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जांच में उलझा मंगल भवनों में भ्रष्टाचार का मुद्दा और 3.58 करोड़ रुपए का मनरेगा घोटाला

6.60 करोड़ के मंगल भवनों में हुई थी गड़बड़ी, समितियों ने अब तक पूरी नहीं की जांच

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MNREGA scam Mangal Bhavan

छतरपुर। जिले के बड़ामलहरा जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में 12-12 लाख रुपए की लागत से बनने वाले मंगल भवनों में भ्रष्टाचार के मामले की जांच अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इसी तरह 3.58 करोड़ रुपए के मनरेगा घोटाला की जांच भी अधर में लटकी हुई है। वहीं जिले में 375 बेरोजगारों को दिए गए 1046 करोड़ रुपए के लोन की जांच का मामला भी अधर में लटका है। कुल मिलाकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हुए भ्रष्टाचार के मामलों की जांच पूरी कराकर दोषियों पर कार्रवाई को लेकर अफसर गंभीर नहीं है। चुनावी साल होने के कारण इन मामलों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
बड़ामलहरा जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पहले भी करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर हो चुका है। मंगल भवनों के निर्माण में होने वाली गड़बड़ी की जांच के लिए 8 सहायक यंत्रियों की ड्यूटी पिछले महीने निर्धांरित की गई थी। लेकिन अब तक जांच नहीं हो पाई है। जांच प्रतिवेदन के आधार पर ही मंगल भवन निर्माण के लिए दूसरी किश्त दी जानी थी। यह मंगल/सामुदायिक भवन 12-12 लाख की लागत से बनाए जा रहे हैं। गड़बड़ी का सबसे बड़ा नमूना बड़ामलहरा क्षेत्र की ग्राम पंचायत महाराजगंज है जहां गांव में ही 3 मंगल भवन बनाए जा रहे हैं।
यह है मामला : बड़ामलहरा क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में टाइप-1, 2 और 3 प्रकार के भवनों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें निर्माण को लेकर घोटाला होने की आशंका जताई गई थी। इस पर जिला पंचायत सीईओ हर्ष दीक्षित के निर्देशन में आरईएस के ईई डीएस बघेल ने सभी पंचायतों में जांच के आदेश दिए थे। इसमें टाइप-1 में 12 लाख रुपए, टाइप-2 में 20 लाख रुपए और टाइप-3 में 25 लाख स्वीकृत हुए हैं। कुल मिलाकर 6 करोड़ 60 लाख रुपए पंचायतों को दिए गए है। यह भवन सबसे ज्यादा बड़ामलहरा क्षेत्र में बनाए जा रहे हैं। जबकि अन्य जनपदों में दो-चार ग्राम पंचायतों को ही राशि दी गई है। लेकिन इस राशि में गबन किया जा रहा है। इसी को लेकर जांच के आदेश हुए थे, लेकिन यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जांच के लिए सभी जनपद पंचायतों में पदस्थ 8 सहायक यंत्रियों को निर्देश दिए गए थे। इसमें जिला पंचायत सीईओ ने मॉडल प्राक्कलनों में आरसीसी का विस्तृत विवरण दिए जाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि आरसीसी कार्य की जांच भी गंभीरता पूर्वक की जाए। जांच दल को दो दिनों के अंदर जांच शुरू करने के निर्देश देकर चेतावनी भी दी गई थी। लेकिन यह मामला अधर में ही रह गया।
पंचायत मंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई :
बड़ामलहरा क्षेत्र में ही पिछले दिनों हुए 3.58 करोड़ रुपए के मनरेगा घोटाले में पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने जांच के लिए आदेश दिए थे। मंत्री भार्गव ने जांच प्रतिवेदन भी शीघ्र चाहा था, इसको लेकर संचालक ने भी आदेश जारी किया था। इसमें संयुक्त संचालक सीएल डोडियार ने मामले की जांच की। लेकिन पूरे मामले में लीपापोती हो गई है। इसमें किसी सरपंच-सचिव या अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो सकी।
पुलिया निर्माण की भी जांच अटकी :
बड़ामलहरा जनपद की ग्राम पंचायतें अब पूरी तरह से जांच के दायरे में फंसती हुई नजर आ रहीं हंै। इसमें मंगल भवन के साथ ही पुलिया निर्माण कार्य में भी गड़बड़ी की गई, जिसमें पत्थर डालकर पैसे निकाले गए। करीब 10-10 लाख रुपए की लागत से बनी हुईं पुलियों की जांच करने के निर्देश भी जिला पंचायत सीईओ ने दिए थे। इसमें जनपद पंचायत अध्यक्ष पति द्वारा मनमाने तरीके से मूल्यांकन कराए जाने का मामला सामने आया था। इसमें मामले की जानकारी जिला सीईओ तक पहुंचने के बाद जांच के आदेश हुए। अध्यक्ष पति भोपाल स्तर से कार्य स्वीकृत कराकर स्वयं ही ठेकेदारी प्रथा से कार्य पूरा कर उसमें गड़बड़ी को अंजाम देते हैं।
