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पार्वती-शिव विवाह प्रसंग के साथ कथा प्रारंभ

नौ दिवसीय राम कथा का आयोजन

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Story begins with Parvati-Shiva marriage episode

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छतरपुर. वैष्णो माता मंदिर छत्रसाल नगर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास पंडित संदीप शास्त्री महाराज ने कथा के दौरान अमृत वचनों की वर्षा की और पार्वती विवाह एवं शिव चरित्र का वर्णन किया। कथावाचक पंडित संदीप शास्त्री महाराज ने जीवन में राम नाम स्मरण का महत्व समझाते हुए शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि जीवन रूपी नैया को पार करने के लिए राम नाम ही एक मात्र सहारा है। वर्तमान दौर में ऐसा कोई मनुष्य नहीं है जो दुखी न हो। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं होता है, कि हम भगवान का स्मरण करना ही छोड़ दें। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। राम नाम का स्मरण करने मात्र से हर एक विषम परिस्थिति को पार किया जा सकता है। लेकिन, अमूमन सुख हो या दुख हम भगवान को भूल जाते हैं। दुखों के लिए उन्हें दोष देना उचित नहीं है। हाथ की रेखा देखकर बोला वो नारद जोगी मतवाला, जिससे तेरा ब्याह रचेगा वो होगा डमरु वाला, भजन के साथ शिव पार्वती विवाह प्रसंग पर प्रकाश डाला।
कथा के दौरान भजनों पर झूमे भक्त
महाराज का कहना था कि नारद मुनि भगवान शिव एवं पार्वती विवाह का रिश्ता लेकर आए थे। उनकी माता इसके खिलाफ थी, उनका मानना था कि शिव का कोई ठौर- ठिकाना नहीं है। ऐसे पति के साथ पार्वती का रिश्ता निभाना संभव नही है। उन्होंने इसका विरोध भी किया। लेकिन, माता पार्वती का कहना था कि वे भगवान शिव को पति के रुप में स्वीकार कर चुकी है तथा उनके साथ ही जीवन जीना चाहेंगी। इसके बाद दोनों का विवाह हो सका। कथा में गाए गए मधुर भजनों पर श्रोतागण भाव विभोर होकर नाच उठे।