नीरज सोनी
छतरपुर। पुलवामा हादसे के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को पानी नहीं देने का जैसे ही फैसला किया वैसे ही बुंदेलखंड के छतरपुर जिले के सभी पान किसानों ने भी एक साहसिक कदम आगे बढ़ाते हुए पाकिस्तान को अपने पान नहीं बेचने का फैसला कर लिया है। ऐसे में पाकिस्तान के लोगों के ओंठों पर सजने वाली बुंदेलखंड के पान की लाली अब छिनने वाली है। जिले के पास किसानों के इस फैसले की लोग सराहना कर रहे हैं और उनके साहस को भी सलाम कर रहे हैं।
पुलवामा की घटना के बाद जिले के पान किसानों ने आपस में बातचीत के बाद आम सहमति से यह निर्णय किया है कि वे पाकिस्तान को अपने बरेजों में पैदा होने वाला पान नहीं बेचेंगे। छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा, महाराजपुर, बारीगढ़, पिपट, पनागर एवं महोबा जिले में जिस किस्म पान की पैदावार होती है उसकी डिमांड पाकिस्तान में सबसे ज्यादा है। इसलिए यहां का पान मेरठ एवं सहारंगपुर की पान मंडी के माध्यम से पाकिस्तान निर्यात किया जाता है। यहां के पान किसान महेंद्र चौरसिया, मानिक चौरसिया, राजकुमार चौरसिया, मुकेश चौरसिया का कहना है कि वे अपने पान को अब मेरठ और सहारंगपुर की मंडी में नहीं भेजेंगे। ताकि पाकिस्तान तक हमारे यहां का पान नहीं पहुंचे और वे उसके लिए तरस जाए।
पान किसानों को होगा लाखों का नुकसान :
पान किसानों के इस फैसले के बाद अगर पान किसानों को होने वाले नुकसान पर नजर डाली जाए तो पता चलता है कि सप्ताह में तीन दिन में 45 से 50 बंडल पान मेरठ और सहारंगपुर की मंडी में जाते है। एक बंडल की कीमत 30 हजार रुपए होती है। ऐसे में इन पान किसानों का अनुमानित 13 से 15 लाख रुपए का नुकसान होगा। लेकिन इन पान किसानों को नफा-नुकसान की कोई चिंता नहीं है। किसानों का यह भी कहना है कि हमारी भारत सरकार जब पानी नहीं देने जैसा बड़ा फैसला ले सकती है तो हम अपने भारत देश की खातिर इतना तो कर ही सकते है।