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छतरपुर

राजस्वकर्मियों ने मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी भूमि निजी लोगों के नाम कर दी दर्ज

गायत्री मंदिर के पास सांतरी तालाब के बंधान का मामला, मछली विभाग की शिकायत भी नजरअंदाज

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छतरपुर. शहर के बस स्टैंड क्षेत्र में गायत्री मंदिर के पास स्थित मछली विभाग की सांतरी तलैया का करोड़ों की कीमत का बंधान राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से निजी दर्ज कर तरमीम भी कर देने से बिकने की कगार पर है। शहर के नागरिकों ने कलक्टर को आवेदन देकर सांतरी तलैया की भूमि पर की गई तरमीम निरस्त कर उसे बिकने से बचाने के लिए गुहार लगाई है।


छतरपुर स्थित आराजी खसरा नंबर 616 का भाग मध्यप्रदेश शासन का तालाब सांतरी तलैया एवं बंधान मत्स्य विभाग के नाम दर्ज है। इस खसरा नंबर से लगे भूमि खसरा नंबर 647/1/1/3, 647/1/1/1, 647/1/1, 647/1/2, 647/1/1/5, 648/1/2, 649/3/2, 650/1/3/2, 499/2/1/1/2 पूर्व में गोस्वामी परिवार के सदस्य किशोर वन गोस्वामी, गंगावन एवं महेश गोस्वामी आदि के नाम दर्ज रहा है। किशोरवन, गंगा वन एवं महेश वन ने अपने जीवन काल में ही प्लाट काट कर पूरी भूमि बेच दी थी तथा खसरे की शेष भूमि रास्ते के रूप में छोड़ दी थी जिससे मौके पर अब कोई भी भूमि शेष नहीं है।

इनके नाम कर दी दर्ज
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने प्रकरण क्रमांक 0383/अ-6 (अ) 2021-22 दिनांक 30/10/2021 से खसरा नंबर 647/ 1/क/2 को 647/1/1/2 में परिवर्तित कर प्रकरण क्रमांक 0765/अ -6 (अ)/2021-22 दिनांक 26/11/2021 से खसरा नम्बर 647/1/1/2/1 में 0.025 हे. भूमि अंजुलता पत्नी बिहारी वन गोस्वामी, उषा पत्नी दिनेश गोस्वामी, वैजन्ती पत्नी अनूप वन, सीमा नेहा पुत्री अनूप वन, नितेश पुत्र अनूप वन गोस्वामी, जगदीश पुत्र किशोर वन गोस्वामी, राजेंद्र पुत्र किशोर वन गोस्वामी एवं अन्य गीता पत्नी गोपाल गिरी गोस्वामी के नाम दर्ज कर दी है। तहसीलदार छतरपुर ने क्रमांक 54/अ-3/23-24 दिनांक 6 अप्रेल 2023 में पारित आदेश दिनांक 30 जून 2023 से संबंधित भूमि की नक्शे में तरमीम भी अंकित कर दी।

शासकीय भूमि को बता दिया निजी
तरमीम अंकित कर राजस्व अमले ने निजी लोगों के हित में शासकीय भूमि खसरा नंबर 616 अर्थात मत्स्य विभाग के तालाब एवं बंधान को खसरा नंबर 647 का भाग बता कर तरमीम को सीमांकित कर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करा दिया है। जबकि वर्तमान में खसरा नंबर 647 में स्थल पर कोई भूमि उपलब्ध नहीं है। फिर भी जगदीश वन गोस्वामी, अंजुलता गोस्वामी एवं अन्य के नाम गलत तरीके से दर्ज कर दी है।

मछली विभाग की सीमांकन की मांग पर कोई एक्शन नहीं
सरकारी भूमि निजी लोगों के नाम चढ़ा दिए जाने की भनक लगने पर सहायक संचालक मत्स्योद्योग ने अपने पत्र क्रमांक/472 /ससंम/एक/2023-24 द्वारा 26 सितंबर को छतरपुर एसडीएम से मत्स्य विभाग छतरपुर की शासकीय भूमि का सीमांकन कराने के लिए आवाज उठाई थी। लेकिन दो महीने बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। सहायक संचालक मत्स्योद्योग के पत्र के अनुसार कार्यालय कलक्टर जिला छतरपुर के आदेश कमांक 20-ए-बी/क्यू-कले./65 दिनांक 15 फरवरी 1965 एवं अपर कलक्टर के मौखिक निर्देश का उल्लेख किया था। पत्र के अनुसार कार्यालय कलक्टर जिला छतरपुर द्वारा मत्स्य विभाग छतरपुर को खसरा नं 616 रकबा 9.01 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। जिसका सीमाकंन कराये जाने हेतु अपर कलेक्टर द्वारा मौखिक निर्देश दिये गये है। पत्र में विभाग को आवंटित शासकीय भूमि का सीमाकंन कराने की मांग की गई थी ताकि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण जैसी स्थिति निर्मित न हो सके।

नगर पालिका ने बनाया था रोड
गायत्री मन्दिर से मछली विभाग तक सांतरी तलैया स्थित है। मछली विभाग के गेट से लगकर तालाब बंधान व आने जाने हेतु नगर पालिका ने सालों पहले सीसी रोड बनाया था। गायत्री मन्दिर और मछली विभाग के बीच काफी खुला मैदान है। जिसमे चीपों का फर्शीकरण भी नगर पालिका ने ही कराया था। यही सांतरी तलैया का बंधान है। बंधान को सुरक्षित रखने नगर पालिका ने पिलर भी खड़े कर दिए थे। बंधान की इसी भूमि को निजी भूमि बताकर जगदीश वन गोस्वामी वगैरह ने राजस्व कर्मचारियों से मिलकर भूमि खसरा नंबर 647/1/1/2/1 रकबा 0.025 हेक्टेयर की पटवारी नक्शा में तरमीम करा ली। जबकि यह भूमि खसरा नंबर 612/2 का अंश भाग है। तरमीम वाली भूमि पर जगदीश वन व सह खातेदारों का कभी कोई कब्जा नही रहा है। जबकि तरमीम कब्जा के आधार पर होती है।

ये हैं एनजीटी के नियम
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों के मुताबिक तालाब के बंधान से 9 मीटर तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है और न ही वहां पर निजी भूमि हो सकती है। किशोर सागर तालाब के मामले में भी एनजीटी ने अनेक नियमों का हवाला देकर उसे बचाने की कोशिश की है।

गौशाला के बहाने हुई थी कब्जे की कोशिश
गायत्री मंदिर और मछली दफ्तर के बीच खाली पड़ी इस बेशकीमती शासकीय भूमि को हथियाने के लिए विगत वर्ष गौशाला खोलने के बहाने कब्जा करने की शुरुआत की गई थी। लेकिन नगर पालिका ने इस बेजा अतिक्रमण को तब हटा दिया था।