विनोद यादव. छिंदवाड़ा. किसानों के खेतों को सिंचित करने और भू-जलस्तर को बढ़ाने सरकार द्वारा बलराम तालाब योजना शुरू की गई थी, ताकि गरीब किसान सरकार के अनुदान के साथ तालाब का निर्माण कर खेतों को सिंचित कर उत्पादन बढ़ा सकें। लेकिन कृषि विभाग की लचर व्यवस्था की वजह से इस योजना का लाभ ज्यादातर किसान नहीं ले पा रहे हैं। छिंदवाड़ा डिवीजन के पांच ब्लॉकों में बलराम तालाब के आंकड़ों पर गौर करें तो 2015-16 में दिसम्बर तक सिर्फ 11 तालाब ही पूरे हो पाए हैं जबकि लक्ष्य 51 का था। वहीं नौ वर्षों में सिर्फ 225 किसानों के खेतों में ही तालाब बने हैं। मतलब औसतन 25 तालाब ही बन सके हैं। अब मार्च 2016 के बाद अब यह बलराम योजना कृषि विभाग से बंद कर जिला पंचायत की मनरेगा योजना से जोड़कर इसे नया नाम दिया जाएगा।
आठ माह में सिर्फ 11 बलराम तालाब बने
सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी सचिन जैन से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 में अप्रैल-मई माह से दिसंबर माह तक 51तालाब स्वीकृत हुए थे, जिसमें 11 बलराम तालाबों का निर्माण पूरा हो चुका है। जबकि वित्तीय माह की समाप्ति के दो माह भीतर 40 तालाबों का निर्माण कार्य पूरा होना शेष है।
प्रचार-प्रसार में कमीकृषि विभाग द्वारा इस योजना का व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार न किए जाने और तालाब अनुदान की राशि सीधे किसानों के खातों में जाने की वजह से ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। इसी वजह से बड़ी संख्या में किसानों इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक पिछले नौ वर्षों में छिंदवाड़ा डिवीजन के छिंदवाड़ा में 43, जुन्नारदेव विकासखंड में 69, परासिया में 29, मोहखेड़ में 43, तामिया में 45 मिलाकर कुल225किसानों को ही बलराम तालाब का लाभ मिल पाया है। जबकि आज भी कई किसान इस योजना के लाभ से वंचित हैं।
यह है बलराम तालाब योजनासहायक भूमि संरक्षण अधिकारी सचिन जैन ने बताया कि बलराम तालाब योजना वर्ष 2006-07 में शुरू हुई थी। यह योजना किसान आधारित योजना है। किसान को खुद ही तालाब का निर्माण कार्य करना है। इसमें सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के लघु सीमांक किसानों को 50 प्रतिशत, अधिकतम 80 हजार रुपए का अनुदान देती है। चाहे वह कितनी भी लागत से तालाब का निर्माण कराए। इसी तरह अनुसूचित जाति,जनजाति के किसानों को बलराम तालाब में 75 प्रतिशत अधिकतम एक लाख रुपए का अनुदान दिया जाता है।
इनका कहना हैबलराम तालाब योजना में किसानों को खुद ही आवेदन करना है। किसान खुद ही रुचि नहीं लेते। किसानों को खुद ही तालाब बनाना है। हम तो तो सिर्फ ले-आउट देकर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करते हैं।
सचिन जैन,सहायक भूमि संरक्षण अधिकारी छिंदवाड़ा