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नंदा कानन एनक्लेव की सात एकड़ जमीन हुई सरकारी, खसरे में दर्ज हुआ मप्र शासन

अपर आयुक्त सागर ने अपील पर सुनाया था फैसला, अब रिकॉर्ड में भी सरकारी हुई जमीनफलदार पेड़ पौधे लगाए जाने का हवाला देकर कॉलोनाइजर हड़पना चाहता था जमीन

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अब रिकॉर्ड में भी सरकारी हुई जमीन

अब रिकॉर्ड में भी सरकारी हुई जमीन

छतरपुर। शहर के पन्ना रोड पर बसाई गई कॉलोनी नंदा कानन एनक्लेव की सात एकड़ जमीन सरकारी कर दी गई है। अपर आयुक्त सागर ने अपील पर सुनवाई के बाद जमीन को सरकारी मानते हुए मध्यप्रदेश शासन दर्ज करने के आदेश दिए थे। जिस पर राजस्व छतरपुर पटवारी हल्का के खसरा क्रमांक 3671 की 2.877 हेक्टेयर यानि 7 एकड़ जमीन मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज की गई है।

फलदार वृक्ष लगाकर कब्जा के आधार पर मांगा था पट्टा
बिट्रिश शासन के समय वर्ष 1939-40 में छतरपुर में बंदोबस्त किया गया था। उस समय वर्तमान खसरा क्रमांक 3671 चरोखर व कदीम नाम से सरकारी जमीन के रुप में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। इस जमीन के पट्टे के लिए कॉलोनाइजर राजेश कुमार गंगेले ने वर्ष 2017 में तहसीलदार के न्यायालय में जमीन का पट्टा लेने के लिए आवेदन किया। जिसमें उल्लेख किया गया कि इस भूमि पर आम के 80, आवलां के 25-30 वृक्ष, जामुन के 3-4 फलदार वृक्ष लगाकर 25 वर्षो से काबिज हैं। तहसीलदार ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के तहत आवेदन को सही नहीं मानते हुए निरस्त कर दिया। उसके बाद कॉलोनाइजर ने वर्ष 2018 में एसडीएम न्यायालय में अपील की, जिसे एसडीएम ने भी खारिज कर दिया।

अपर आयुक्त के आदेश पर सरकारी हुई जमीन
तहसील और एसडीएम न्यायालय से केस खारिज होने के बाद कॉलोनाइजर ने अपर आयुक्त न्यायालय सागर में अपील की। अपर आयुक्त ने जमीन का रिकॉर्ड देखा और कॉलोनाइजर के इस दावे को सही नहीं माना कि वहां कोई फलदार वृक्ष लगाए गए हैं। कॉलोनाइजर जिन फलदार वृक्षों के आधार पर जमीन का पट्टा पाना चाहते थे, उन वृक्षों के लगाए जाने के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए, जिसके बाद अपर आयुक्त सागर संभाग ने उनकी अपील को खारिज कर जमीन को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने के आदेश दिए।

महाराजा भवानी सिंह के नाम का दुरुपयोग पर निजी बनाई गई थी सरकारी जमीन
बिट्रिश शासन के समय राजस्व रिकॉर्ड में चरोखर व कदीम श्रेणी में दर्ज रही पन्ना रोड स्थित गाड़ीखाना खास्त की सरकारी जमीन को छतरपुर महाराजा स्व. भवानी सिंह जू देव से दान के रुप में प्राप्त होने का हवाला देकर राजस्व रिकॉर्ड में निजी लोगों के नाम दर्ज कर दिया गया। जबकि खुद महाराजा छतरपुर तहसीलदार छतरपुर के नोटिस के जवाब में लिखित में दे चुके हैं कि उन्होंने इस जमीन को न बेचा, न दान दिया और न ही किसी को इसके लिए अधिकृत किया। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में गाड़ीखाना खास्त के नाम से विख्यात रही इस जमीन पर निजी लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। अब इसी जमीन पर ड्यूप्लेक्स बंगलों की सीरीज खड़ी की गई है। जिसमें सबसे ज्यादा सरकारी अधिकारियों ने ही बंगले खरीदे हैं।