इन पंचायतों में हुए थे काम स्वीकृत :
बिजावर की पाटन और बक्सोई ग्रापं, बड़ामलहरा क्षेत्र की लिधौरा,कुड़ीला, विक्रमपुरा, पीरा, रजपुरा, पिपराकला फुटवारी, अमरया, ढड़ौरा, बछरावनी, बंधा चंदौली, भोयरा, विश्वां, प्रतापपुरा, सैरोरा, कायन, अंधियारा,भैल्दा, सड़वा, महाराजगंज में तीन कार्य, कुटौरा, बमनीघाट, मनकारी, पनवारी, सिमरिया, स्वारा, कुंवरपुरा, बूदौर, बारौ, देवपुर प्रथम और बकस्वाहा जनपद की देवरी, मझगुवांघाटी, चौरई, गढ़ोही, मडिय़ाबुजुर्ग, वीरमपुरा, चचाईसेमरा, किशुनपुरा, बढ़ीसेमरा ग्राम पंचायत शामिल हैं। इसमें 33 कार्य तो केवल बड़ामलहरा जनपद पंचायत क्षेत्र के हैं।
इन कार्यो में हुआ था 3.58 करोड़ का मनरेगा घोटाला :
१. स्ट्रेगार्ड ट्रिंप : ग्राम पंचायत देवपुर द्वितीय, भोजपुरा, राजापुर, डोगरपुरा, मुगवारी, बंधा चमरोई, बमनी, अंधियारा, कुड़ीला, भगवां, भोयरा, भेल्दा, पीरा, घिनौची, फुटवारी सहित अन्य पंचायत में 47.39 लाख रुपए का इस कार्य में गबन किया गया था।
२. बोल्डर चेक डेंप : ग्राम पंचायत अंधियारा, बंधा चमरोई, देवरान, भोयरा, मेलवार, कुटोरा, रानीताल, सिग्रामपुरा, डोगरपुरा, में 81.07 लाख रुपए से बोल्डर चेक डेंप का निर्माण कर अनियंत्रित भुगतान सरपंच-सचिव और रोजगार सहायक द्वारा किया गया था।
३. नाडेप निर्माण : ग्राम पंचायत विक्रमपुरा, झिगरी, सूरजपुरा खुदज़्, मुगवारी, रजपुरा, मनकारी, अंधियारा, बोंकना, देवपुर द्वितीय, डोगरपुरा, बंधा चमरोई, सड़वा, पिपराकलां सहित एक अन्य पंचायत में करीब 59.19 रुपए का नाडेप निर्माण के रूप में गबन किया गया था।
4. वर्मी कंपोस्ट निर्माण : ग्राम पंचायत मुगवारी, बंधा चमरोई, सूरजपुरा खुर्द में 10.89 लाख रुपए का गबन इस कार्य में किया गया था।
इन सब इंजीनियरों को करनी थी इन पंचायतों की जांच :
जनपद पंचायत बड़ामलहरा :
- डीके भंडारी: महाराजगंज, पिपराकलां, सड़वा, विक्रमपुरा, मनकारी, रजपुरा, प्रतापपुरा, अंधियारा।
- पुरुषोत्तम शुक्ला: सौरई, भोयरा, भेलदा, अमरवा, ढडौरा, बछरावनी, बंधा, चंदौली, कुटौरा।
- यासीन खान: देवपुर प्रथम, वीरों, बुदौर खास, सिमरिया, कुड़ेला।
- केएस खरे: सिजवाहा, लिधौरा, फुटवारी, पीरा, सैरोरा, काछन, बमनी घाट, कुंवरपुरा।
जनपद पंचायत बकस्वाहा :
- एनके शर्मा: देवरी, मझगवांघाटी, चौरई, गढ़ोही, मढिय़ाबुजुर्ग, वीरमपुर, चचईसेमरा, किशनपुर, गढ़ीसेमरा।
जनपद पंचायत बिजावर : - अर्पित चौधरी: पिपट, बक्सौही, पाटन।
जनपद पंचायत राजनगर : - अर्पित चौधरी: शिवराजपुर, नहदौरा, मझगुवां।
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जिले में 375 बेरोजगारों को दिए गए 1046 करोड़ रु. के लोन की जांच भी अटकी :
जिले में दो सालों में 375 बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 1046 करोड़ रुपए लोन के रूप में बैंकों द्वारा दिए गए थे। इसमें करोड़ों रुपए अनुदान के रूप में हितग्राहियों को दिए गए थे, लेकिन अनुदान लेने के बाद हितग्राहियों ने रोजगार के लिए उद्योग या व्यवसाय स्थापित नहीं किए। अब भोपाल मुख्यालय से एक निजी एजेंसी को खूफिया जांच करने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। लेकिन यह जांच भी अटकी हुई है। जबकि भोपाल स्तर से प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से इस मामले की जांच कराई जानी थी, लेकिन इसकी भी जांच नहीं हुई है।

सभी मामलों की जांच चल रही है, जल्दी होगी कार्रवाई :
- मनरेगा, लोन या मंगल भवन सहित अन्य निर्माण कार्यों में गड़बड़ी की आशंका को लेकर मैने ही जांच के आदेश दिए थे7 जांच के लिए टीमें बना दी गई थीं। कुछ जांच दलों के प्रतिवेदन भी आ गए हैं। कुछ जांचें प्र्िरक्रया में है। जल्द ही सभी मामलों की जांच पूरा कराकर कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
- हर्ष दीक्षित, जिला पंचायत सीईओ