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Budget: मुश्किल भरे होंगे नए वर्ष के आगामी तीन माह, बजट के लिए मचेगी मारामारी

- हर विभाग में होगी धनराशि की मारामारी - योजनाएं और निर्माण कार्य होंगे प्रभावित

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8वें वेतन आयोग का ऐलान हुए 9 महीने बीत चुके हैं। (फोटो : फ्री पिक)

नव वर्ष 2025 लगते ही बजट आधारित काम जिले में ढीले पड़ गए हैं। बजट के अभाव में एक दर्जन से ज्यादा सरकारी योजनाएं बंद पड़ी दिखाई दे रही हैं। हर विभाग में धनराशि की मारामारी है। इससे निर्माण कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के अगले अंतिम तीन माह मुश्किल भरे होंगे। यह स्थिति भोपाल से बजट कटौती से बन रही है।
पिछले साल 2023 में विधानसभा चुनाव होने के बाद सरकारी फंड खाली पड़े हैं। वर्ष 2024 में भी बजट का अभाव बना रहा। सरकार का फोकस लाड़ली बहना पर केन्द्रित होने से जरूरतमंदों को सम्बल से लेकर लैपटॉप का लाभ नहीं मिल पाया। नगर निगम, पंचायत से लेकर शिक्षा विभाग समेत अन्य सरकारी दफ्तरों में बजट का अभाव बना रहा। संबल, स्कूल, कॉलेज की छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी। आईटी उद्योग, खेल, कृषि ऋण समेत अन्य योजनाओं में राशि का अभाव नजर आया। सबसे ज्यादा आर्थिक तंगी नगर निगम को झेलनी पड़ी। चुंगी क्षतिपूर्ति राशि में कटौती से कर्मचारियों के वेतन का संकट अब तक बना हुआ है। दूसरे बजट न आने से सडक़, नाली, पुल-पुलिया के भुगतान के लिए ठेकेदारों को भटकना पड़ रहा है।

संबल योजना में कम हितग्राहियों को लाभ

पिछले लोकसभा चुनाव के समय से सम्बल योजना का पोर्टल कई माह बंद रहा। अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उनकी दुर्घटना में मृत्यु पर अंत्येष्टि सहायता एवं अनुग्रह राशि कुछ हितग्राहियों को ही मिल सकी। पंचायतों में 15 वें वित्त अयोग की राशि की किस्त नहीं आई है।

कार्रवाई के डर से बोल नहीं रहे अधिकारी

इस मामले में कार्रवाई के डर से संबंधित विभाग के अधिकारी सरकारी बजट पर अधिकारिक रूप से कुछ कह नहीं पा रहे हैं। कर्मचारी अनौपचारिक बातचीत में पूरे प्रदेश की तरह छिंदवाड़ा में भी वित्तीय संकट बता रहे हैं। उनके
मुताबिक अगले तीन माह तक यह स्थिति बनी रहेगी।

कॉलेज प्रवेश पर नहीं मिल सकी राशि

खेल विभाग के खेलो इंडिया एमपी, सहकारिता विभाग की मुख्यमंत्री ऋण समाधान योजना, मेधावी छात्राओं के कॉलेज प्रवेश पर 25 हजार रुपए, लोक निर्माण विभाग की विभागीय संपत्तियों के संधारण, टंट्या भील मंदिर के जीर्णोद्धार, नए आईटी पार्क की स्थापना, सडक़ोंके का नवीनीकरण समेत अन्य योजनाएं भी ठंडे बस्ते में पड़ी है। जल जीवन मिशन समेत अन्य योजनाओं का बजट नहीं मिला है।

नहीं मिल पाया लैपटॉप और साइकिल

स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन 22 योजनाएं और मद हैं, जिनकी राशि ठंडे बस्ते में है। सबसे ज्यादा लोकप्रिय योजना बारहवीं पास बच्चों को 75 फीसदी से ज्यादा अंक पर लैपटॉप मिलना था। इसके अलावा नवमीं की छात्राओं को साइकिल का
प्रावधान था। इसके अलावा हर स्कूल के टॉपर बच्चे को स्कूटी देने की योजना शुरू की गई थी। इनमें से किसी का लाभ इस वर्ष नहीं मिल पाया।