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शहर के लोग बोले- ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार जरुरी, तभी जाम से मिलेगी राहत

यात्री बसों और ऑटो जहां-तहां खड़े करने से हो रही ज्यादा परेशानीबाइकर्स पैदा कर रहे जाम और दुर्घटना की स्थिति

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traffic jam

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छतरपुर। सड़कों पर ट्रैफिक से शहर के लोग परेशान हो गए हैं। शहर के किसी भी कोने में जाना हो, ट्रैफिक जाम से गुजरकर ही जाना पड़ता है। ट्रैफिक जाम दिनचर्या में शामिल हो गया है। लोग जाम से इतना ज्यादा परेशान हो चुके हैं, कि वे समस्या के समाधान की उम्मीद खोने लगे हैं। लोगों का कहना है, कि छोटे-छोटे कुछ जरुरी कदम उठा लिए जाए तो ट्रैफिक जाम से राहत मिल सकती है, लेकिन प्रशासन छोटी-छोटी व्यवस्थाएं न तो कर पाया न ही सुधार पाया है। हालांकि जाम से राहत दिलाने के लिए सड़कों के चौड़ीकरण की योजना तो बनाई गई, लेकिन सही मायने में चौड़ीकरण न होने से समस्या आज भी बनी हुई है। शहर के लोगों का कहना है, कि जाम लगने के पीछे पार्किंग, ट्रैफिक सिग्नल, सड़क पर दुकानों का सामान, चौड़ीकरण के बाद सड़क पर ही छूट गए बिजली के खंभे प्रमुख कारण है। इन्हीं समस्याओं को सुलझा लेने से ट्रैफिक समस्या सुधर सकती है। लेकिन ये समस्याएं केवल यातायात पुलिस के प्रयास से सुधरने वाली नहीं है, ट्रैफिक पुलिस की सख्ती के सात ही अन्य शासकीय विभागों से तालमेल बनाकर ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है।
परमिट के अनुसार ही चले ऑटो, बसें निर्धारित जगह हो खड़ी
शहर के अंदर बड़ी संख्या में ऑटो चलते हैं। किसी भी सड़क पर अन्य वाहनों की संख्या के बराबर ही ऑटो नजर आ जाते हैं। इसकी वजह ये है कि शहर के परमिट वाले ऑटो के अलावा ग्रामीण इलाके के ऑटो भी शहर के अंदर ही चलते हैं। शहर में 1200 ऑटो को परमिट मिला है, जबकि लगभग 2 हजार ऑटो शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में ऑटो शहर में होने से ही सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। सुरेश गुप्ता का कहना है, कि सवारी भरने के लिए ऑटो चालक कहीं भी ऑटो अचानक खड़ा कर देते हैं। जिससे जाम और दुर्घटना की स्थिति बन जाती है। जीएल अहिरवार का कहना है, कि शहर से गुजरने वाली बसें यात्रियों को उतारने और बैठाने के लिए कहीं भी खड़ी हो जाती है। बसें भले 2 से 5 मिनट के लिए ही खड़ी होती है, लेोकिन वाहनों से भरी सड़क पर इतने में ही जाम लग जाता है।
सही काम करे पुराने सिग्नल, नए भी लगाए जाए
शहर में पन्ना नाका, बस स्टैंड, डाकखाना चौराहा पर लगे सिग्नल ज्यादातर खराब रहते हैं। वर्तमान में सिर्फ चौबे अस्पताल तिराहे पर सिग्नल काम कर रहा है। बाकी जगह सिग्नल केवल दिखावा साबित हो रहे हैं। इन सिग्नलों का सही और हमेशा काम करते रहना जरूरी है। सिग्नलों के रखरखाव और उसकी मॉनिटरिंग की जरुरत है। इसके साथ ही शहर के कुछ स्थानों पर सिग्नल लगाए जाने की जरूरत भी है। बजरंगनगर निवासी गोपाल श्रीवास्तव का कहना है, कि बस स्टैंड के महोबा रोड और झांसी रोड निकास, महाराजा कॉलेज तिराहा, पन्ना नाके पर पुलिस लाइन मोड पर, चौक बाजार , महल तिराहा पर ट्रैफिक सिग्नल की जरूरत है। नरसिंहगढ़ पुरवा निवासी संजय त्रिपाठी का कहना है, कि जिन तिराहों पर ट्रैफिक का दबाव ज्यादा है, वहां सिग्नल लगाने से जाम से राहत मिल सकती है। शहर के सभी चौक और तिराहे पर वाहनों को निकलने में जद्दोजहद करनी पड़ती है। पहले निकलने के चक्कर में सभी वाहन चालक बीच सड़क पर फंस जाते हैं। छात्रा शैलवी श्रीवास्तव का कहना है, कि शहर में संकेतक, डिवाइडर और स्पीड ब्रेकर की समुचित व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि यातायात व्यवस्था ठीक रहे।
