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नागपुरी संतरे के 35 हजार पौधे तैयार

आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र की संरक्षित नर्सरी ने किया रेकॉर्ड उत्पादन

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chhindwara

35 thousand orange plants prepared

छिंदवाड़ा . संतरे की अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करने के लिए चल रहे विशेष मिशन के तहत चंदनगांव स्थित आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र की विशेष नर्सरी में इस बार रेकॉर्ड संतरा पौधों को तैयार किया है। इस बार छिंदवाड़ा स्थित नर्सरी में नागपुरी संतरे के ३५ हजार पौधे बनाए गए हैं। इन पौधों को संरक्षित नर्सरी में मिट्टी के मिश्रण को सौंदर्यीकृत कर अच्छे मूलवृत और बडस्टीक का उपयोग कर तैयार किया गया है।
अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने गत दिवस जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार बिसेन और अन्य वैज्ञानिकों को यह तैयार पौधा दिखाया। ये पौधे संतरा बगीचों में लगाने के लिए किसानों को इसी माह की १८ तारीख से दिए जाएंगे। अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि इन पौधों की बिक्री से केंद्र को कम से कम २० लाख रुपए की आय होगी। इससे भविष्य के लिए यहां और ज्यादा पौधों को तैयार करने का काम किया जाएगा। संतरे की ये कलम रंगपुर लाइम या जम्बेरी के पौधे पर तैयार की जाती है।
सबसे अच्छी गुणवत्ता वाले संतरे के फल इसी कमल से बढ़े हुए पौधे पर लगते हैं। भविष्य में ५० हजार से ज्यादा कलम तैयार करने की योजना केंद्र की है। ध्यान रहे आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र छिंदवाड़ा में टीएमसी प्रोजेक्ट वर्ष 2011 से चल रहा है। अच्छी किस्म के संतरों के उत्पादन के लिए रोग रहित पौधों को तैयार कर किसानों तक पंहुचाना इस योजना का उद्देश्य है।

संख्या बढ़ाने पर किया जा रहा काम

पिछले सात वर्षों से संतरे पर लगातार अनुसंधान कार्य चल रहा है। इस बार हमने रिकॉर्ड पौधे तैयार करने में सफलता पाई है। जिले के संतरा उत्पादक किसान ज्यादा से ज्यादा इन पौधों को लगाएं ये हमारी कोशिश है। भविष्य में पौधों की संख्या और बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
डॉ. वीके पराडकर, सह संचालक, जेडएआरएस छिंदवाड़ा

संतरे का उत्पादन बढ़ रहा है। किसानों को सही पौधे मिले और उचित मार्गदर्शन मिले, इसके लिए विशेष अनुसंधान छिंदवाड़ा स्थित केंद्र में किया जा रहा है। हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को यहां से पौधे दिए जाएं ताकि वे अच्छी किस्म के संतरे ले सकें।
डॉ. डीएन नांदेकर, परियोजना समन्वयक टीएमसी