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विशेष कपड़े पहने निकली अहीरों की टोलियां

आजकल अहीरी नृत्य मंडलियां दुकानों और घरों मे जाकर परम्परा अनुसार नृत्य कर रहे है। अमावस्या की रात से प्रारंभ यह नृत्य पूर्णिमा तक जारी रहता हैं।

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wearing special clothes

Ahiers trolley turned out to be wearing special clothes

परासिया. पैरों में घुंघरु और पारम्परिक वेशभूषा में मदमस्त होकर नृत्य करते अहीरों की टोली के गीतों की धुन ऐसी की सुनने वाले भी थिरकने से खुद को न रोक सकें। अहीर नृत्य परंपरागत रूप से कोयलांचल में वैसे ही देखने मिलता है जैसे बरसों पहले होता था। परासिया, चांदामेटा, बड़कुही, न्यूटन जैसे शहरों के अलावा गांवों में आजकल अहीरी नृत्य मंडलियां दुकानों और घरों मे जाकर परम्परा अनुसार नृत्य कर रहे है। अमावस्या की रात से प्रारंभ यह नृत्य पूर्णिमा तक जारी रहता हैं। दरबई के गोलू यादव ने बताया कि अहीर नृत्य के लिए जिन परंपरागत वस्त्रों को धारण किया जाता है पहले उनकी पूजा की जाती है। टोली जिस घर में जाती है वहां उनका टीका लगाकर सम्मान किया जाता है और उपहार दिया जाता हैं।
खैरवानी/हनोतिया. प्राचीन किवदंती पर आधारित मढ़ई मेले के पूर्व ग्राम खैरवानी में खिड़का महाराज का एक दिन पूर्व विधि विधान से पूजन कर ग्रामवासी खास तौर पर यदुवंशी समाज अहीरी वस्त्र धारण कर अहीरी नृत्य करते हुए खिड़का महाराज को प्रसन्न करते है। वहीं गोमाता का पूजन भी इस दौरान किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर गोकुल वासियों के जीवन की रक्षा की गयी थी। इस दौरान गोवर्धन पर्वत का भी पूजन किया जाता है। ग्राम हनोतिया में मढ़ई मेले आयोजन में ग्रामवासी अहीरी नृत्य करने परम्परागत वेशभूषा धारण करते है यहां विधि विधान से खंडेरा महाराज का पूजन अर्चन कर अहीरी नृत्य किया जाएगा। कई स्थानों पर मढ़ई मेले में अहीरी नृत्य स्पर्धा का आयोजन कर पुरस्कृत किया जाता है।
बिछुआ ञ्च पत्रिका. दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजन का विशेष महत्व है। शनिवार से ही अहीरों की टोली नगर सहित ग्रामीण अंचलों में घर-घर जाकर अहीरी नृत्य का प्रदर्शन कर रहे है। बुजुर्गों ने बताया जाता है कि भगवान कृष्ण ने कार्तिक माह में एकम दिन गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की बारिश से रक्षा की थी। तब से गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाती है।
कौडिय़ों से शृंगार करते अहीर
अहीरों की टोली नगर सहित ग्रामीण अंचलों में प्रतिदिन सज धज कर निकलती है। उनके साथ गाजे-बाजे साथ चलते है। शृंगार में अहीरी वेशभूषा आकर्षक रहती है जो कौडिय़ों से जड़ी रहती है। नृत्य के द्वौरान बांसुरी वादन कर गीतों की प्रस्तुति मनमोह लेती है। शनिवार से गोवर्धन पूजा के साथ बिछुआ नगर में मढ़ई मेलों का आयोजन शुरू हो गया है।
जिसमें नगरवासियों ने मेला जाकर खुब खरीदी की।बिछुआ नगर से मढ़ई मेले की शुरुआत हो गई है। यह मेले नगर के ग्रामीण अंचलों में विभिन्न ग्रामों अलग .अलग तिथियों में आयोजित किया जायेगा। जहां आसपास के टोलेए ढानाए के आलावा दूर .दूर से आकर लोग आकर शामिल होते है।बिछुआ नगर के बाजार चौक में अहीरी समुदाय के लोग ईष्ट देव की पुजा किया।तथा नगर के घरों जाकर अहीरी नृत्य किया ।