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Big news: विश्वविद्यालय के बरामदे में रखी जा रही गोपनीय सामग्री, समस्या हो रही विकराल

कमरे में उत्तरपुस्तिकाओं को रखने की नहीं है जगह

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Big news: विश्वविद्यालय के बरामदे में रखी जा रही गोपनीय सामग्री, समस्या हो रही विकराल

Big news: विश्वविद्यालय के बरामदे में रखी जा रही गोपनीय सामग्री, समस्या हो रही विकराल

छिंदवाड़ा. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय में कर्मचारियों के साथ जगह की कमी से वजह से समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। विश्वविद्यालय की गोपनीय सामग्रियां बरामदे में रखी जा रही हैं। दरअसल विश्वविद्यालय के पास उत्तरपुस्तिकाओं को रखने के लिए अब कमरों में जगह नहीं बची है। ऐसे में उन्हें बरामदे में सीलबंद उत्तरपुस्तिकाएं रखनी पड़ रही हैं जो सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। बरामदे में हर दिन काफी संख्या में विद्यार्थियों सहित अन्य लोगों का आवागमन होता है। बरामदे में उत्तरपुस्तिकाओं को रखे जाने से चूहे और दीमक का भी डर बना हुआ है। अगर चूहों ने उत्तरपुस्तिका को कुतर दिया तो भी बड़ी समस्या होगी। नियम के अनुसार एटीकेटी परीक्षा के परिणाम आने तक उत्तरपुस्तिकाएं रखनी पड़ती हैं। इस समय विश्वविद्यालय में दो लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं हैं। जबकि रखने की जगह कम है। हैरानी की बात यह है कि विश्वविद्यालय के अधिकारी इस बात को भली-भांती जानते हैं, लेकिन वे मजबूर हैं। दरअसल विश्वविद्यालय कर्मचारियों एवं जगह की कमी को लेकर उच्च शिक्षा विभाग एंव शासन कोई कई बार पत्र लिख चुका है, लेकिन वहां से केवल आश्वासन मिल रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालय को समय पर परीक्षा कराने, रिजल्ट देने, कॉलेजों का निरीक्षण सहित अन्य कार्य को समय पर पूर्ण करने में समस्या हो रही है।


एक कमरे में बैठ रहे दो से तीन अधिकारी
विश्वविद्यालय में अधिकारियों के लिए सेम्प्रेट चेम्बर तक नहीं है। विश्वविद्यालय का भवन न बन पाने से यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट(यूटीडी) भी नहीं खुल पाया है। जिससे कई पाठ्यक्रम की मान्यता भी संबद्ध कॉलेजों को नहीं मिल पा रही है। विवि में शैक्षणिक, शोध, खेल-कूद संबंधी गतिविधियां, ग्रंथालय, महिला एवं पुरुष छात्रावास, सांस्कृतिक गतिविधियां, राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय क्रेडिट कोर की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसके अलावा विवि के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत चारों जिलों के अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के अध्ययनरत विद्यार्थियों को समुचित सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। विश्वविद्यालय को विभिन्न मामले को लेकर समिति के गठन में भी परेशानी आ रही है।


निर्माण शुरु हुआ तब भी लगेंगे दो वर्ष
सारना में विश्वविद्यालय के भवन के लिए जमीन आवंटित है। अगर शासन ने विश्वविद्यालय भवन के लिए प्रर्याप्त बजट भी दे दिया तो भी भवन निर्माण में कम से कम दो साल लगेंगे। हालांकि अगर कार्य तेज गति से हो तो काफी हद तक समस्या दूर हो जाएगी।

इनका कहना है...
जगह की कमी की वजह से बरामदे में गोपनीय सामग्री रखनी पड़ रही है। व्यवस्था बनाई जा रही है। शासन से पत्राचार किया गया है।
मेघराज निनामा, कुलसचिव, आरएसएस विवि, छिंदवाड़ा