21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

… तो ऐसा लगा मानो पाषाण प्रतिमाएं नृत्यांगनाओं की प्रतीक्षा में हों

कथक में लखनऊ, जयपुर, बनारस घराने की प्रस्तुतियां, ओडिसी-कुचिपुड़ी में शास्त्रीय संगीत

4 min read
Google source verification
Stone statues, dances, tours, Khajuraho, dance ceremonies

Stone statues, dances, tours, Khajuraho, dance ceremonies

छतरपुर/ खजुराहो. पर्यटन नगरी खजुराहो के नृत्य समारोह की पांचवीं शाम भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां शुरू हुईं तो ऐसा लगा मानो पाषाण प्रतिमाएं इन नृत्यांगनाओं की प्रतीक्षा में हों। रात की रोशनी में जब ताल के साथ कदम थिरके तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
जैसे-जैसे कलाकारों के कदम उठ रहे थे और जमीन पर पड़ रहे थे दर्शकों की निगाहें पूरी तरह कलाकारों की भाव भंगिमाओं पर टिक गईं। सुर, लय और ताल के साथ शास्त्रीय संगीत का अनूठा संगम दिखा। कथक में जहां लखनऊ, जयपुर व बनारस घराने की शैलियों पर आधारित नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं तो वहीं ओडिसी से उड़ीसा की संस्कृति झलकी। कुचिपुड़ी की प्रस्तुति से आयोजन स्थल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।
ऋचा जैन नई दिल्ली ने कथक नृत्य की प्रस्तुति देते हुए कथा वाचन परंपरा के तहत गीत गाकर नरसिंह अवतार की कथा का वर्णन किया। इसके बाद कथक की प्रस्तुति में ही लखनऊ, जयपुर एवं जानकी प्रसाद बनारस घराने की शैलियों की प्रस्तुतियां दी। इनके नृत्य में तीन ताल, रागदरवारी का समावेश रहा। ऋष जैन ने अपनी लोकप्रियता का श्रेय अपनी मां नालिनी मल्होत्रा जैन व पिता को दिया। एक घंटे की प्रस्तति में उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। वहीं डॉ. वीणा विजय मूर्ति बैंगलोर ने कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति का आगाज किया। जिसमें भगवान शिव के विराट रूप को इन्होंने नृत्य द्वारा दिखाने का प्रयास किया। यह तांडव नृत्य इन्होंने अपने 5 शिष्यों के साथ प्रस्तुत किया है।