चौड़ीकरण के बाद सड़क पर छोड़ दिए बिजली के खंभे
शहर के बीच से गुजरने वाले दोनों नेशनल हाइवे का नगरपालिका की सीमा में डेढ़ साल पहले चौड़ीकरण किया गया था। चौड़ीकरण के बाद डिवाइडर का निर्माण कराया गया। डिवाइडर बनने से दोनों लेन के वाहन अलग-अलग चलने से राहत तो मिली , लेकिन जवाहर रोड पर चौड़ीकरण के बाद बिजली के खंभे और डीपी सड़क किनारे नहीं किए गए। चेतगिरी कॉलोनी निवासी बीआर रिछारिया कहते हैं, कि सड़क के बीच खड़े बिजली के खंभे जाम लगने का कारण बन रहे हैं। सटई रोड निवासी नितिन खरे का कहना है, कि चौबे कॉलौनी के मोड से पन्ना नाके तक,पीएनबी बैंक के सामने,कल्याण मंडपम के सामने सड़क के बीच लगे बिजली के खंभे रोज लग रहे सड़क जाम का बड़ा कारण हैं।
शहर के अंदर नहीं है पार्किंग
जिला मुख्यालय पर वाहनों की पार्किग की समस्या सबसे बड़ी समस्या है। प्रशासन ने यह तो तय कर दिया है कि शहर के किस-किस इलाके में नो-पार्किंग है,लेकिन शहर के बीच पार्किंग कहां कर सकते हैं, इसको लेकर अभी तक कोई निर्धारण नहीं हुआ है। शहर के पन्ना रोड,सागर रोड और झांसी रोड पर आउटर साइड में सड़क किनारे वाहन पार्किंग की व्यवस्था लागू की गई है। शहर के अंदर बड़े वाहन पार्क नहीं किए जा सकते हैं। लेकिन निजी वाहन,मोटर साइकिल,स्कूटर को शहर के बाजर वाले इलाके,अस्पताल के पास,बस स्टैंड पर कहां पार्क किया जाए,इसकी व्यवस्था नहीं की गई है। पन्ना नाका निवासी आशीष जगधारी का कहना है ,कि प्रशासन जब तक पार्किंग की व्यवस्था नहीं करता है, वाहनों के सड़क पर पार्क होने से लगने वाले जाम से निपटा नहीं जा सकता है। महलन निवासी नमन नायडू का कहना है, कि बाजार वाले इलाके में जहां-जहां सरकारी जमीन खाली पड़ी है, वहां छोटी-बड़ी पार्किंग बनाकर वाहनों को घने बाजार में जाने से रोककर ही जाम की समस्या से निपटा जा सकता है।
सड़क तक फैली दुकानों से छोटी हो जाती है सड़क
जिला मुख्यालय के बाजार वाले इलाकों में सड़क तक फैली दुकानें सड़क पर जाम का प्रमुख कारण बनती हैं। दुकानदार सड़क तक सामान फैलाकर रखते हैं,इन सामनों से लगकर ही ग्राहकों की गाडिय़ां पार्क होती हैं। इसके साथ ही सड़क किनारे ही ठेले लगे रहतें हैं। ऐसे में औसत चौड़ाई वाली सड़कें भी सकरी हो जाती हैं। इसी दौरान चार या तीन पहिया वाहन निकलता है जो जाम लग जाता है। एडवोकेट अजय सिंह बताते है, कि शहर में चौक बाजार,महल रोड,हटवारा बाजार,पुरानी गल्लामंडी,छत्रसाल चौक पर दुकानों का विस्तार सड़क तक होने से ट्रैफिक बेजार रहता है। अनुज वाजपेयी का कहना है, कि महल रोड और चौक बाजार इलाके में दुकानें सड़क तक इस तरह से फैली हुईं है कि वाहनों का निकलना मुश्किल होता है। इन इलाकों में हमेशा ही जाम के हालात रहते हैं।
बाइकर्स पर नहीं लगाम
शहर की सड़कों की चौड़ाई के हिसाब से वाहनों की संख्या ज्यादा है, हर सड़क पर वाहनों की भीड़ लगी रहती है। इसी बीच बाइकर्स इन्हीं सड़कों पर स्टंट करते नजर आते हैं। बाइकर्स बेलगाम रफ्तार से भीड़ भरी सड़क पर धड़ल्ले से गुजरते हैं। खासतौर पर कॉलेज और स्कूल के सामने की सड़कों पर युवा बाइकर्स पावर बाइक से स्टंट करते है, बाइकर्स के कारण सड़क पर चलने वाले लोग सहमें रहते हैं। बाइकर्स का दल सड़क पर हो तो बाकी वाहनों की रफ्तार कम हो जाती है और जाम के हाताल बन जाते हैं। पारस दुबे ने बताया कि, महाराजा कॉलेज के आसपास की सड़कों ुपर अक्सर बाइकर्स के कारण वहां से निकलने में परेशानी होती है। नीलम पांडेय का कहना है, कि बाइकर्स शहर की किसी भी सड़क पर मिल जाते हैं। पावर बाइक के स्टंट के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोग सहमें रहते हैं कि, ये बाइकर्स दुर्घटना न कर दें।