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आदिवासी ग्राम मानकी में नहीं मिल रहा शासकीय योजनाओं का लाभ

पीएम आवास का लाभ नहीं मिलने से झुग्गी बनाकर रहने को मजबूर हैं परिवार

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 झोपड़ी में रह रहा परिवार 

झोपड़ी में रह रहा परिवार 

छतरपुर. जिले के दूरस्थ क्षेत्र बकस्वाहा ब्लॉक में अपने वाले मानकी गांव में ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाऐं नहीं मिल रही हैं और न ही योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। जिससे ग्रामीणों के झोपडियों में रहने को मजबूर हैं और जंगलों में रोटी की तलाश कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कई बाद प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की गई और चुनाव के समय विरोध प्रदर्शन भी किया था। लेकिन इसके बाद यहां विकास नहीं हो पा रहा है।

बकस्वाहा जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम पंचायत मानकी में ग्रामीण शासन की तमाम योजनाओं से वंचित हैं। ऐसे में अपना और अपने परिवार का भरण पोषण करने के लिए जंगल मे खेती कर रोटी की जुगाड़ कर रहे हैं। इतना ही नहीं आदिवासी परिवार के लोग अभी भी झोपड़ी बनाकर अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री आवास योजना भी ग्रामीणों की पहुंच से दूर है। जिसके चलते वह घास की झोपड़ी पर तिरपाल डालकर बारिश के मौसम में गुजारा कर रहे हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। यहां पर पूरे गांव में एक ही आवास स्वीकृत हुआ है बाकी के लोग झोपडियों और कच्चे मकानों में रह रहे हैं।

अशिक्षित हैं आदिवासी समाज

मध्यप्रदेश टूरिज्म अंतर्गत आने वाले जैन तीर्थ नैनागिर से महज २ किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी ग्राम मानकी में आदिवासी परिवार के लोग अपना और अपने बच्चों को रोटी, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इस बस्ती के आदिवासी समाज के लोग आज भी अशिक्षित हैं। सरकारी दस्तावेजों में तमाम योजनाएं संचालित होने के बाद भी उनकी दशा में सुधार होता नजर नहीं दिखाई दे रहा है। अभी भी आदिवासी परिवार झुग्गी झोपडिय़ों में रहने को मजबूर हैं, उनको न तो पीएम आवास योजना का लाभ मिल रहा है और न ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है। आदिवासी परिवार अपनी रोजी रोटी के लिए मोहताज हैं, ऐसे में जंगल में किसानी कर अपने बच्चों का भरण पोषण करते हैं। गांव में करीब 3६५ परिवारों के बीच सिर्फ ३ हैंडपंप हैं, पीने के पानी की किल्लत से जूझते आदिवासी परिवार प्राचीन कालीन झिरिया जिसकी गहराई लगभग सौ फिट है यहां से पानी भरते हैं।

प्रशासन नहीं दे रहे ध्यान

मानकी के आदिवासियों ने बताया कि यहां 3६५ आदिवासी परिवार निवासरत हैं, जिसमें सिर्फ एक प्रधामनंत्री आवास बनाया गया। बाकी परिवार आज भी प्रधानमंत्री आवास की राह देख रहे हैं। 3६5 परिवारों के लिए कुछ नाममात्र ही शौचालय बनाए गए, इन शौचालयों के हालात देखे तो कुछ शौचालयों में छत नहीं तो कुछ उपयोग करने लायक नहीं हैं। इन शौचालयों को ग्राम पंचायत ने बनाया था, पर इन में भी आदिवासियों को ठगने से नहीं छोड़ा। आदिवासी परिवारों को आवास और शौचालय की सुविधा तो दूर इन परिवारों में कुछ लोगों के ही बीपीएल कार्ड बनाए गए हैं। शासन की मार झेल रहे आदिवासियों को ग्राम पंचायत ने परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

नेताओं ने भी नहीं दिया ध्यान

आदिवासियों ने बताया कि हर चुनाव में नेताओं को वोट करते हैं, पर अभी तक कोई नेता हम लोगों की सुध लेने ओर हमारे अधिकार को दिलाने नहीं आया। साथ ही आदिवासियों ने बताया कि सरपंच से लेकर जनपद पंचायत के अधिकारी से आवास और शौचालय निर्माण कार्य कराने व बीपीएल कार्ड बनवाने की मांग की। लेकिन अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही यहां के आदिवासी परिवार के लोग जंगल मे वनवासियों की तरह अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। यहां पर आज भी आदिवासी परिवारों को मुख्यधारा में जुडऩे की उम्मीद है।

इनका कहना है

मनकी गांव में शासकीय योजनाओं का लाभ मिला रहा है या नहीं इसकी जानकारी अभी नहीं है, अगर नहीं मिल रहा है तो ग्रामीणों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

हर्ष खरे, सीईओ, जनपद बकस्वाहा