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Order: बिना अनुमति खरीदी थी आदिवासी की जमीन, 52 साल बाद रजिस्ट्री शून्य

सोनारी मोहगांव में जमीन का मामला, एसडीएम ने दिया आदेश

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chhindwara

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छिंदवाड़ा। आदिवासी की जमीन बिना कलेक्टर की अनुमति के खरीदने के मामले में सुनवाई के बाद एसडीएम अतुल सिंह ने 52 साल पुरानी तक अलग-अलग रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दी और इस जमीन को वापस आदिवासी परिवार को सौंपने के आदेश जारी किए।
एसडीएम द्वारा जारी आदेश के अनुसार सुनारी मोहगांव की जमीन मूलत: आदिवासी दमड़ी खडिय़ा की थी। उसे गैर आदिवासी रघुवंशी परिवार द्वारा खरीद लिया गया था। जबकि नियमानुसार आदिवासी की भूमि बिना कलेक्टर की अनुमति के गैर आदिवासी को विक्रय नहीं की जा सकती।
गैर आदिवासी को किया गया विक्रय छल-कपट पूर्वक होता है। इस मामले की सुनवाई के बाद एसडीएम ने मप्र भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170 ख की उपधारा 3 की प्रदत्त शक्ति को प्रयोग में लाते हुए सोनारी मोहगांव स्थित खसरा नं. 192/2 रकबा 1.781 हैक्टेयर भूमि का सालक राम पिता शोभाराम रघुवंशी द्वारा अपने पक्ष में कराया गया विक्रय संव्यवहार 7.6.1969 एवं दयाराम रघुवंशी द्वारा भूमि के पक्ष में कराया संव्यवहार 23.5.1975 एवं भूमि के संबंध में किए गए समस्त नामांतरण तथा आवासीय मकान का श्रीराम पिता झनक लाल रघुवंशी द्वारा कराया गया विक्रय संव्यवहार 9.6.1976 को शून्य घोषित करने के आदेश दिए।
एसडीएम ने यह भी कहा कि मूल निवासी दमड़ी खडिय़ा की मृत्यु हो गई है तो उसके विधिक उत्तराधिकारी चैनसिंह, श्याम, जवाहर, धनराज पिता लखन, शांति बाई पिता धनराज, सुकिया विधवा चतरू खडिय़ा के नाम भूमि स्वामी के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने तहसीलदार को इन दोनों खसरा नंबर की जमीन का कब्जा उत्तराधिकारियों को दिलवाने के आदेश भी जारी किए।