इसके बाद उन्होंने रामायण को कुचिपुड़ी शैली प्रस्तुत किया। जिसमें रामायण का सारा कथासार नृत्य के रूप में दिखाया गया है। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध नृत्य शैली तरंगम की प्रस्तुति दी। यह बहुत ही प्रसिद्ध नृत्य है। जो कुचिपुड़ी शैली में प्रस्तुत किया। इस नृत्य में भगवान कृष्ण की संपूर्ण लीलाओं का वर्णन नृत्य के द्वारा किया गया है। ओडिसी नृत्यांगना कादम्बरी शिवाय ने मुक्ताकशी मंच पर ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया।
ओडिसी नृत्यांगना कादम्बरी शिवाय को मंच से जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव, कलेक्टर रमेश भंडारी व उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत एवं कला अकादमी मप्र सांस्कृतिक परिषद के निदेशक पीके झा ने सम्मानित किया। आयुषी दीक्षित इंदौर ने कथक की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोहा। उन्होंने पहली प्रस्तुति में शिव वंदना की। जो भगवान शिव को समर्पित रही। जिसमें शिव के अर्धनारीश्वर रूप का वर्णन किया गया।
इसके अलावा आयुषी दक्षित ने अन्य प्रस्तुतियां भी दीं। जिसमें पारंपरिक रूप से किए जाने वाले थाट, आमद, तोड़े, टुकड़े, परन, कवित को मिला प्रस्तुत किया गया। आयुषी ने अपने गुरु पं. सुरेश तवलकर के द्वारा सोचे हुए ताल पंचम सवारी की प्रस्तुति दी। यह एक अप्रचिलित ताल है। जिसे कथक की दृष्टि से उन्होंने अपने गुरु जी के विचारों को नृत्य द्वारा प्रस्तुत किया। इसके बाद राग भैरवी पर आधरित प्रस्तुति दी गई। जिसमें नायिका नृत्य द्वारा अपनी आपबीती को दिखाने का प्रयास करती है।
चर्चित तीन घरानों का हुआ संगम
ऋचा जैन की कथक नृत्य प्रस्तुतियां लखनऊ, जयपुरा एवं बनारस घराना की नृत्य शैलियों का संगम हैं। उत्कृष्ट कथक नृत्यांगना ऋचा जैन ने महज तीन वर्ष की आयु में प्रारंभिक शिक्षा पिता रवि जैन एवं गुरु नालिनी मल्होत्रा जैन और जयपुर घराना के पं. कुंदन लाल गंगानी के मार्गदर्शन में प्राप्त किया। उन्होंने शास्त्रीय गायन का प्रशिक्षण अजीत कुमार मिश्रा एवं ग्वालियर घराना के सुप्रसिद्ध गुरु पं. महेश्वर राव से प्राप्त किया। दूरदर्शन की ए ग्रेड की कलाकार एवं आईसीसीआर की पैनल कलाकार ऋषा शर्मा कथक की कथा वाचन परंपरा को फिर से स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। कथा नृत्य में स्नातकोत्तर ऋचा जैन को श्रंगार मणि एवं अन्य दूसरे सम्मानों से विभूषित किया गया है।
डॉ. वीणामूर्ति ने तिब्बेत्यिन स्त्रोत का प्रयोग किया
डॉ. वीणामूर्ति विजय कुचिपुड़ी नृत्य शैली की एक अत्यंत्र विशिष्ठ एवं प्रतिभावान कलाकार हैं। कुचिपुड़ी नृत्य प्रदर्शनों में अलग-अलग प्रयोग उनके कुचिपुड़ी नृत्य में बहुग्राही अधिकार प्रस्तुत करते हैं। ३० वर्ष की लंबी यात्रा में डॉ. वीणा मूर्ति विजय ने देश-विदेश के प्रसिद्ध मंचों पर कुचिपुड़ी नृत्य की छटा बिखेरी है। कर्नाटक कलाश्री सम्मान एवं अन्य सम्मानों से सुसज्जित डॉ. वीणा श्री राजा राजेश्वरी कला निकेतन की निदेशक हैं। वह एक अकेली कलाकार हैं जिन्होंने पारंपरिक तिब्बेत्यिन स्त्रोत का प्रयोग भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली में किया है।
युवा कला रत्न पुरस्कार प्राप्त हैं आयुषी दीक्षित
आयुषी दीक्षित की प्रारंभिक नृत्य शिक्षा गुरु डॉ. रागिनी मख्खर एवं गुरु हेमंत मख्खर के मार्गदर्शन में आरंभ हुई। वह उच्च शिक्षा के लिए विश्व के शीर्षस्थ गुरु तालयोगी पद्मश्री पं. सुरेश तलवलकर के सानिध्य में दस सालों से अध्ययनरत हैं। आयुषी ने विभिन्न कार्यशालाओं के माध्यम से गुरु शमा भाटे से नृत्य की शिक्षा ली। काकातीय विवि के युवा कला रत्न पुरस्कार एवं अन्य पुरस्कार से सम्मानित आयुषी ने नृत्य गुरु डॉ. सुचित्रा हरमलकर से गतभाव की विशेष शिक्षा प्राप्त की है। वह समय-समय पर पं. श्रीधर व्यास के सानिध्य में दीक्षा प्राप्त करती हैं।
भारतीय कला शैलियों के कई स्टॉल सजे

खजुराहो ञ्च पत्रिका. विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में इन दिनों खजुराहो नृत्य समारोह का आयोजन चल रहा है।
इस नृत्य समारोह में जहां भारतीय विविध शैलियों में नृत्य उत्सव आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं, वहीं नृत्य समारोह के पहले बने हुए विशाल क्षेत्र में कानूनी जानकारी औऱ सहायतार्थ विधिक सहायता केंद्र, बच्चों की सहायतार्थ चाइल्ड हेल्प लाइन स्टॉल, प्रसिद्ध कश्मीरी शॉल, विभिन्न बीजों के लिए नवधान्य जैविक जानकारी केंद्र, विजुयल आर्ट एग्जिविसन आर्ट मार्ट इसके अलावा विभिन्न कलाओं से परिपूर्ण हांथों से बनी हुई कला प्रदर्शनी और क्राफ्ट, बाजार में विक्रय के लिए रखी हुई हैं। वही खानपान के लिए विशेष तौर पर बुंदेली व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं। वगीं विभिन्न सामाजिक संगठन आने वाले देशी व विदेशी पर्यटकों के लिए यह सभी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। निश्चित तौर पर खजुराहो नृत्य समारोह को विभिन्न कलाओं से अलंकृत कर इस आयोजन को विगत कुछ वर्षों से आकर्षित बना दिया गया है। इस आयोजन में जहाँ हम और विदेशी व्यक्ति अपनी भारतीय संस्कृति व नृत्य शैलियों से परिचित होते हैं वही साथ साथ आने वाले देशी व विदेशी पर्यटक हमारी संस्कृति ए क्राफ्ट व देसी खानपान का भी लुफ्त उठाकर आनन्दित हो रहे हैं। यह आने वाले पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण है और बुंदेलखंड में विलोपित हो रहे कुछ ऐसे व्यंजन का भी पुनुरुद्धार है क्योंकि इन व्यंजनों की जानकारी इन स्टॉलों के माध्यम से वर्तमान जनता और विदेशियों को हो रही है।