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तीन माह से बंद है रेत का वैध उत्खनन, 2500 से 4500 रुपए हुए एक ट्रॉली रेत के दाम

अवैध रुप से उत्खनन होने से राजस्व की हो रही चोरी, प्रति ट्रॉली 2 हजार तक बढ़े दामरेत का वैध उत्खनन न होने से अनलॉक में सरकारी व निजी निर्माण कार्यों पर पड़ेगा असर

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रात के अंधेरे में हो रही रेत की चोरी

रात के अंधेरे में हो रही रेत की चोरी

छतरपुर। अनलॉक होते ही आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में सर्वाधिक सहायक होने वाले निर्माण कार्यों की गति पर बुरा असर पड़ सकता है। दरअसल जिले में रेत का उत्खनन करने वाली ठेकेदार कंपनी आनंदेश्वर एग्रो के द्वारा पिछले तीन महीने से सरकार की रायल्टी नहीं दी गई है और कंपनी ने अपना काम बंद कर दिया है। वैध उत्खनन न होने से रेत के दाम में भारी बढ़ोत्तरी हुई है। एक ट्रॉली यानि 2.80 घन मीटर रेत का दाम 2000 रुपए तक बढ़ गए हैं। 2500 रुपए प्रति ट्रॉली मिलने वाली रेत अब 4000 से 4500 रुपए प्रति सैकड़ा के दाम पर मिल रही है। वहीं, दूसरी तरफ खनिज माफिया जिले की खदानों से रात के अंधेरे में अवैध रुप से उत्खनन कर रहे हैं। फिलहाल जिले में मौजूद सभी रेत के घाट वैधानिक तौर पर बंद पड़े हैं जो भी रेत अभी मिल रही है उसे टीकमगढ़ जिले के पिटपास पर छतरपुर जिले में बेचा जा रहा है।

ठेकेदार पर 26 करोड़ से अधिक का बकाया
दरअसल आनंदेश्वर एग्रो को मप्र सरकार में पूरे जिले की रेत खदानों से उत्खनन का ठेका दिया था। ठेकेदार कंपनी ने फरवरी तक उत्खनन किया और हर महीने जाने वाली किश्त भी सरकार को देती रहीे लेकिन मार्च, अप्रेल और मई महीने में किश्तें नहीं भेजी हैं। कंपनी हर महीने लगभग 8 करोड़ 67 लाख रूपए सरकार को देती है। इस हिसाब से 26 करोड़ एक लाख रूपए का बकाया ठेकेदार पर हो चुका है। कंपनी कोरोना कफ्र्यू के दौरान काम के ठप होने का बहाना देकर किश्तों में छूट चाहती है। यही वजह है कि कंपनी ने कामकाज बंद कर दिया है और सरकार से बातचीत के प्रयास जारी हैं।

रात के अंधेरे में हो रही रेत की चोरी
छतरपुर जिले में चंदला क्षेत्र की दर्जनों रेत खदानें उप्र के बांदा से सटी हुई हैं। इसके साथ ही जिले की कुछ खदानें पन्ना जिले और टीकमगढ़ जिले से सटी हुई हैं। इन खदानों पर वैधानिक रूप से रेत का खनन बंद हो जाने के कारण अब पड़ोसी जिलों में मौजूद रेत माफिया जिले की रेत चुरा रहे हैं। तीन दिन पहले ही खनिज विभाग की टीम ने चंदला क्षेत्र की बारबंद खदान से यूपी के माफिया द्वारा पुल बनाकर की जा रही रेत की चोरी को पकड़ा था। केन नदी पर बनाए गए अस्थाई रास्ता को भी मशीन से तोड़ा गया था। यदि जल्द से जल्द खदानों से वैध उत्खनन शुरु नहीं हुआ तो अवैध कारोबार बढ़ जाएगा। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होगा और निर्माण कार्यों में रेत की किल्लत होगी।

छूट को लेकर चल रही बातचीत
खनिज विभाग के सूत्र बताते हैं कि रेत ठेकेदार कंपनी और सरकार के बीच इस सिलसिले में जल्द ही बातचीत हो सकती है। रायल्टी को लेकर समझौता हो सकता है। कंपनी छूट चाहती है। यदि सरकार ने छूट दी तो पुरानी कंपनी ही ठेका संभालेगी अन्यथा खनिज विभाग नए सिरे से निजी भूमियों के ठेके दे सकता है।

इनका कहना है
फिलहाल जिले में वैधानिक रूप से रेत का उत्खनन बंद है। खनिज विभाग की टीमें लगातार अवैध उत्खनन को रोकने के लिए काम कर रही हैं। सरकार और कंपनी के बीच बातचीत के बाद जल्द ही रास्ता निकल सकता है।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी, छतरपुर