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कोरोना काल में बंद हो गया 77 साल पुराना बनर्जी अखिल भारतीय फुटबाल टूर्नामेंट, दोबारा नहीं हो सका शुरू

77 साल पुराने एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबाल टूर्नामेंट का आयोजन कोरोना काल में बंद हो गया। जो अभी तक दोबारा शुरु नहीं हो सका है। कई दशकों तक छतरपुर की पहचान रहा देश के शीर्ष खेल आयोजनों में शुमार एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबाल टूर्नामेंट पिछले दो वर्ष भी नहीं आयोजित किया गया।

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स्टेडियम

छतरपुर. 77 साल पुराने एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबाल टूर्नामेंट का आयोजन कोरोना काल में बंद हो गया। जो अभी तक दोबारा शुरु नहीं हो सका है। कई दशकों तक छतरपुर की पहचान रहा देश के शीर्ष खेल आयोजनों में शुमार एसएन बनर्जी अखिल भारतीय फुटबाल टूर्नामेंट पिछले दो वर्ष भी नहीं आयोजित किया गया। छतरपुर के बाबूराम चतुर्वेदी स्टेडियम में आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट को आयोजित करने की जिम्मेदारी पहले विश्वविद्यालय प्रबंधन निभाता था और फिर इसे नगर पालिका छतरपुर द्वारा आयोजित कराया जाने लगा, लेकिन पहले कोरोनाकाल के कारण इसका आयोजन बंद रहा और फिर स्टेडियम में चल रहे निर्माण कार्य के कारण यह आयोजन नहीं किया गया। लेकिन अब कोई अड़चन नहीं है। फिर भी इस बार आयोजन किए जाने को लेकर कोई हलचल नहीं है।

1956 में शुरु हुआ था आयोजन


टूर्नामेंट महाराजा महाविद्यालय में शिक्षक रहे सुरेंद्रनाथ बनर्जी की याद में वर्ष 1956 में शुरू किया गया था। महाराजा इण्टर मीडियट कॉलेज छतरपुर के प्राचार्य पद से सेवा निवृत्त हुए एसएन बनर्जी छात्रों के बीच में बेहद लोकप्रिय थे। सन 1955-56 में डॉ नारायणी प्रसाद, जंग बहादुर सिंह, कृष्णा प्रताप सिंह और पीसी माथुर की सलाह पर कॉलेज के प्राचार्य हरिराम मिश्र ने पहली बार फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन कराया था। तब यह टूर्नामेंट मेला जलविहार टूर्नामेंट कहलाता था और छतरपुर महाराज भवानी सिंह देव इस टूर्नामेंट को आर्थिक मदद दिया करते थे। बाद में यह टूर्नामेंट एसएन बनर्जी के नाम से जाना जाने लगा, जिसका अब तक 57 बार आयोजन किया जा चुका है।

विजेता को मिलती है एशिया की सबसे बड़ी शील्ड


छतरपुर में आयोजित इस टूर्नामेंट को देश की फुटबॉल रैंकिंग में 7वां स्थान हासिल है। यहां विजेता टीम को जो शील्ड भेंट की जाती है, वह एशिया की सबसे बड़ी शील्ड है। जिसे तत्कालीन छतरपुर महाराज ने बनवाया था। इस टूर्नामेंट की विशेषता है कि इस शील्ड पर वही कब्जा कर सकता है, जो लगातार 3 बार फाइनल मैच जीते। अब तक हुए मुकाबलों में सबसे अधिक 6 वार महाराष्ट्र की टीम ने जीत हासिल की।

पहले प्राचार्य के नाम पर होता है आयोजन


वर्तमान में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस और छतरपुर के 125 साल पुराने महाराजा महाविद्यालय के पहले प्राचार्य एसएन बनर्जी के नाम पर आयोजित होने वाला यह देश का पहला ऐसा टूर्नामेंट है, जो किसी शिक्षक के नाम पर आयोजित किया जाता रहा है। इस आयोजन से छतरपुर की तीन पीढिय़ों की यादें जुड़ी हैं। कई खिलाड़ी इस टूर्नामेंट में खेले और इस आयोजन का हिस्सा रहे। इस आयोजन से ही कई उद्घोषक निकले जो राष्ट्रीय स्तर पर छतरपुर का नाम रोशन करते रहे। लेकिन अब इस टूर्नामेंट की फिक्र किसी को नहीं है।

इनका कहना है


कोरोना काल के कारण यह टूर्नामेंट बंद पड़ा था। पिछले वर्ष इस टूर्नामेंट को आयोजित कराया जा सकता था लेकिन स्टेडियम में निर्माण कार्य चल रहा है जिसके कारण यह आयोजन नहीं हो सका। हम इस बार टूर्नामेंट को आयोजित करने का प्रयास करेंगे।
ज्योति चौरसिया, नपाध्यक्ष, छतरपुर