16 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आधुनिक मशीनों से रोजाना हो रही शहर में पानी सप्लाई से पहले जांच

दो फिल्टर प्लांट से मिलने लगा साफ पानी

2 min read
Google source verification
पचेर घाट पर शुरु हुई पानी की लैब टेस्टिंग

पचेर घाट पर शुरु हुई पानी की लैब टेस्टिंग

छतरपुर। जिला मुख्यालय की आधी आबादी को पानी सप्लाई करने वाले पचेर घाट फिल्टर प्लांट में ही पानी की जांच लैब शुरु हो गई है। पचरे घाट के दोनों फिल्टर प्लांट से पानी की सफाई के बाद आधुनिक मशीनों व कैमिकल से पानी की जांच करने के बाद ही शहर में सप्लाई की जा रही है। लैब शुरु होने से पानी जांच के लिए सैंपल को रोजाना 28 किलोमीटर दूर छतरपुर के पीएचई लैब नहीं लाना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब रोजाना जांच के बाद ही पानी सप्लाई होने से दूषित या गंदा पानी शहर में सप्लाई नहीं हो रहा है।


रोजाना 1.20 लाख लीटर सप्लाई
धसान नदी के पचेर घाट पर बने फिल्टर प्लांट में हाईटैक मशीनों वाली लैब स्थापित की गई है। लैब में टैक्नीशियन व सहायक लैब टैक्नीशियन की नियुक्ति की गई है। जो रोजाना पानी सप्लाई के पहले पानी की जांच कर रहे हैं। टेस्टिंग में पानी सही पाए जाने पर ही शहर में सप्लाई किया जा रहा है। पचेर घाट से रोजाना 1 लाख 20 हजार लीटर पानी शहर के 20 वार्डो के 24 हजार परिवारों तक सप्लाई किया जाएगा।

पानी में टीडीएस की मात्रा में आया सुधार
पानी में टीडीएस की मात्रा पानी के शुद्धिकरण को स्पष्ट करती है, इसलिए फि़ल्टर प्लांट में पानी को स्वच्छ करने के बाद पानी में टीडीएस चेक किया जाता है। जिसके माध्यम से पानी में कीटाणुओं का पता लगता है। नपा द्वारा सप्लाई किए जाने वाला पानी का टीडीएस ५०० के पार रहता था, लेकिन अब टीडीएस टीडीएस 60 से 120 तक होता है।

पहले तीन दिन में एक बार होती थी जांच
लैब शुरु होने के पहले फिल्टर प्लांट से मैन राइजिंग लाइन में पानी सप्लाई के पहले होने वाली केमिकल जांच रोज नहीं हो रही थी। पचेर घाट फिल्टर प्लांट से सैंपल कभी दो तो कभी तीन दिन बाद पीएचई की लैब पहुंचता था। उसमें भी अवकाश के दिन तो कोई जांच होती ही नहीं है। फिल्टर प्लांट में इस्तेमाल होने वाली फिटकरी की दम पर ही पानी को शुद्ध मानकर सप्लाई कर दिया जाता रहा है।

इनका कहना है
पचेर घाट फिल्टर प्लांट पर पानी टेस्टिंग लैब की शुरु हो गई है। लैब से पानी सैंपल की जांच के बाद ही अब सप्लाई की जाती है। इससे पानी की गुणवत्ता नियंत्रित हुई है।
्ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