
सड़क में फिर रहे गोवंश
छतरपुर. शहरी क्षेत्रों की सड़कों में खुले में फिर रहे गोवंश को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी नगरीय निकाय कह और नगरीय निकाय इसको लेकर सजग नहीं हैं। ऐसे में आवारा फिर रहे गोवंश राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। वहीं नगर पालिका की ओर बनाई गई गौशालाएं भी खाली हैं। वहीं शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से लोगों को आक्रोश है।
जिलेभर में नगर पालिका और नगर परिषदों द्वारा गौशाला तो बनवा दी गई हैं, लेकिन उनकी देखरेख और पर्याप्त बजट आवंटन नहीं होने के कारण यह गौशालाएं निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। वहीं सड़कों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े से आए दिन दुर्घटनाओं में गायें घायल हो जाती हैं, जिनका इलाज न तो पशु अस्पताल में पदस्थ अधिकारी कर्मचारी करते हैं और न ही पशु मालिकों को उन पर दया आती है। ऐसी स्थिति में देखभाल के अभाव में गायें लगातार दम तोड़ रही हैं। जिसके बाद सूचना पर पहुंचने वाले कर्मचारियों द्वारा मृत गायों को कचरा प्रसंस्करण के पास फैक दिया जा रहा है।
वहीं नगर पालिका की ओर से गौशालाओं का संचालन करने के लिए समाजसेवी संस्था का दी है जो न तो गायों की सेवा कर रहे हैं और न ही नगर पालिका यहां पर गायों को भेजने के लिए सजग है और न की गौशाला में गायों के व्यवस्था के कोई निर्देश आदि दिए जा रहे हैं। हालात ये हैं कि नगर पालिका के पास गोवंश को पकडऩे के लिए वाहन है इसी के माध्यम से बीते ५ वर्ष में कुछ गोवंश को पकड़कर गौशाला के पास छोड़ा गया था। लेकिन इसके बाद यह कवायत बंद हो गई और फिर अभी तक अभियान शुरू नहीं हो सका है। हालांकि महीने में एकाध कार्रवाई करने के बाद मामला शांत हो जाता है। छतरपुर के नौगांव रेड ट्रांसपोर्ट नगर के रहने वाले देवेंद्र, हरीप्रसाद, सुनील आदि ने बताया कि यदि नपा इन कांजी हाउसों या गौशालाओं को शुरू कर यहां गायों के लिए व्यवस्था करें, तो गायों को सड़कों पर बैठने से बचाया जा सकता है और हादसों पर भी काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकेगा।
पशु पालन विभाग द्वारा नहीं दिया गया डाटा
शहर में फिर रहे पशुओं को व्यवस्थित करने और इन पर कार्रवाई करने के लिए नगर पालिका का सहयोग करने के लिए प्रशासन द्वारा आदेश जारी कर कार्रवाई के लिए कहा था। लेकिन आदेश आने के बाद वह खो गया।
जिले के सभी निकायों में हैं गौशालाएं
जिले के छतरपुर, नौगांव, महाराजपुर नगर पालिका सहित सभी नगर परिषदों में गौशालाएं हैं और उन्होंने इन गौशालाओं का संचालन करने के लिए अन्य लोगों को दिया है। जहां पर गायों के लिए पानी, चारा, भूसा सहित गायों की सेवा करने और बीमार होने पर इलाज कराने के लिए जिम्मेदारी होती है। लेकिन इसके बाद भी यहां पर गायों का नहीं रखा जा रहा है। हालात हैं कि किसी अधिकारिी के निरीक्षण के दौरान आसपास से कुछ गायों ले आते हैं और फिर उसे बाहर निकाल दिया जाता है।
Published on:
03 Jun 2023 05:05 pm
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