
अस्पताल में मोबाइल से झाड़ फूंक करते हुए
छतरपुर. जिले में अंधविश्वास अभी भी अपनी जड़े लोगों की मानसिकता पर जमाए हुए है और बदलते युग के परिवेश में भी लोग रूढ़िवादी सोच से ग्रस्त हैं। जहां विज्ञान ने अपने आपको विकसित करके नई तकनीक शुरू की, वहीं छतरपुर जिले के लोग आज भी अंधविश्वास की चादर ओढ़े हुए हैं। वर्ष 2025 में झाड़फूंक और प्रेतबाधा के बहम में करीब डेढ़ सौ लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। सर्पदंश और अन्य बीमारियों के चलते परिजनों ने अस्पताल न पहुंचकर बाबा और ओझाओं के भरोसे छोड़ दिया। जिसके परिणामस्वरूप मरीज की हालत बिगड़ गई और सही समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई।
जुलाई से दिसंबर के बीच ही 69 लोगों की मौत हुई है। झाड़फूंक में मौतें अधिक जिले में जो भी मौतें अस्पताल में दर्ज हैं उनमें मरीज को सही समय पर इलाज न मिलने से मौत होना सामने आया है। जिले में लोगों ने सर्पदंश और प्रेत बाधाओं के नाम पर फैले अंधविश्वास के चलते मौतें हुई हैं। जिले में ऐसे कई स्थान हैं जहां सर्पदंश के लिए झाड़फूंक करते हैं और जब मरीज स्वस्थ्य नहीं होता तब परिजन जिला अस्पताल लाते हैं। तब तक देर हो चुकी होती है।हर माह आ रहे करीब 10 केसजिला अस्पताल में हर माह करीब 10 ऐसे केस आ रहे हैं जिनमें सर्पदंश से पीड़ित लोगों को झाड़फूंक के बाद उपचार करने के लिए जिला अस्पताल लाया जा रहा है। कई मामले में तो मरीज की जान भी चली गई है। जुलाई और अक्टूबर के बीच में करीब 400 से अधिक सर्पदंश की घटनाएं हुईं। उसके बाद नवंबर और दिसंबर में करीब बीस से अधिक मामले सर्पदंश के आए जिसमें 6 मौतें भी हुईं।
जिले में महिलाओं के मानसिक रोगों को प्रेतबाधा समझकर झाड़फूंक भी कराई जा रही है। हाल ही में जिला अस्पताल में बीते दिन एक युवक अचानक से बेहोश हो गया तो उसके परिजन वार्ड में ही झाड़फूंक कराते दिखा। इसी प्रकार हरपालपुर की एक महिला ने खुद के गले को काट लिया था और गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी। महिला के परिवार वालों का कहना था कि वह करीब 10 दिनों से ऐसी हरकत कर रही है। और खुद को खत्म करने की कोशिश कर रही थी, फिर भी परिवार के लोग उसे अस्पताल न ले जाकर टीकमगढ़ के पास किसी ओझा के यहां ले गए। बाद में फिर महिला ने इस घटना को अंजाम दिया। जहां उसे मानसिक रोगी बताया गया।
पिपट थाना क्षेत्र में एक किशोर की सर्पदंश से दुखद मृत्यु हो गई थी। घर की छत पर सो रहे 17 वर्षीय किशोर को सांप ने काट लिया था। परिजन इलाज से पहले ओझा के पास गए जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उसके बाद परिजन जिला अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। किशोर का नाम ग्राम डारगुवां निवासी कमल पुत्र मनोज रैकवार था।
सितंबर माह में नीलम यादव पति सुरेश उम्र 27 वर्ष निवासी गुमान गंज थाना अमानगंज मकान के अंदर बैठी थी तभी सर्प ने काट लिया। झांड़फूंक कराई और जब महिला को लाया गया तब तक उसकी मौत हो गई।
जुलाई माह में भंगवा थाना अंतर्गत टिकरी गांव की रहने वाली खुदिया अहिरवार उम्र 65 वर्ष को सर्प ने कमर में डस लिया था। उसके बेटे किशोरी और रामू अस्पताल न ले जाकर घुवारा के पास छिंदापुर माता के मंदिर ले गए, परिजनों का कहना है की वहां सर्पदंश के मामले झाड़फूंक से सही हो जाते हैं। सुबह आठ बजे से मंदिर के पुजारी ने दोपहर दो बजे तक महिला को झाड़फूंक करके लेटने बोल दिया। शाम चार बजे महिला की तबीयत बिगड़ने लगी तो परिजन जिला अस्पताल लाए जहां डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया।
जुलाई में सुमित्रा पटेल पति स्वामीदीन पटेल (55) वर्ष नवादा थाना राजनगर को जहरीले सांप रसेल वाइपर के डस लिया था। महिला के परिजन पहले उसे झाड़फूंक कराने ले गए जब तबियत बिगड़ने लगी बाद में उसे जिला अस्पताल में लाया गया। डॉक्टरों की लगातार कोशिश के बाद महिला की जान बची थी।
सर्पदंश के मामले आते रहते हैं। कई परिजन झाड़फूंक करने के बाद अस्पताल भी आते हैं। हाल ही में एक युवक के पिता द्वारा वार्ड में ही झाड़फूंक कराने की कोशिश की बाद में उन्हें समझाया गया कि यह मानसिक रोग है। ग्रामीण क्षेत्र में अंधविश्वास का चलन ज्यादा है।
डॉ नीरज सोनी, जिला अस्पताल
Published on:
05 Jan 2026 10:42 am
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