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बिना परमिट और फिटनेस के चल रहे दर्जनों वाहन, ये है इसकी वजह

खटारा बसों के खिलाफ नहीं हो रही कार्रवाई

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Running vehicles without permits and fitness

Running vehicles without permits and fitness

छतरपुर। शहर सहित पूरे जिले में इन दिनों बिना परमिट और बिना फिटनिस के वाहनों की रफ्तार जोरों पर है। जिन्हें रोकने की ना तो जुर्रत अधिकारियों द्वारा समझी जा रही है7 और न ही इन पर कोई कार्रवाई की जा रही है। यह वाहनों से शासन के राजस्व को चूना लगाया जा रहा है। वहीं विभाग अधिकरियों और कर्मचारियों द्वारा मिली भगत के चलते कई वाहनों को अनफिट होने पर भी फिटनेस दी जा रही है। जिससे सैकडों की संख्या में जर्जर वाहन सड़कों में फर्राटा भर रहे है और सवारियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वहीं बिना आरटीओ की परमिट के जिले की ट्रैवल्स एजेंसियों से जुड़ी लग्जरी गाडिय़ां विभाग को करोड़ों का चूना लगा रही है। जिले के 90 फीसदी वाहन मालिक प्राइवेट रजिस्ट्रेशन कराकर वाहनों का कामर्शियल इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें से काफी संख्या में वाहन सरकारी विभागों में भी लगे हैं।
जिले में छोटी कार और जीप, बोलेरो, मार्शल, टाटा सूमो, इनोवा, क्वालिस, स्कार्पियो आदि लक्जरी गाडिय़ां पंजीकृत है। इनमे से केवल कुछ ही वाहनों के टैक्सी परमिट विभाग से जारी हैं। इनके अलावा वाहन बिना टैक्सी परमिट के ही धड़ल्ले से व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें सरकारी विभाग भी पीछे नहीं हैं। जिले के कृषि विभाग, बिजली विभाग, सिंचाई विभाग, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग आदि कई विभागों में लोगों ने प्राइवेट वाहनों को किराए पर लगा रखे हैं। परिवहन विभाग द्वारसा बताया गया कि टैक्सी परमिट के लिए प्रति सीट 660 रुपए प्रति तिमाही का राजस्व जमा कराया जाता है और एसी गाडिय़ों में प्रति सीट 990 रुपए जमा होता है। इसके चलते विभाग को हर वर्ष लाखों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। इसकी जानकारी होने के बाद भी विभाग के अधिकारी मौन है।

कोड्स
राजस्व को पूना लगाने में वाहन मालिकों के साथ साथ वाहनों में जाने वाल सवारियों द्वारा उनका भरपूर सहयोग किया जा रहा है। जब चेकिंग के दौरान वाहन पकड़े जाते हैं या चैकिग की जाती है तो सवारियां ही कह देती हैं कि हम घर के हैं। जिससे अधिकांस वाहनों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वहीं कुछ वाहनों पर विभाग और पुलिस को जानकारी होने के बाद भी कार्रवाई करने से परहेज किया जा रहा है इसी के चलते कई वाहन मालिकों और ट्रैवल्स एजेंसी संचालकों द्वारा खुलेआम प्राईवेट वाहनों का कमर्शियल उपयोग किया जा रहा है।

टैक्सी परमिट होना अनिवार्य
नियमों की माने तो स्टैंड पर वाहन खड़े करने वाले संचालकों के पास टैक्सी परमिट होना अनिवार्य हैं। तभी निजी या फि र रुट पर वाहनों को चलाया जा सकता हैं। लेकिन वर्तमान में सैकडों वाहन संचालकों के पास टैक्सी परमिट भी मौजूद नहीं है। बिना टैक्स जमा किए वाहन संचालक ना केवल रुट और निजी तौर पर मनमानी फ ीस यात्रियों से वसूली जा रही हैं। वहीं स्टैंड पर वाहनों को बेतरतीब खड़ाकर अव्यवस्थाओं को और बढ़ा रहे हैं। हालांकि ऐसे वाहनों पर समय समय पर कार्रवाई की जाती है। लेकिन नाम मात्र की।

खटारा बसों के खिलाफ नहीं हो रही कार्रवाई
सड़कों पर दर्जनों की संख्या में सड़कों में दौड़ती खटारा बसों की जानकारी होने के बाद भी न तो पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है और न ही परिवाहन विभाग द्वारा कोई कार्रवाई की जा रही है। जिससे जिले के शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर और खटारा बसों और वाहनों में भूसा की तरह सवारियों भरकर फर्राटा भर रहे हैं। जिससे किसी भी समय बडा हादसा होने की आसंका बनी रहती है।
इनका कहना है
मैं इसकी जानकारी करवाता हूं जहां पर भी ऐसे वाहनों मिलेंगे कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अभियान चलाकर भी कार्रवाई की जाएगी। जिससे इस तरह के वाहनों में लगाम लग सकेगी।