
MP News: मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में खेत के कुएं को खतौनी में दर्ज करने की एवज में रिश्वत लेने के मामले में विशेष न्यायालय ने सख्त रूख अपनाते हुए पटवारी और उसके सहयोगी को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चार-चार साल का सश्रम कारावास और 5-5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
दरअसल, धरमपुरा गांव के एक किसान ने 11 नवंबर 2016 को बकस्वाहा तहसील कार्यालय में आवेदन देकर अपने खेत में बने दो कुएं को खतौनी में इंद्राज कर सिंचित दर्ज कराने की मांग की थी। तहसीलदार ने इसके संबंध में पटवारी को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। किसान की ओर से आरोप लगाया गया था कि पटवारी ने काम करने की एवज में 5 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी।
शिकायत मिलने पर लोकायुक्त सागर की टीम ने जांच शुरू की और रिश्वत मांगने की पुष्टि के लिए वाइस रिकॉर्ड कराया था। जिसमें भ्रष्टाचार की पुष्टि होने पर 8 दिसंबर 2016 को पटवारी के घर के पास जाल बिछाया गया। इस दौरान सहयोगी के हाथों रिश्वत ली गई और मौके से पर्स सहित पैसे जब्त कर लिए गए। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया गया है।
कोर्ट ने लंबे विचारण के बाद लोकायुक्त के विशेष न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत गवाहों और सबूतों के आधार पर पटवारी और उसके सहयोगी को दोषी ठहराया। कोर्ट का कहना था कि सरकारी पद का दुरुपयोग कर रिश्वत लेना गंभीर अपराध है। जिससे आम लोगों का प्रशासन से विश्वास डगमगाता है। इसके आधार पर दोनों को चार साल की कठोर कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
Published on:
20 Sept 2025 08:47 pm
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