
गले में सिक्का फंसने से बन आई थी जान पर
छतरपुर। जिले के युवा डॉक्टर इन दिनों बिना सर्जरी के गले में फंसे सिक्का एवं अन्य चीजों को आसानी से बाहर निकालने में ख्याति पा रहे हैं। यही वजह है कि पिछले 10 दिनों में जिला अस्पताल में बच्चों से ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं। इन मामलों में डॉक्टरों ने बिना सर्जरी के आसानी से बच्चों को खतरे से बचा लिया।
जिला अस्पताल में पदस्थ सर्जन डॉ. मनोज चौधरी के पास बीते दिन महोबा का एक परिवार पहुंचा। जिला अस्पताल में पहुंचे इस परिवार की एक तीन वर्षीय बच्ची ने गले में सिक्का निगल लिया था जिससे उसको भारी तकलीफ हो रही थी। दिव्यांश प्रजापति नाम की यह बच्ची जब जिला अस्पताल पहुंची तो डॉ. मनोज चौधरी ने एक्सरे में देखा कि सिक्का आहार नाल में फंसा है। डॉ. मनोज ने ऑपरेशन थिएटर ले जाकर बच्ची के गले में कैथेटर की नली डालकर उससे सिक्के को बाहर खींच लिया। डॉ. मनोज चौधरी बताते हैं कि यह प्रक्रिया जटिल होती है लेकिन अगर आहार नाल में कोई चीज फंसी हो तो विशेषज्ञता के साथ उसे बाहर निकाल लिया जाता है। जिला अस्पताल में इस सप्ताह यह तीसरा मामला था।
डॉ. मनोज चौधरी का कहना है कि अगर बच्चा सिक्का निगल ले तो कुछ खाने के लिए नहीं देना चाहिए, आमतौर पर लोग केला बगैरह खिलाते हैं। सिक्का भोजन की नली में फंसा हो या स्वांस नली में, हमेशा एक्सपर्ट डॉक्टर या सर्जन की मौजूदगी में ही सिक्का निकालना चाहिए। बच्चों के गले से सिक्का निकालते समय कोई कॉम्पलीकेशन आती है, तो उस समय सर्जन की जरूरत होती है। इसलिए जब भी ऐसी कोई समस्या आए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। एक्सरे देखकर डॉक्टर कैथेटर व दूरबीन की मदद से सिक्का बिना सर्जरी के निकाल सकते हैं।
Published on:
17 Jun 2021 07:11 pm
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