष्ण गोपियों को छोड़कर चले जाते हैं और अहंकार टूटने पर आ जाते हैं। हर गोपी के साथ उनकी उपस्थिति से इसे एको गोपी एको श्याम की संज्ञा दी गई।
Published on:
27 Feb 2022 02:41 am
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