
Pola festival : पोला के मेले में इठलाती रहीं बैलों की जोडि़यां
छिंदवाड़ा दशहरा मैदान में गाजे बाजे के साथ दौड़ रही बैल जोडि़यों को देखने शुक्रवार को पूरा शहर उमड़ पड़ा। दशहरा मैदान में पोला पर्व पर विशेष मेले का आयोजन किया। सार्वजनिक पोला उत्सव समिति की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में आसपास के दर्जन भर से ज्यादा गांवों से किसान अपनी बैल जोडि़यों को सजा संवारकर लाए थे। यहां गुड़ी का पंरपरागत रूप से स्वागत कर गुड़ी को बांधा गया। उसकी पूजा के बाद बैलों को दौड़ाकर पर्व की आवश्यक विधियां संपन्न कराई गई। इसके बाद बैलों को तिलक लगाकर उनका मुंह मीठा किया गया।
सार्वजनिक उत्सव समिति के आयोजन का यह दसवां वर्ष था। बरारीपुरा माता मंदिर से निकली गुड़ी यात्रा साढ़े चार बजे दशहरा मैदान पहुंची। मराठी स्कूल के सामने से राजपाल चौक होते हुए यह यात्रा आयोजन स्थल पर पहुंची। यात्रा के साथ ढोल ताशों के साथ नृत्य करते लोक कलाकार भी इसमें शामिल हुए। परंपरागत तरीके से पूजन के बाद समिति के पदाधिकारियों सदस्यों और जनप्रतिनिधियों ने बैल जोडि़यों को तिलक लगाया। समारोह में स्थानीय जनप्रतिनिधियों गणमान्य नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में शहरवासी भी पहुंचे। सभी ने इस प्राचीन परंपरा को सहेजने के लिए आयोजन समिति को बधाई दी। सभी ने कहा कि ये पर्व हमारी संास्कृतिक एकता और समरसता को दिखाते हैं। समिति के अध्यक्ष विजय पांडे ने यहां उपस्थित सभी को किसानों और शहर की जनता को बधाई देते हुए धन्यवाद दिया।
दिनभर लगा रहा मेला
आयोजन स्थल पर सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी। दोपहर तक तो मेला यहां लग चुका था। खिलौनों की दुकानों के साथ झूले और अन्य मनोरंजन की चीजें यहां बच्चों के लिए थी। मेला खत्म होने के बाद भी देर शाम तक यहां पर लोगों का आना शुरू रहा।
विभागों की प्रदर्शनी
इस मौके पर हर वर्ष की तरह विभागीय प्रदर्शनी भी लगाई गई। पशु चिकित्सा विभाग, उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग और अनुसंधान केंद्र की तरफ से यहां पंडाल लगाए गए थे। जहां शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी किसानों को दी गई। इसके साथ ही कृषि उपकरण दवाइयों के बारे में भी किसानों को बताया गया। विभिन्न विभागों की तरफ से पशुपालकों को नि:शुल्क दवा और सामग्री दी गई।
किसी के सींग रंगबिरंगी रंगे थे तो किसी जोड़ी का पूरा शरीर ही रंग दिया गया था। कोई आकर्षक परिधान ओढ़े हुए थे तो किसी के पैरों में घुंघरू की आवाज मधुर लग रही थी। नई रस्सियों में बंधें बैल इठलाकर चल रहे थे। शरीर पर अलग-अलग तरह के रंग और चिन्ह उकेरे बैलों को देखने बच्चों के साथ बड़ों में भी उत्साह देखा गया। हष्टपुष्ट बैल जोडि़यों को विशेष रूप से पुरस्कृत किया गया। प्रथम पुरस्कार में ३१०० रुपए नकद और शील्ड, द्वितीय पुरस्कार २१०० रुपए और शील्ड तथा तृतीय पुरस्कार में ११०० रुपए के साथ शील्ड दी गई। इसके साथ ही सभी को प्रशस्ति पत्र भी समिति की तरफ से दिया गया।
Published on:
31 Aug 2019 11:52 am
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