
बेसमेंट में कोचिंग
शहर में अफसर बनने का सपना लेकर पढ़ रहे हजारों छात्र-छात्राओं की जान इस समय भगवान भरोसे है। शहर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा के मापदंडों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि कहीं कोचिंग सेंटर अंधेरे बेसमेंट में चल रहे हैं, तो कहीं तंग गलियों की दूसरी-तीसरी मंजिल पर। न तो यहां आग से निपटने के लिए अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) हैं और न ही किसी आपदा के समय सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कोई आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एक्जिट) है। हाल ही में लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब छतरपुर में भी सुरक्षा को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
आजकल के अभिभावक बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए कड़ी मेहनत कर उन्हें बड़े संस्थानों में भेजते हैं, लेकिन शहर में कोचिंग संचालन के लिए ठोस मापदंडों का पालन नहीं हो रहा है। शहर के प्रमुख क्षेत्रों जैसे चौबे कॉलोनी, विश्वविद्यालय के आसपास , सीताराम कॉलोनी, छत्रसाल नगर, आकाशवाणी तिराहा, पन्ना रोड, सौरा रोड, विश्वनाथ कॉलोनी एवं सागर रोड पर ऐसे सैकड़ों कोचिंग सेंटर हैं, जहां हजारों छात्र प्रतिदिन पढ़ने आते हैं, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।कोचिंग के नाम पर छात्रों से मोटी रकम वसूली जा रही है, लेकिन इसके बदले उन्हें असुरक्षित वातावरण मिल रहा है। न तो यहां पार्किंग की उचित व्यवस्था है, जिससे अक्सर मुख्य रास्तों पर जाम की स्थिति बनी रहती है, और न ही भवनों की संरचना छात्रों के अनुकूल है। कई कोचिंग संस्थानों के पास फायर एनओसी तक नहीं है और वे संकरी सीढ़ियों और गलियों में संचालित हो रहे हैं।
नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें तय हैं, जिनका पालन छतरपुर के अधिकांश केंद्रों में नहीं हो रहा है।भवन का क्षेत्रफल: कोचिंग संस्थान का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्ग मीटर होना चाहिए और बाहर का मार्ग न्यूनतम 40 फीट चौड़ा होना अनिवार्य है।निकास की व्यवस्था: प्रत्येक तल पर प्रवेश और निकास के लिए दो अलग-अलग सीढ़ियां होनी चाहिए।अग्निशमन प्रावधान: भवनों में फायर सेफ्टी के समस्त उपकरण और आपातकालीन योजना अनिवार्य है।अन्य सुविधाएं: छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय और वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल का होना जरूरी है।
हकीकत की पड़ताल में सामने आया कि अधिकांश बड़े संस्थानों में भी फायर सेफ्टी का नामो-निशान नहीं है। पूरे शहर में इक्का-दुक्का सेंटरों ने एक-एक सिलेंडर रखकर महज खानापूर्ति की है। वर्ष 2024 में दिल्ली में बेसमेंट में संचालित कोचिंग में पानी भरने की दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी जिलों में बेसमेंट में संचालित कोचिंग सेंटरों की जांच के सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन छतरपुर में न जांच हुई न कार्रवाई।
शहर में करीब आधा सैकड़ा कोचिंग सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियां बेसमेंट में संचालित की जा रही हैं। पिछले वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो यहां की स्थिति बेहद गंभीर रही है:
एमसीबीयू : विश्वविद्यालय का कला केंद्र बेसमेंट में था, जहां पिछले साल जलभराव से भारी नुकसान हुआ।
बैंक और अस्पताल: एसबीआई की मेन ब्रांच और पेंशन शाखा भी बेसमेंट में संचालित थी, जहां दो साल पहले पानी भरने से करोड़ों के नोट गीले हो गए थे। इसी तरह जवाहर रोड पर कई व्यावसायिक संस्थान और निजी अस्पताल की इमरजेंसी भी बेसमेंट में है, जहां सुरक्षा इंतजाम शून्य हैं।
कोचिंग सेंटर- सटई रोड व विश्वविद्यालय के आसपास कई कोचिंग सेंटर बेसमेंट में संचालित हैं, जिनमें पानी भरने का खतरा है। वहीं, कई कोचिंग सेंटर तीन-चार मंजिला भवन में संचालित है, जहां सुरक्षित मार्ग व अग्नि सुरक्षा के इंतजाम नहीं है।प्रशासन के पास रिकॉर्ड ही नहीं
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन के पास शहर में संचालित बेसमेंट या कोचिंग सेंटरों का कोई अधिकृत रिकॉर्ड ही नहीं है। नगर पालिका की सीएमओ माधुरी शर्मा का कहना है कि रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार, 500 वर्ग मीटर से कम जमीन पर बने मकानों में बेसमेंट की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोचिंग भवनों के नक्शे, परमिशन, जल निकासी और विद्युत व्यवस्था की सघन जांच की जाएगी। जो भी संस्थान नियमों की अनदेखी करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस मामले पर छतरपुर के डिप्टी कलेक्टर व प्रभारी डीईओ, कौशल सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिले में कोचिंग सेंटरों की जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
24 Jun 2026 10:56 am
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