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छतरपुर। पुरानी जमीनी बुराई के चलते पिता को जान से मारने और बेटे को जान से मारने के प्रयास के आरोप के मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया है। सत्र न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की अदालत ने मामले के 9 आरोपियो को उम्रकैद के साथ दो-दो हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि बरद्वाहा गांव के रहने वाले फरियादी प्रमोद कुमार यादव ने मातगुवा थाना में 27 जून 2015 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि उसके पिता गोवधज़्न की जमीनी बुराई कई सालो से गांव के ही जगदीश यादव, घनश्याम यादव बगैरह से चल रही है। शाम करीब 5 बजे वह अपने पिता के साथ ट्रेक्टर लेकर अपने खेत जुताई करने बनियारी वाले कुआं पर गया था। जैसे ही जुताई शुरू करने लगे उसी दौरान जगदीश यादव, घनश्याम यादव, परमानंद यादव, अंटी यादव, धमाज़् यादव, भूरा यादव, रतिबाई यादव, उषाबाई यादव, गीताबाई यादव लाठी, डंडा लेकर आ गए और खेत जोतने से मना करने लगे। गोवर्धन ने कहा खेत उसका है वह जुताई करेगा। इतने में पीछे से कांटी गांव के वीरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू राजा और अनंतपाल सिंह भी आ गए और गाली देकर जान से मारने के लिए कहने लगे। घनश्याम बगैरह ने लाठी, डंडो से प्रमोद और गोवर्धन के ऊपर जानलेवा हमला बोल दिया। गोवर्धन बेहोश होकर गिर पड़ा और उसे मरा समझकर सभी मौके से भाग गए। घायल हालत में प्रमोद अपने पिता को ट्रेक्टर में लिटाकर ला रहा था तभी रास्ते मे ंगोवधज़्न की मौत हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार कर मामला कोर्ट में पेश किया।
सत्र न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की कोर्ट ने सुनाया फैसला :
अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक दिनेश तिवारी ने पैरवी करते हुए सबूत कोर्ट के सामने पेश किए। सत्र न्यायाधीश अवनीन्द्र कुमार सिंह की अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने आरोपी घनश्याम यादव पिता हल्काई यादव, परमानंद पिता हल्काई यादव, उषा पत्नी घनश्याम यादव, रतिबाई पत्नी शंकरलाल यादव, परसराम पिता घनश्याम यादव, जगदीश पिता नत्थन यादव, गीता पत्नी जगदीश यादव, वीरेंद्र उर्फ पप्पू राजा पिता राजेंद्र सिंह और अनंतपाल पिता लक्ष्माण सिंह को गोवर्धन की हत्या करने पर आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावाास, 5-5 सौ रुपए जुर्माना, प्रमोद को जान से मारने की प्रयास मेें धारा 307/149 में 7-7 साल की कठोर कैद, 5-5 सौ रुपए जुर्माना, धारा 148 में 3-3 साल की कठोर कैद, 5-5 सौ रुपए जुर्माना और धारा 120बी में 3-3 साल की कठोर कैद के साथ 5-5 सौ रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।
मकान में आग लगाने वाले आरोपी को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा
छतरपुर। पुरानी रंजिश के चलते बदला लेने के लिए हरिजन व्यक्ति के मकान में आग लगाने वाले आरोपी को कोर्ट ने दोषी ठहराया है। विशेष न्यायाधीश देवनारायण मिश्रा की अदालत ने आरोपी को उम्रकैद के साथ 15 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई है।
एडवोकेट लखन राजपूत ने बताया कि फरियादी रामकेश अहिरवार 5 नवंबर 2012 को शाम 6.30 बजे अपने घर के बाहर चबूतरे पर बैठा था। उसी दौरान कीरतपुर गांव का रहने वाला जयकरन पिता रामप्रकाश अवस्थी मोटरसाइकिल से आया और गालियां देकर विवाद करने लगा। रामकेश उठकर अपनी मॉ और ***** को लेकर गांव की तरफ जाने लगा। रास्ते में उसके पिता मिल गए उन्हें भी वह अपने साथ वापिस ले गया। रामकेश ने मॉ और ***** को पास के ज्वार वाले खेत में छिपा दिया और पिता गांव के पुरवा तरफ चले गए तभी आरोपी जयकरन ने रामकेश के मकान के छप्पर पर आग लगा दी। थोड़ी ही देर में मकान धू-धू कर जलने लगा। रामकेश डर के कारण दूर खड़ा रहा। फरियादी रामकेश ने घटना की रिपोर्ट सरबई थाना में जाकर की और बताया कि 29 अक्टूबर 2012 को उसके पिता से आरोपी जयकरन का झगड़ा हो गया था इसी बुराई के कारण उसे मकान में आग लगाई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्ताया किया। लवकुशनगर एसडीओपी एसआर दंडोतिया ने मामले की विवेचना कर कोर्ट में मामला पेश किया।
विशेष न्यायाधीश देवनारायण मिश्र की कोटज़् ने सुनाई सजा :
अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक विश्वनाथ नायक ने पैरवी करते हुए मामले के सबूत कोटज़् में पेश किए। विशेष न्यायाधीश देवनारायण मिश्रा की अदालत ने फैसला सुनाया कि आरोपी ने हरिजन जाति के व्यक्ति के रहवासी मकान में आग लगाई है। और यह वारदात बदले की भावना से की है। इसलिए आरोपी को सजा देते समय नरम रुख अपनाया जाना उचित नही है। कोटज़् ने आरोपी जयकरन अवस्थी को दोषी करार देकर आईपीसी की धारा 436 में आजीवन कारावास के साथ 15 हजार रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई।
Published on:
01 Nov 2018 11:49 am
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