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पोषण वाटिका से मिलेगा पोषण व स्वरोजगार, महिलाएं होंगी आत्मनिर्भर

जिले मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के मकसद से जैविक पोषण वाटिकाएं तैयार की जा रही हैं। पूजे जिले में 75 पोषण वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। चिंहित जगहों पर समूह की यह महिलाएं इस जमीन पर सब्जी, फल, फूल उगाने के साथ ही खेती करेंगी। इससे उन्हें पौष्टिक भोजन तो मिलेगा ही साथ ही बाजार में अपना उत्पादन बेचकर वे आमदनी ले सकेंगी।

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VATIKA

पोषण वाटिका

छतरपुर. जिले मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के मकसद से जैविक पोषण वाटिकाएं तैयार की जा रही हैं। पूजे जिले में 75 पोषण वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। चिंहित जगहों पर समूह की यह महिलाएं इस जमीन पर सब्जी, फल, फूल उगाने के साथ ही खेती करेंगी। इससे उन्हें पौष्टिक भोजन तो मिलेगा ही साथ ही बाजार में अपना उत्पादन बेचकर वे आमदनी ले सकेंगी।

सरसेड़ की महिलाएं आई आगे


दिलीप शाक्य ने बताया कि आगामी दिनों में जिले के धौरी, कालापानी, बरकहा, रमपुरा, रनगवां, मातगुवां, बनगांय, सौरा, खौप सहित 75 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक पोषण वाटिका का निर्माण किया जाएगा। सरसेड़ में महिलाएं 2 हेक्टेयर सरकारी जमीन में 1250 पौधों से तैयार कर रहीं है। सामुदायिक पोषण वाटिका के उत्पादन बेचकर वे अपना भरण पोषणा भी करेंगी। जिले की गर्भवती महिलाओं और बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने जिलेभर में सामुदायिक पोषण वाटिका तैयार की जा रही है। जिसे जर्मन की संस्था के सहयोग से जीआईजेड टीम की सृजन संस्था तैयार करा रही है। इस संस्था के सहयोग से नौगांव क्षेत्र में सरसेड गांव की महिलाएं गांव के पास स्थित 2 हेक्टेयर जमीन में 1250 पौधे रोपित कर वाटिका तैयार कर रही हैं।

समूह बनाकर काम कर रही महिलाएं


इसकी शुरुआत सरसेड गांव में जय श्रीराम स्व सहायता समूह की अध्यक्ष उमा कुशवाहा और रामरती लोधी ने समूह की महिला सदस्यों के साथ कर दी है। इस पोषण वाटिका के तैयार होने पर इसमें से जो भी उत्पादन निकलेगा उसे समूह की महिलाएं गांव और शहर में विक्रय पर अपना जीवन यापन करेंगी। साथ ही इस वाटिका से निकलने वाली सब्जियों का स्वयं उपयोग कर परिवार की महिलाओं और बच्चों को पोष्टिक आहार उपलब्ध कराएंगी। अब तक महिलाओं ने 600 पौधे रोप दिए हैं।

जैविक खाद से होगा हरी सब्जियों का उत्पादन


समूह की अध्यक्ष उमा कुशवाहा ने बताया वाटिका में जैविक तरीके से खेती की जाएगी। ताकि महिलाओं व बच्चों में किसी प्रकार की बीमारीन फैले और स्वस्थ रहें। इनमें पालक, मैथी, मूली, आलू, बैंगन, टमाटर, प्याज सहित विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की खेती की जाएगी। गेहूं चना और मटर का उत्पादन भी होगा। ताकि महिलाएं अच्छा खाने के साथ शेष बची सब्जियों को बाजार में बेचकर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें।

मप्र के सीहोर व छतरपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट


जानकारी अनुसार सीहोर जिले के इछावर ब्लॉक और छतरपुर जिले के बिजावर ब्लॉक के ग्राम रगौली में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान पोषण वाटिका का प्रयोग किया गया था। इसको आशातीत सफलता मिली है। वर्ष 2019 से छतरपुर सहित प्रदेश के दो जिलों में पोषण वाटिका को लेकर जर्मनी की संस्था के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट की कामयाबी से इस साल पोषण वाटिका पूरे मध्य प्रदेश में शुरू कर दी गई हैं। छतरपुर जिले में 75 पोषण वाटिका शुरू करने का लक्ष्य है। फिलहाल जिले के 4 ब्लाकों में काम शुरू हो गया है। छतरपुर ब्लाक में 19 गांवों का चयन किया गया है।