छतरपुर. मेडकिल कॉलेज निर्माण के लिए दोबारा टेंडर जारी किए गए हैं। 247 करोड़ लागत वाले टेंडर के लिए 16 जून तक निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। दो साल में भवन निर्माण को पूरा किया जाएगा। जिसके लिए मुख्य अभियंता कार्यालय लोक निर्माण विभाग ग्वालियर ने निविदा जारी की है। हालांकि इसके बजट को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। पीआइयू के कार्यपालन यंत्री केएस परस्ते ने बताया कि जेपी इंफ्रा ने कंपनी ने काम करने से इनकार कर दिया है। इसके बाद नई सिरे से प्रक्रिया शुरू की जा रही है। लेकिन बजट को लेकर अभी संशय बना हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि यह शासन स्तर का मामला है।
डीन की नियुक्ति अब तक नहीं
मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए 1200 कर्मचारियों की नियुक्ति जरूरी है। इसमें 155 टीचिंग स्टाफ रहना चाहिए। इनमें लैक्चरर और प्रोफेसर शामिल हैं। इसके अलावा पैरामेडिकल स्टाफ, क्लेरिकल और चतुर्थ श्रेणी स्टाफ भी रहेगा। हालांकि अब डीन की नियुक्ति का इंतजार है। शुरुआत में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के डीन को ही चार्ज दिया गया था। बाद में वापस ले लिया गया। चिकित्सा शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक डीन की नियुक्ति का मामला लंबित है।
दिसंबर में अटक गया था मामला
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में सीएम शिवराज सिंह चौहान मेडिकल कालेज भवन निर्माण के लिए शिलान्यास कर चुके हैं। तब से अब तक तमाम अड़ंगे आ जाने से अभी भी छतरपुर मेडिकल कॉलेज का सपना साकार नहीं हो सका है। अगस्त 2018 में मेडिकल कॉलेज का भूमिपूजन के बाद रुक-रुक कर चल रही निर्माण की कवायद आखरी बार दिसंबर 2022 में ठप हो गई थी। मेडिकल कॉलेज का टेंडर लेने वाली कंपनी जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर ने साइट ऑफिस से पहले अधिकारियों-कर्मचारियों को हटाया, फिर निर्माण सामग्री भी समेट ली।
मंदसौर चली गई थी ठेका कंपनी की टीम
100 सीट वाले छतरपुर मेडिकल कॉलेज के निर्माण की ठेका कंपनी जेपी इंफ्रास्ट्रक्र को 216 करोड़ रुपए की लागत से परिसर निर्माण के लिए कंपनी को फरवरी 2022 में टेंडर मिला था। कंपनी ने वर्कऑर्डर मिलते ही मौके पर कार्यालय खोला, प्लांट लगाया, लेकिन न्यायालय से जमीन विवाद पर ऑर्डर मिलने के कारण कंपनी निर्माण शुरू नहीं कर पाई। लगातार नुकसान के कारण कंपनी ने कार्यालय से अपने अधिकारियों और लेबर को हटा लिया है। इतना ही नहीं कंपनी ने अब मौके से निर्माण समेट ली है। कंपनी ने अपनी टीम मंदसौर पहुंचा दी है।
3 साल तक चला मेडिकल कॉलेज के लिए आंदोलन
छतरपुर समेत आसपास के जिले के लोगों के लिए मेडिकल हब बन चुके छतरपुर में मेडिकल कॉलेज की मांग को लेकर जनता ने दो चरणों में बड़े आंदोलन किए। आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों के नेता, समाजिक कार्यकर्ता, गणमान्य नागरिक, व्यापारी, नौकरी पेशा समेत सभी वर्ग के लोग शामिल हुए। प्रदर्शन किए गए, धरने पर बैठे, मानव श्रंखला बनाई गई, कैंडल मार्च निकाला गया, हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यहां तक कि शहर बंद रखा गया। पहले चरण की तरह ही दूसरे चरण में भी इसी तरह से आंदोलन किया गया। वर्ष 2015 से 2018 तक लगभग सौ से ज्यादा प्रदर्शन आम जनता के द्वारा किए गए थे। जिसके बाद 15 अगस्त 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लाल परेड ग्राउंड भोपाल में छतरपुर मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की। 30 सितंबर को चुनाव के पहले तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने छतरपुर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास भी किया। इसके बाद शिवराज सरकार कैबिनेट ने 4 अक्टूबर 2018 को 300 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति भी दी।
फैक्ट फाइल
पुरानी लागत- 216 करोड़ रुपए
लागत- 247.12 करोड़ रुपए
भवन- 13
कैंपस- 35 एकड़
पहले साल प्रवेश- 100 सीट
टीचिंग स्टाफ- 155
कर्मचारी- 1200
फोटो- सीएचपी०२०६२३-७६-मेडिकल कॉलेज निर्माण स्थल पर पूर्व कंपनी द्वारा तैयार किया गया सेटअप