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फसल काटने आसपास के जिलों में ले जाए जा रहे मजदूर

लाने व लेजाने के लिए मालवाहकों में बैठकर मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर रहे ठेकेदार, हो चुकी हैं दुर्घटनाएं, फिर जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान

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दो दिन पहले हुई घटना की फाइल फोटो

दो दिन पहले हुई घटना की फाइल फोटो

छतरपुर. जिले में बिजावर और बकस्वाहा क्षेत्र में आदिवासी समाज के लोगों को सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, झांसी व आसपास के जिले में मजदूरी के लिए ठेकेदार व किसान दे जा रहे हैं। इन मजदूरों को लाने वा ले जाने के लिए ठेकेदार मालवाहकों में बैठा रहे हैं। जिससे हर समय घटनाएं होने का डर बना रहता है। इसके बाद भी न तो पुलिस इस ओर ध्यान दे रही है और न प्रशासन ऐसे वाहनों में कार्रवाई कर रहा है।

जानकारी के अनुसार जिले के बिजावर किशनगढ़, बकस्वाहा और बड़ामलहरा क्षेत्र में आदिवासी इलाकों में बेरोजगारी अधिक है। यहां पर ग्राम स्तर पर रोजगार नहीं होने से न्यूनतम मजदूरी में यहां के परिवार काम करने के लिए राजी हो जाते हैं। ऐसे में यहां पर मजदूरों को ठेकेदार आसपास के जिले में ले जाते हैं ओर फसल की कटाई, सरकारी व निजी भवन निर्माण आदि में काम कराते हैं। लेकिन ठेकेदार इन लोगों को गांवों से लाने व ले जाने के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली व मालवाहकों का उपयोग कर रहे हैं। जिससे बड़ी संख्या में इन वाहनों में मजदूरों को बैठाने के साथ ही वाहन को तेज रफ्तार भगाने से दुर्घटनाएं हो रहीं हैं। बीते दिनों इसी तरह की दुर्घटना होने के बाद भी न तो पुलिस ऐसे वाहनों में कार्रवाई कर रही है और न ही प्रशासन द्वारा कार्रवाई व रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

हालात है कि अभी भी थाना और शासकीय कार्यालयों के बाहर से ऐसे वाहन लोगों को बैठा कर निकल रहे हैं।

बीते दिनों बिजावर क्षेत्र के किशनगढ़ क्षेत्र से आदिवासी मजदूरों को मालवाहक से झांसी के मऊरानीपुर ले जाया जा रहा था। लेकिन वाहन की रफ्तार अधिक होने और चालक शराब के नशे में होने से रास्ते में वाहन पलट गया था और इसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दो दर्जन से अधिक मजदूर घायल हो गए थे। जिनका इलाज कराने के दौरान ठेकेदार मौके से गायब हो गया और मजदूरों को खुद की इलाज कराना पड़ा है।

श्रद्धालुओं को भी ले जा रहे ट्रैक्टर ट्रॉली

जिले में कई बड़े धार्मिक स्थल हैं, यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इनमें से हर रोज ट्रैक्टर ट्रॉली, लोडर ऑटो, मालवाहक में छमता से दो गुना अधिक लोग बैठकर आते हैं। इस दौरान रास्ते में ये वाहन फर्राटा भरने से कभी भी घटनाएं होने का डर बना रहता है। बीते २-३ वर्ष में जटाशंकर धाम आने जाने के दौरान आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हुई हैं। इसके बाद भी इस क्षेत्र के थाना पुलिस ने इन वाहनों में रोक लगाने की जरूरत नहीं समझी है।