
आरोपों से घिरा जिला महिला अस्पताल, सीएमएस ने दिए जांच के आदेश
बांदा। एक बार फिर जिला महिला अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही देखने को मिली जिससे एक नवजात की मौत हो गयी। परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कर्मचारियों द्वारा पैसे की मांग पूरी न करने पर बच्चे की हालत को गंभीर बताकर रेफर का पर्चा थमा दिया। और इलाज के अभाव में नवजात की मौत हो गयी। मेडिकल कर्मचारियों पर आरोप है कि उनकी दबंगई के चलते बच्चे की जान गई है यदि उसका इलाज करते तो बच्चे की जान नहीं जाती। स्टाफ ने मनमानी दिखाते हुए देर रात बच्चे को रेफर करने के बाद न ले जाने पर उन्होंने पुलिस बुला ली। परिजन बच्चे के इलाज के लिए गिड़गिड़ाते रहे। मृतक बच्चे के पिता ने कहा कि साहब! मैं गरीब न होता तो मेरे बच्चे की जान बच जाती। फिलहाल पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए सीएमएस ने जांच के आदेश दिए हैं।
नरैनी थाना के करतल इलाके के रहने वाले बृजेश कुमार ने बताया कि शनिवार को सीएचसी नरैनी में मेरी पत्नी की नॉर्मल डिलिवरी हुई थी। लेकिन नवजात को हिचकी टाइप से आ रही थी, जिससे एएनएम ने अच्छी मशीनों से जांच कराकर बड़े डॉक्टर को दिखाने के लिए जिला महिला अस्पताल भेजा था। जिस कारण हम जिला महिला अस्पताल आये यहां डॉक्टरों ने चेकअप किया तब बच्चा रो रहा था, डॉक्टरों ने कहा परेशानी की कोई बात नहीं है ठीक हो जाएगा। तभी डॉक्टर और मेडिकल कर्मचारियों ने लड़का पैदा होने की खुशी को लेकर 1500 रुपये की मांग की और कहा कि हम पूरा सहयोग करेंगे तो मैने कहा साहब! मैं गरीब आदमी हूँ मैं इतना पैसा नहीं दे सकता हूँ। तो डॉक्टर ने कहा दीपावली में हम लोग घर नहीं गए अस्पताल में इलाज कर रहे हैं। तुमसे बड़े गरीब तो हम हैं। मैं उनके हाथ पैर पकड़कर बच्चे के इलाज के लिए गिड़गिड़ाने लगा। तो हमको बाहर भगा दिया। और कहां कि जब बुलाएंगे तब आना, जिसके बाद 15 मिनट बाद बुलाया और कहा कि तुम्हारा बच्चा बहुत गंभीर है। बच्चे को प्रयागराज मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जा रहा है। तो मैंने कहा रात 12 बजे हम बच्चे को लेकर कहाँ जाएंगे। तो डॉक्टर ने बोला कि तुम बहुत नेता बन रहे हो। रुको अभी पुलिस को बुलवा रही हूं और बाहर भगा दिया लेकिन फिर भी मैं बच्चे के इलाज के लिए गिड़गिड़ाता रहा। तभी बच्चे की मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि हम अस्पताल में साढ़े 7 बजे भर्ती हुए थे। हमसे 1500 रुपये की मांग की गई थी। मांग पूरी न करने पर बच्चे को गंभीर बता रेफर कर दिया और फिर देर रात अचानक बच्चे को मृत घोषित कर दिया। जब हम बच्चे को अस्पताल लाए थे तब बच्चा नॉर्मल था। मेडिकल स्टाफ ने लापरवाही की है। अगर मैं गरीब ना होता और पैसे दे देता तो मेरे बच्चे की जान बच सकती थी।
सीएमएस सुनीता सिंह ने बताया कि मामला संज्ञान में आते ही वह खुद देर रात अस्पताल पहुँची थी। लेकिन जांच में मुझे कुछ ऐसा नही लगा। रुपए मांगे जाने की सवालों पर उन्होंने कहा कि बच्चे की हालत गंभीर होने के कारण हायर सेंटर ले जाने की बात की थी। लेकिन परिजन यहीं इलाज करने को बोल रहे थे। डॉक्टर ने पूरा प्रयास किया लेकिन बच्चे की मौत हो गई। फिर भी मैं जांच करा रही हूं, जो भी डॉक्टर या कर्मचारी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
Published on:
27 Oct 2022 10:22 am
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