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गुरु पूर्णिमा पर बागेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, बागेश्वर महाराज ने कहा- गुरु ही पूर्ण मां हैं

धाम पर गुरुवार तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और दोपहर तक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बागेश्वर बालाजी के दर्शन किए। पूरे धाम में भक्तों की उत्साही भीड़ और भजन-कीर्तन की गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

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bageshwar dham

बागेश्वर धाम

जिले के प्रसिद्ध बागेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने आकर गुरु भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में स्वयं को सराबोर किया। धाम पर गुरुवार तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था और दोपहर तक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने बागेश्वर बालाजी के दर्शन किए। पूरे धाम में भक्तों की उत्साही भीड़ और भजन-कीर्तन की गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बागेश्वर धाम सरकार पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज ने प्रातः कालीन पूजन, हवन और बालाजी भगवान के दर्शन किए। उन्होंने संन्यासी बाबा के मंदिर में भी विधिवत पूजा कर आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात बागेश्वर महाराज के दीक्षित शिष्यों ने महाराज की आरती उतारी और चरण वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

परमात्मा की अनुभूति गुरु के माध्यम से

बागेश्वर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु ही पूर्ण मां होते हैं। बचपन में मां की ममता, युवावस्था में महात्मा का मार्गदर्शन और बुढ़ापे में परमात्मा की अनुभूति गुरु के माध्यम से ही संभव है। जिस किसी को जीवन में सच्चे गुरु मिल जाते हैं, उन्हें परमात्मा की प्राप्ति निश्चित होती है। उन्होंने आगे कहा कि जिनके पास गुरु नहीं हैं, वे आज से बागेश्वर बालाजी को ही अपना गुरु मान लें, उनका जीवन भी धन्य हो जाएगा।

विशाल भंडारे का आयोजन किया गया

इस अवसर पर धाम परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें खीर, पूरी, हलवा, सब्जी सहित कई प्रकार के व्यंजन प्रसाद के रूप में तैयार किए गए। देश-विदेश से आए भक्तों ने न केवल दर्शन किए, बल्कि गुरु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रसाद ग्रहण किया। गुरु पूर्णिमा के ठीक एक दिन पहले एक नई और अद्भुत परंपरा की शुरुआत भी हुई, जिसमें संन्यासी बाबा की पादुका की शाही सवारी निकाली गई। यह सवारी वैदिक मंत्रोच्चारण और वाद्य यंत्रों के साथ निकाली गई, जिसमें आचार्यों द्वारा विधिवत पूजन किया गया। इस आयोजन ने तीन दिनों तक धार्मिक वातावरण को और भी गरिमामयी बना दिया। बागेश्वर धाम में आयोजित इस गुरु पूर्णिमा उत्सव में भक्ति, सेवा और सत्संग का जो संगम देखने को मिला, वह श्रद्धालुओं के लिए न केवल आत्मिक शांति का अनुभव था, बल्कि गुरु के महत्व को समझने और उनके प्रति आस्था को और दृढ़ करने का भी अवसर बना।