
प्रकासबम्होरी के पास एक खदान के हाल
छतरपुर. जिले के प्रकाश बम्होरी, चंदला, गौरिहार, लवकुशनगर, हरपालपुर, गंज, छतरपुर सहित पत्थर खदानों में संचालकों द्वारा सुरक्षा के इंतजाम नहीं कराए गए हैं। जिससे हर साल कई लोगों की लापरवाही से मौत हो जाती है और संचालकों द्वारा उनके परिवार वालों को लालच देकर मामले को रफा दफा कर दिया जाता है और पुलिस, खनिज और प्रशासन भी ऐसे मामलों में रुची नहीं दिखाती है। जिससे ये घटनाऐं होने के बाद कुछ ही दिनों में फाइलों में बंद हो जाती हैं। लेकिन लापरवाही का दौर अभी भी जारी है और लोग इसका शिकार हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले में राजनगर तहसील, लवकुशनगर, छतरपुर, प्रकाशबम्हौरी, गौरिहार, नौगांव सहित विभिन्न क्षेत्रों में पत्थर खदानें संचालित हो रही हैं। इन वैध और अवैध उत्खनन दोनों में ही लोगों की सुरक्षा का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है। उत्खनन से बने २००-३०० या इससे भी अधिक गहरे गड्डों में डूबने से और पत्थर गिरने , पहाड़ से गिरकर लोगों की मौतें हो रही हैं, वहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। बीते करीब ८-९ माह पहले प्रकासबम्हौरी में पत्थर गिरने से एक मजदूूर की मौत हो गई थी। वहीं ३-४ दिन पहले प्रकासबम्हौरी के घटहरी में मजदूर की पहाड़ से गिरकर मौत हो गई। इसी तरह अक्टूबर 2019 में प्रकाश बम्होरी निवाशी गोलू कुशवाहा (7) और मनीष कुशवाहा (8) की खदान पोखर में डूबने से मौत हो गई थी, ज्योरहा गांव निवासी आशादीन कुशवाहा की मौत खदान में हुई थी। इसके अलावा लवकुशनगर क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित खदानों में पुलिस, खनिज और प्रशासन द्वारा एक भी कार्रवार्ई नहीं की गई। जिससे संचालकों द्वारा मनमाना रवैया अपनाया जा रहा है।
चल रहा अवैध खनन, नहीं है सुरक्षा व्यवस्थाखनिज विभाग के दावे से उलट जिले भर में ऐसे अनेक स्थान हैं। जहां लीज खत्म होने के बाद भी मुरम और पत्थर का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यहां न तो तार फेंसिंग कर कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही शासन की उनसे रायल्टी मिल रही है। इस तरह जहां एक और इस तरह के अवैध उत्खनन से शासन को आर्थिक हानी उठाना पड़ रही है। इन गडï्ढों में पानी भर जाने के बाद गहराई का अंदाजा नहीं रहता है।
यहां हैं खदानों के गड्ढे से बड़े खतरे
जानकारी के मुताबिक पहरा, प्रकास बम्होरी, घंटहरी सहित आसपास में बड़ी पत्थर खदानें चल रही हैं। जहां सुरक्षा को ताक पर पत्थरों को उत्खनन किया जा रहा है। लीज खत्म होने के बाद भी यहां कभी उत्खनन बंद नहीं होता। इस पत्थर खदान को सबसे बड़ी खदानों में से एक माना जाता है।
इनका कहना हैघटनाएं होने की जानकारी मिलती है तो जांच करते हैं और जो कार्रवाई की जरूरत होती है कार्रवाई भी करते हैं। हम यभी स्थानों में निरीक्षण करेंगे। जहां पर कोई कमी पाई जाएगी। तो कार्रवाई होगी।
अमित मिश्रा, खनिज अधिकारी
Published on:
27 Sept 2023 05:23 pm
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