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फाइलों में दफन मास्टर प्लान विकास में रोड़ा

दावे-आपत्तियों के निराकरण के बाद एक साल से राजधानी में मंजूरी का इंतजार

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मंतोष कुमार सिंह
छिंदवाड़ा शहर का मास्टर प्लान 2035 राजधानी भोपाल की फाइलों में दबा हुआ है। यह स्थिति शहर के विकास की राह में बड़ा रोड़ा है। नगर एवं ग्राम निवेश संचालनालय से मंजूरी मिलने के बाद ही शहर के विकास को पंख लग पाएंगे। नई बस्तियों में सुविधाओं का विस्तार होगा। तेजी से बढ़ते शहर की बिजली, पानी, सडक़ जैसी जरूरतें पूरी हो सकेंगी। वर्ष 2011 में शहर का मास्टर प्लान समाप्त हुआ था। साल 2013-14 में नए मास्टर प्लान का प्रारूप बनाया गया। 2014-15 में नगर निगम के गठन के बाद नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने पहला ब्लूप्रिंट जारी किया। इसमें निगम क्षेत्र के आसपास के 28 गांवों को निवेश क्षेत्र माना गया। फिर 2019 में मास्टर प्लान में कई गांव जोड़े गए। साल 2020 में राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन हुआ। दावे-आपत्तियां मंगवाए गए। दिसंबर 2022 में इन दावे और आपत्तियों का निराकरण किया गया। नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने मास्टर प्लान का प्रारंभिक प्रकाशन और दावे-आपत्तियों का कार्य करने के बाद फाइल भोपाल भेज दी है। यह अभी तक वहीं पड़ी हुई है।

पिछले दिनों सागर शहर के मास्टर प्लान को अनुमोदित किया गया। सागर के बाद उम्मीद है कि विभाग की नजर छिंदवाड़ा के प्रस्ताव पर पड़ेगी और शीघ्र ही यहां का मास्टर प्लान अस्तित्व में आ जाएगा। मेडिकल कॉलेज खुलने, विश्वविद्यालय की सौगात मिलने और रेलवे नेटवर्क से जुडऩे के बाद शहर का तेजी से विस्तार हो रहा है। शहर समेत आस-पास के गांवों की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रतिवर्ष एक दर्जन से अधिक नई कॉलोनियां अस्तित्व में आ रही हैं। शॉपिंग मॉल और बहुमंजिला इमारतें आकार ले रही हैं। पुरानी बसाहट के साथ ही नई कॉलोनियों में पानी, सडक़ और नालियों की व्यवस्थित मांग बढ़ती जा रही है। लेकिन मास्टर प्लान के अभाव में आबादी और शहर के विस्तार की तुलना में मूलभूत जरूरतों की व्यवस्थित पूर्ति नहीं हो पा रही है।

सरकार को चाहिए कि वह जल्दी ही यह मास्टर प्लान जारी करे। प्रदेश के कई अन्य जिलों के मास्टर प्लान के साथ भी ऐसी ही स्थिति है। सरकार का दायित्व है कि वह उन जिलों की फाइलें भी जारी करे, ताकि सभी जिले अपने बाशिंदों की जरूरतों की पूर्ति की राह में अग्रसर हो सकें और सबका जीवन सुगम बना सकें।