1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बकस्वाहा के जंगल बचाने किया उपवास सत्याग्रह, बुंदेलों ने खून से लिखा खत

गांधी आश्रम छतरपुर में उपवास के बाद प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, जंगल बचाने की अपीलबुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने खून से लिखा पत्र

2 min read
Google source verification
पैदल मार्च निकालकर सौंपा ज्ञापन

पैदल मार्च निकालकर सौंपा ज्ञापन

छतरपुर। बकस्वाहा के जंगल बचाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस पर सामजिक कार्यकर्ताओं व देशभर के युवाओं ने अलग-अलग तरीके से विरोध जताया। समाजिक कार्यकर्ताओं ने छतरपुर के गांधी आश्रम में उपवास सत्याग्रह कर जंगल बचाने के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। वहीं महोबा में पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर 635 दिन तक अनशन कर चुके बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखकर जंगल बचाने की मांग की। इसके साथ ही देशभर के पर्यावरण प्रेमियों ने हैश टैग इंडिया विथ बकस्वाहा फॉरेस्ट ट्वीट कर विरोध जताया। शनिवार को ट्वीटर के टॉप 25 में हैश टैग इंडिया विथ बकस्वाहा फॉरेस्ट ट्रेड करता रहा।

पैदल मार्च निकालकर सौंपा ज्ञापन
बकस्वाहा के जंगलों को काटने से बचाने के लिए छतरपुर के विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने जिम्मेदारी संभाली है। इसके लिए वे सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी पर्यावरण को बचाने की मुहिम चला रहे हैं। इसके साथ ही आपस में संवाद और संगोष्ठी का आयोजन कर पर्यावरण जैसे संवेदनशील मुद्दे की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं युवाओं के साथ गांधी विचार के लोग गांधी आश्रम में भी सुबह 9 बजे से उपवास सत्याग्रह पर बैठे। पर्यावरणविद डॉ. भारतेंदु प्रकाश, दुर्गा प्रसाद आर्य अध्यक्ष गांधी स्मारक निधि, सीके शर्मा प्राचार्य महर्षि स्कूल, डॉ. दिनेश मिश्रा, डॉ. आरसी विद्यार्थी, दमयंती पाणी सिम्ता जैन, शोभा जैन, बरुण पांचाल, देवेन्द्र भंडारी, सदफ, अंकित मिश्रा समेत अन्य समाजिक कार्यकर्ता पैदल मार्च निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंच कर ज्ञापन के माध्यम से राज्य सरकार से जंगल बचाने की अपील की। लोगों का कहना है कि इस कारोना काल ने हमें पेड़ों की उपयोगिता पुन: बतलाई है जिसे हम भूल गए थे अत: हमें इन पेड़ों को काटने से जरूर रोकना चाहिए।

बकस्वाहा के जंगल बचाने महोबा में चली मुहिम
हीरा नहीं हरियाली चाहिए, बुंदेलखंड की खुशहाली चाहिए, जय जय बुंदेलखंड के उदघोष के बीच महोबा में शनिवार को बुंदेली समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने लहू से खत लिखे एवं आक्सीजन के भीषण संकट काल को देखते हुए हीरा खनन के लिए बुंदेलखंड के बक्सवाहा जंगल की बलि न देने की गुहार लगाई। पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपने साथियों के साथ रिकार्ड 16 बार अपने खून से खत लिख चुके बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने आल्हा चौक के अंबेडकर पार्क में हर बार की तरह वहीं अपना खून निकलवाया फिर पीपल के वृक्ष के नीचे 17वीं बार प्रधानमंत्री को खत लिखा और कहा कि एक तरफ सरकार आक्सीजन प्लांट लगवा रही है और वहीं दूसरी तरफ चंद हीरों के लिए बुंदेलखंड के हजारों साल पुराने बकस्वाहा जंगल जैसे प्राकृतिक आक्सीजन प्लांट खत्म करवा रही है। डॉ. अजय बरसैया ने बताया कि महोबा के अलावा हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर व चित्रकूट आदि जिलों में भी पर्यावरण प्रेमी अपने खून से खत लिख रहे हैं। साहित्यकार संतोष पटैरिया ने कहा कि वृक्ष ही हमारे असली हीरा हैं। बुंदेलखंड और दोहन हमें बर्दाश्त नहीं। इस मौके पर प्रवीण चौरसिया, हरिओम निषाद, ग्यासी लाल, मुन्ना जैन, देवेन्द्र तिवारी, सुरेश बुंदेलखंडी, सुरेन्द्र शुक्ला, रमाकांत नगायच, प्रहलाद पुरवार, अवधेश गुप्ता समेत तमाम लोगों ने भी खत लिखने के लिए अपना खून दिया।