
Merry Christmas: 1931 में अंग्रेजों ने बनवाया था छतरपुर में चर्च, महाराजा ने दी थी जमीन
छतरपुर. आज क्रिसमस पर छतरपुर के जिस आराधना गृह यानी चर्च में मसीही समाज प्रभु ईशू की आराधना करेंगे, उसका इतिहास काफी पुराना है। नौगांव के चर्च के बाद छतरपुर में चर्च स्थापित हुआ था। आजादी के पहले बने चर्च की पहले अंग्रेजों ने देखरेख की और बाद से अब तक मसीही समाज यहां आराधना करता आ रहा हैं।
चर्च का इतिहास जानने के लिए हमने समाज के सबसे वरिष्ठ डॉ.गेब्रियन मैसी से चर्चा की। जिसने काफी नई बातें चर्च के इतिहास पर जानने मिली। उन्होंने चर्च को मिलने वाली जगह, स्थापना और जीर्णोद्धार तक के बारे में विस्तृत जानकारी दी। डॉ. मैसी ने प्रभु ईशू के जन्म और उत्सव के बारे में भी चर्चा की।
अमरिकन मिशनरी ने की चर्च की स्थापना
डॉ. गेब्रियन मैसी के अनुसार छतरपुर चर्च का नाम मित्र कलीशिया है। इसकी स्थापना 1930-31 के मध्य हुई, जिसे अमरिकन मिशनरी द्वारा स्थापित किया गया था। इसके लिए छतरपुर के तत्कालीन महाराजा द्वारा जमीन दी गई थी। भारत की आजादी के पहले चर्च का संचालन अमरिकन लोगों द्वारा किया जाता था।
1955 से देखरेख कर रही कलीशिया
डॉ. मैसी के अनुसार भारत की आजादी के बाद1955 में अमरिकन मिशनरी द्वारा भारतीय मसीही समाज के सुपुर्द कर दिया था। इसके बाद से लगातार हमारी कलीशिया चर्च की देखरेख करती आ रही हैं। 1979 में चर्च का जीर्णोद्धार किया गया था। जो काफी बढ़ भी गया हैं। यहां कलीशिया चर्च की रखवाले की भूमिका में रहते हैं। चर्च का संचालन हर माह आने वाली भेंट से होता हैं।
क्रिसमस पर चर्च में महीने भर होते है कार्यक्रम
डॉ. गेब्रियन मैसी ने बताया कि 700 वर्ष पहले एक भविष्य वक्ता ने एक बालक पैदा होने की भविष्णवाणी की थी। दूसरे वक्ता ने प्रभु ईशू के जन्म की बात कही थी। इसके 700 वर्ष बाद यह भविष्यवाणी पूरी हुई और प्रभु ईशू का जन्म हुआ था। जन्म के समय स्वर्ण के दूत आए और भेड़ो और बकरियों की रखवाली कर रहे थे, को जन्म की सूचना दी थी। दूसरे और लोगों के लिए आसमान में एक विशेष दिखाई दिया था। तारा देखकर बताया गया कि कोई महापुरुष पैदा हुआ हैं। इस तरह प्रभु ईशू का जन्म की जानकारी दुनिया में फैल गई। इसीलिए क्रिसमस मनाया जाता है। इस मौके पर पूरे महीने चर्च में कार्यक्रम होते हैं।
Published on:
24 Dec 2019 08:34 pm
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