
छिंदवाड़ा.झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में आग से 10 नवजात शिशुओं की मौत की घटना के बाद भी शहर के बड़े भवनों के मालिक फायर सिस्टम लगाने में हिचक रहे हैं। नगर निगम कई बार नोटिस जारी कर चुका है, फिर भी किसी न किसी स्वामी ने इसका पालन नहीं किया है। अब भी हर माह फायर एनओसी लेने की याद उन्हें दिलाई जा रही है। कहीं तो कार्यवाही करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पिछले दो साल में देशभर में हुए अग्नि काण्ड को देखते हुए शहर के नर्सिंग होम, अस्पताल तथा सात मंजिला तक बिल्डिंग में फायर सिस्टम लगवाने की कवायद की जा रही है। निगम अधिकारियों ने पिछले दो साल में 80 से ज्यादा भवन मालिकों को नोटिस जारी किए हैं। इनसे अपने भवन में फायर सिस्टम की स्थापना कर निगम से एनओसी लेने निर्देशित किया गया है। इसके बाद अस्पताल और नर्सिंग होम से संबंधित भवन मालिकों ने इसका पालन कर लिया है। अभी होटल, मॉल समेत अन्य संस्थानों में ये शेष रह गए हैं। इन्होंने अपने भवन में ना तो फायर ऑडिट कराया और ना ही निगम की फायर एनओसी हासिल की है। नगर निगम का दावा है कि ऐसे लापरवाह भवन स्वामियों को हर माह नोटिस जारी हो रहे हैं। यदि ये अपना फायर सिस्टम सुधार लें तो हादसे के वक्त उन्हें कहीं दौडऩा-भागना नहीं पड़ेगा।
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फायर सिस्टम लगवाने के ये हैं नियम
यदि किसी भवन स्वामी को अपनी बिल्डिंग में फायर सिस्टम लगवाना है तो उसे प्रोविजनल अनुमति के लिए नगर निगम में आवेदन करना होता है। फिर अस्थायी अनुमति मिलने पर उसे एक साल में बिल्डिंग में पूरे सिस्टम लगवाने होंगे। फिर इसे लगवाने के बाद निगम को इसकी सूचना देनी होगी। जिस पर फायर विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इसका निरीक्षण करेंगे और आवश्यक एनओसी की कार्यवाही करेंगे। इसका उल्लंघन करने पर 500 से 1000 रुपए प्रतिदिन के जुर्माना का प्रावधान है।
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अग्नि हादसा होने पर तुरंत कुछ नहीं कर पाएंगे
कुछ समय पहले जिला अस्पताल के सामने प्रसन्न गिफ्ट गैलरी जैसे छोटे अग्नि काण्ड में आग बुझाने नगर निगम की सांसें फूल गई थी। उसमें लाखों रुपए का माल राख में बदल गया। बाहर से फायर बिगे्रड बुलाना पड़ा। ये घटना नगर निगम की फेल व्यवस्था का प्रमाण है। इसके अलावा भी अग्नि घटनाएं हो रही है।
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नगर निगम की टीम हर माह कर रही निरीक्षण
नगर निगम की फायर विभाग की टीम हर माह शहर की बिल्डिंग का निरीक्षण कर रही है और नोटिस जारी कर रही है। सहायक फायर ऑफीसर अभिषेक दुबे बताते हंै कि फायर टीम बिल्डिंग का निरीक्षण उपरांत नोटिस दे रही है। अब तक 200 से ज्यादा नोटिस दिए जा चुके हैं। इसके अलावा उन पर फायर एनओसी लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इसके बिना काम नहीं चलेगा। उन्हें हर हाल में फायर सिस्टम लगाना होगा। उनके मुताबिक यदि कंस्ट्रक्शन के समय ही बिल्डिंग मालिक फायर एनओसी का आवेदन कर दें और उसमें इसका प्रावधान करा लें तो उसे आसानी होगी।
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निगम में खुद फायर सिस्टम का अभाव
करीब 3 लाख की जनसंख्या वाले शहर के दीनदयाल पार्क में छोटे कमरे में संचालित फायर विभाग में एक समय में 10 कर्मचारी तैनात है। वाहनों में केवल चार वाहन है। खुद कर्मचारी कई बार लिखकर दे चुके हैं कि शहर समेत आसपास ग्रामीण इलाकों में हो रहे अग्नि हादसे और घटनाओं को रोकने वाहन समेत अन्य संसाधनों का अभाव है। कम से कम पांच और वाहनों की खरीद होना चाहिए। केवल एक वाहन खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुण्डीपुरा थाने के पास अलग फायर स्टेशन का प्रस्ताव एमआईसी में पास कराया गया है।
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इनका कहना है…
नगर निगम स्तर पर लगातार नोटिस और निरीक्षण करने के बाद अस्पताल और नर्सिंग होम्स ने फायर सिस्टम लगा लिए है। जिला अस्पताल प्रबंधन को अस्थायी फायर एनओसी अनुमति दी गई है। जितने भवन और होटल मालिक शेष रह गए हैं, उनसे फायर नियमों का पालन कराया जाएगा।
-विवेक चौहान, सहायक यंत्री नगर निगम।
Published on:
03 Dec 2024 12:01 pm
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