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सतना में पकड़े गए सट्टा किंग ने छतरपुर में बनाई संपत्ति, नेटवर्क की पुलिस ने नहीं की जांच

शहर के पॉश इलाके में 22 फ्लैट का पांच मंजिला मकान, ऑडी-मर्सडीज जैसी गाडिय़ांमध्यप्रदेश के टॉप सटोरियों में शामिल राहुल शुक्ला की अकूत संपत्ति की नहीं कर रहे जांच

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शहर के पॉश इलाके में 22 फ्लैट का पांच मंजिला मकान, ऑडी-मर्सडीज जैसी गाडिय़ां

शहर के पॉश इलाके में 22 फ्लैट का पांच मंजिला मकान, ऑडी-मर्सडीज जैसी गाडिय़ां

छतरपुर। एक सप्ताह पहले सतना पुलिस ने प्रदेश के अव्वल सट्टा माफियाओं में शुमार छतरपुर निवासी राहुल शुक्ला और उसके 4 साथियों को गिरफ्तार करने में सफलता अर्जित की। पकड़े गए पांच आरोपियों में से तीन छतरपुर और दो पन्ना के हैं, जिन्हें सतना पुलिस ने ऑनलाइन सट्टा खिलाने के अपराध में जेल भेजा है। इस गिरोह के सरगना राहुल शुक्ला का ताल्लुक छतरपुर से है जिसकी सट्टा से कमाई गई करोड़ों रूपए की संपत्ति छतरपुर में मौजूद है। सतना पुलिस अब भी इस मामले की तहकीकात कर रही है लेकिन छतरपुर में चल रहे गुंडा अभियान के दायरे में राहुल शुक्ला क्यों नहीं आ रहा इस पर सवाल उठ रहे हैं। राहुल शुक्ला की एक बड़ी संपत्ति शहर के सनसिटी कॉलोनी के पास मौजूद है जिसके अवैध निर्माण से जुड़ी एक शिकायत भी सामने आई है। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

5 मंजिला आलीशान इमारत, जिसमें 22 फ्लैट, नीचे दुकानें
छतरपुर के पॉश इलाके सनसिटी के समीप सट्टा किंग राहुल शुक्ला की एक पांच मंजिला इमारत मौजूद है। इस इमारत के निर्माण की मंजूरी वर्ष 2017-18 में ली गई थी तब इसे चार मंजिलों तक बनाने की बात कही गई थी। मंजूरी के विरूद्ध इसे पांच मंजिल के रूप में तब्दील किया गया और आज इस पांच मंजिला इमारत में नीचे के तरफ दुकानें व ऊपर 22 फ्लैट मौजूद हैं जिसमें किराएदार रहते हैं। निर्माण के तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बनाई गई इसी इमारत के पांचवें फ्लोर पर सट्टा का कारोबार चलता था। सूत्र बताते हैं कि इसी बिल्डिंग के ऊपर हिस्से से मप्र के कई जिलों में ऑनलाइन सट्टा खिलाता जा रहा है। पिछले दिनों जब राहुल शुक्ला अपने छतरपुर निवासी साथी रोहित शर्मा, सुरेन्द्र सिंह पुत्र महेन्द्र व पन्ना निवासी हिमांशु जैन पुत्र विनय जैन, कामेश गुप्ता पुत्र राजेश गुप्ता के साथ गिरफ्तार हुआ था तब इन लोगों के पास से भी तीन लाख रूपए की नगदी सहित लगभग 45 लाख रूपए की सामग्री मिली थी। रोहित शर्मा पुलिस हाउसिंग का बड़ा ठेकेदार है। वहीं सुरेन्द्र सिंह एक टेक्नो कंपनी का प्रोजेक्टर मैनेजर है। सनसिटी में मौजूद राहुल शुक्ला के घर पर ऑडी और मर्सडीज जैसी महंगी कारें खड़ी रहती हैं। इस इमारत का निर्माण भव्य कराया गया है। इस संपत्ति के अलावा भी राहुल शुक्ला ने अकूत दौलत से प्रदेश भर में संपत्ति खड़ी की है। सन सिटी में दो महंगे प्लाट भी हैं।

