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रीना पटेल की बहादुरी पर मिला उत्तम जीवन रक्षक पदक

जलती हुई कार में फंसे लोगों को मौत से मुंह से बचाया था

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Chhatarpur

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मुरसलीम खान
छतरपुर। पुलिस की छवि अमूमन आम जनता की नजरों में अलग ही होती है लेकिन महिला पुलिस कर्मी की साहस और बहादुरी को देख कर लोग सोचने पर मजबूर हो गए कि पुलिस विभाग में ऐसे भी जांबाज कर्मचारी हैं जो अपने जिगर के टुकड़े की जिंदगी दांव पर लगाकर दूसरों की जिंदगी बचा के लिए जलती हुई कार में फंसे लोगों को मौत से मुंह से बचा कर ले आई। ये मंजर था २३ सितंबर २०१६ का। नौगांव में पदस्थ महिला पुलिस कर्मी दोपहर के समय अपने बच्चे को बस में लेकर जा रही थी। तभी रास्ते में एक कार में भीषण आग लगी देख महिला पुलिस कर्मी ने बस को वहीं रुकवाया। जलती कार से लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुन कर अपने जिगर के टुकड़े को बस में छोड़ कर कार सवार बचाने के लिए दौड़ पड़ी। ये पुलिस कर्मी है छतरपुर जिले में पदस्थ रीना पटेल। पुलिस विभाग के लिए मिशाल बनने वाली रीना पटेल को उसकी बहादुरी के लिए भारत सरकार के द्वारा उत्तम जीवन रक्षक पदक प्रदान किया गया। ये पदक देश के सर्वश्रेष्ठ पदकों में से एक है। ये पदक रीना पटेल को भोपाल में प्रदान किया गया।
ये था पूरा मामला
गौरतलब है कि दतिया जिले के पंडोखर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले मंगरौली गांव निवासी श्याम गुर्जर और राघवेंद्र किसी काम से छतरपुर आए थे। लौटते समय दोपहर करीब डेढ़ बजे के बीच रास्ते में कार अचानक धू-धूकर जलने लगी। आग की लपटों से चालक ने नियंत्रण खो दिया। जिससे कार सड़क किनारे खाई में गिर गई थी और उसमें सवार दो युवकों को आग से बचने का प्रयास कर रहे थे। तभी वहां से एक बस गुजर रही थी। अलीपुरा थाने में पदस्थ कांस्टेबल रीना पटेल ने कार को आग से बचलते देखकर बस को रुकवा दिया। यात्रियों की मदद से कांच तोड़कर दोनों कार सवारों को बाहर निकाला और सूचना फायर बिग्रेड बुला ली। इसके बाद दोनों युवकों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
पूरे पुलिस विभाग के लिए गौरव की बात
रीना ने बताया कि २३ सिंतबर २०१६ की घटना का वह मंजर उसे आज भी याद है। एक तरफ बस में उसके साथ उसका मासूम बच्चा था और दूसरी तरफ सड़क किनारे जलती कार में लोग। मैंने अपना फर्ज पूरा करने के लिए अपने बच्चे को बस में ही छोड़कर कार सवार लोगों को बचाना ही कर्तव्य समझा। सरकार ने सम्मान ने नवाजा यह पूरे पुलिस विभाग के लिए गौरव की बात है। ये सम्मान पाकर में भी अपने आप को गौरवरांवित महसूस कर रही हूं।