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Bamboo Production: एक समय थे बांस के प्रचुर जंगल, अब जरूरत के लिए बालाघाट से लाना मजबूरी

Bamboo production: वरिष्ठ जन कल्याण समिति ने उठाया अवैध कटाई का मुद्दा, नदी-नालों के किनारे बांस लगाने की आवश्यकता

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Chhindwara

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छिंदवाड़ा/ जिले के तामिया, हर्रई, बिछुआ एवं मोहखेड़ और सौंसर विकासखण्डों में बहुतायत में प्राकृतिक बांस के जंगल थे। विगत वर्षों में वनों में मवेशियों की चराई एवं अवैध कटाई से लगभग समाप्ति की कगार पर हैं। जरूरत के लिए बालाघाट से बांस बुलाना पड़ता है। यह मामला उठाते हुए वन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक एवं वृक्षमित्र रवीन्द्र सिंह की अगुआई में वरिष्ठ जन कल्याण समिति ने सरकार का ध्यान दिलाया है।
उन्होंने बताया कि जिले में वंशकारों को प्रति व्यक्ति 1500 बांस प्रतिवर्ष सस्ती दर पर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। अभी औसतन 200 से 500 बांस ही प्रति परिवार को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिले की जलवायु बांस उत्पादन के अनुकूल है। निजी मेड़, पड़ती भूमि एवं बिगड़े वन, चारागाह भूमि, रेलवे लाइन के दोनों ओर जिले में उपलब्ध नदी नालों के दोनों ओर बहुतायत में बांस लगाकर आवश्यकता की पूर्ति की जा सकती है। बांस से किसानों को अतिरिक्त आय भी हो सकती है।

सौ बांस लगाने पर एक हजार का उत्पादन
उनके अनुसार बांस लगाने के पांच वर्ष बाद प्रति बांस भिर्रा औसत 5 से 10 बांस उत्पादन होना शुरू हो जाता है। इस तरह 100 बांस लगाने पर 500 से 1000 बांस किसान को प्रतिवर्ष मिल सकते हैं। बांस की वर्तमान निस्तार एवं बाजार दर औसत 40 रुपए है। इस तरह एक किसान प्रतिवर्ष 100 बांस से 30 से 40 हजार रुपए 5 वर्ष बाद 40 वर्ष तक लगातार कमा सकता है।

40 साल तक देता है लाभ
बांस एक घास प्रजाति है जो लगातार 40 वर्ष तक जीवित रहकर प्रतिवर्ष पांच से 20 बांस तक उत्पादन देती है जो किसान की अतिरिक्त आय का साधन बनेगी एवं पर्यावरण में सुधार होगा। यह बांस फेंसिंग का भी कार्य करेेगा एवं जिले में उत्पादित हो रही सब्जी एवं फलों में लगने वाले बांस के लिए जिले में ही बांस उपलब्ध हो सकेगा।

सीएम पहल करे तो बनेगी बात
मप्र में बांस मिशन का गठन हो चुका है। जिले में पदस्थ रहे वनमण्डलाधिकारी संजय शुक्ला इस समय बांस मिशन के मिशन संचालक हैं। यह सीएम के नेतृत्व का जिला है। जिले की जलवायु के हिसाब से बांस मिशन की एकीकृत बड़ी परियोजना स्वीकृत हो तो निश्चित ही बांस की पूर्ति हो सकेगी। किसानों एवं शासकीय वनों में टिशू कल्चर नर्सरी से बांस जिले में ही तैयार करवाकर प्रतिवर्ष एक हजार हैक्टेयर में किसानों के यहां एवं छह हजार हैक्टेयर में तीन वनमण्डलों में बांस का रोपण कराए जाने की मांग वरिष्ठ जन कल्याण समिति ने वरिष्ठ जन कल्याण दिवस पर मुख्यमंत्री से की है।