ऐप व कोड के सहारे चलता है ऑनलाइन सट्टा
क्रिकेट लाइव लाइन, क्रिकेट गुरुज, ऑल द न्यूज, दि मेमोरीज एशियन समेत अन्य कई ऐप के जरिए सट्टा लगाया जाता है। सभी एक साथ आईडी के जरिए जुड़ते है। स्कोर देखते और हर एक मूवमेंट पर सट्टा लगाते थे। स्कोर से लेकर कितने ओवर में कितने रन और विकेट होंगे, तय ओवर में कितने रन बनेंगे या उतने रन नहीं बनेंगे, इन सभी पर सट्टा लगाते थे। अगर एक सटोरिया कम रन बनने का दावा करता तो वो नॉट बोलता या लिखता था। जो तय रन बनने का दावा करता वो यस बोलता। ये इनके कोडवर्ड थे।


ऑनलाइन सट्टे के ये सॉफ्टवेयर बाजार में आसानी से उपलब्ध हो रहे..
डायमंड, लोटर, जी एक्सचेंज, 777 एक्सचेंज, प्रविड एक्स, सेबेक्स, मैच बॉक्स 9, बेड एक्सचेंज, लोटस और आईओ जैसे हजारों साइट्स हैजो सट्टे के लिए सॉफ्टवेयर के तौर पर उपयोग किए जाते हैं। यहीं नहीं हजारों मोबाइल एप्लीकेशन ऐसे है,जिनमें आईपीएल के मैच की एक-एक बॉल से लेकर तीन पत्ती का दाव लगाया जाता है। आईपीएल क्रिकेट, देश विदेश में होने वाले फुटबाल, टेनिस व अन्य खेलों मेंं भी सट्टा लगाया जाता है और पैसा ऑनलाइन अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता हैं।

मोबाइल पर मिलता है अपडेट
ऐसे सट्टे की साइट में लोगों को यह फायदा है कि मोबाइल पर अपडेट देखा जा सकता हैं। जीतने हारने पर पैसा सीधे वॉलेट से काटा और जमा किया जाता है। यह सब हाईटेक सॉफ्टेवयर का कमाल है। छोटे बड़े सभी सटोरिए इसी का फायदा उठाकर पुलिस को चकमा देते हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ मामूली धाराएं लगाई जाती है। लिखापढ़ी के बाद थाने से मुचलके पर छोड़ दिया जाता है। जिसके कारण भी सटोरियों के हौसले बुलंद रहते हैं।

बनाए जाने वाली आईडी के बारे में भी जानिए
एप्लीकेशन पर लॉग इन करने के लिए एक यूनिक नाम या नंबर के साथ पासवर्ड मिलता है। इस यूनिक आईडेंटिटी और पासवर्ड के जरिए ही ग्राहक मोबाइल ऐप पर इंट्री कर सकता है। ऐप मोबाइल और कम्प्यूटर पर चलाने की सुविधा रहती हैं। ग्राहक के पसंद के मुताबिक उसके पास नोटिफिकेशन भी मिलता रहता है। सरल भाषा में समझे तो हाईटेक सट्टा खेलने के लिए एप्लीकेशन पर इंट्री के लिए लॉगइन पासवर्ड को आईडी कहा जाता हैं। जिसके माध्यम से लोग ऑनलाइन सट्टे के खेल में शामिल होते हैं।

छतरपुर के नेटवर्क पर नहीं है पुलिस की नजर
राहुल शुक्ला और उसका गिरोह भले ही सतना में पकड़ा गया हो लेकिन उसके ऑनलाइन सट्टा कारोबार में ज्यादातर लोग छतरपुर और पन्ना जिले से ताल्लुक रखते थे। सट्टा खेलने वाले और खिलाने वाले अधिकांश लोग छतरपुर जिले के निवासी हैं। छतरपुर के ही कई नामी-गिरामी सट्टा माफिया राहुल शुक्ला के नेटवर्क में काम करते हुए करोड़ों रूपए कमा रहे थे। सतना में गिरफ्तारी के बाद सतना पुलिस छतरपुर के इस नेटवर्क को खोजने के लिए एक बार आ चुकी है लेकिन स्थानीय नेटवर्क के चौकन्ना होने के कारण उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। चौंकाने वाली बात ये है कि छतरपुर के मूल निवासी और यहां रहकर पूरे प्रदेश में सट्टा खिलाने वाले व अकूत संपत्ति इकट्ठी करने वाले राहुल शुक्ला पर छतरपुर पुलिस व प्रशासन की नजर नहीं है।