
रासायनिक उर्वरकों से छह गुना बढ़ता है कैंसर
जैविक व रसायन मुक्त खेती को लेकर कार्यशाला आयोजित
रासायनिक उर्वरकों से छह गुना बढ़ता है कैंसर
पर्यावरण सुरक्षा एवं विकास समिति के तत्वावधान में शिशु मंदिर में हुआ आयोजन
पिपलानारायणवार. नगर के सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में पर्यावरण सुरक्षा एवं विकास समिति के तत्वावधान में जैविक खेती, रसायन मुक्त खेती के सम्बंध में कार्यशाला आयोजित की गई। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता विश्म्भर पांडव ने जैविक खेती की वह पद्धति बताई जिसमें पर्यावरण की स्वच्छ प्राकृतिक संतुलन को कायम रखते हुए भूमि जल एवं वायु को प्रदुषित किए बिना दीर्घकालीन पर स्थिर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गोमूत्र, गोबर में भूमि में आवश्यक जत्व मिल पाते हैं और यह खाद्यान्न फल एवं सब्जी रसायन से पूर्णता मुक्त होते हैं। मनुष्य स्वास्थ के लिए भी लाभकारी है, लेकीन आज किसान अनाप-शनाप रसायन का उपयोग कर अपने खेती को नुकसान पहुंचा रहा है। साथ ही मनुष्य के स्वास्थ के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
समिति अध्यक्ष शेषराव बिरे ने बताया कि वर्तमान में स्वास्थ अनुसंधान विभाग की चौकाने वाली रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि, रसायनिक उर्वरक तथा कीटनाशको के अवैज्ञानिक उपयोग से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है। इससे मनुष्य में कैंसर से प्रभावित होने की आशंका काफी बढ़ गई है। साथ ही इसका इस्तेमाल से पुशओं में बीमारियों का खतरा पशु, पक्षी विलुप्त हो रहे हैं। रसायनिक उर्वरकों के अत्याधिक उपयोग से मिटटी की गुणवत्ता में गिरावट आने के साथ ही फसलों के उत्पादन भी कम हुआ है। वातावरण में रसायन कण हमारे शरीर में जहर का काम कर रहे हैं। जिससे हम जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं। हमे भविष्य की चिंता करना नागरिकों कर्तव्य है।
इस दौरान पंकज जीवतोड़े, सूरज मांडवे, सचिन डोंगरे, किशोर बनाइत, अशोक डोंगरे, सुभाष देशमुख, दिलीप पराडकर समेत बीएस डब्ल्यू की छात्रा रूपाली काटोले, निशा लाहीतकर, छात्र जयन्त लव्हाले, श्याम उपासे, ओमकार उपासे, गणेश गौतम समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
Published on:
24 Aug 2018 04:53 pm
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