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125 वर्ष पुराना भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज का मंदिर

कायस्थ समाज के हैं इष्टदेव। जयपुर से लाई गई थी संगमरमर की सुंदर प्रतिमा

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छिंदवाड़ा. छोटा तालाब के समीप स्थित भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज का मंदिर करीब 125 वर्ष पुराना है। 20 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में बना यह भव्य मंदिर सभी को आकर्षित करता है। भव्य प्रांगण, बगीचा, कुंआ मंदिर परिसर की शोभा बढ़ाते हैं।

जिला कायस्थ सभा के अभिषेक वर्मा ने बताया कि भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज की जयपुर से लाई गई संगमरमर की सुंदर प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा के साथ स्थापित की गई थी। भगवान श्री की प्राण प्रतिष्ठा से आज तक भगवान श्री की नियमित पूजा-अर्चना सामाजिक बंधुओं एवं श्रद्धालुओं द्वारा की जा रही है। प्रति वर्ष भगवान का प्रकट उत्सव चित्रांश बंधुओं द्वारा हर्षोल्लास से मनाया जाता है। मंदिर सम्पूर्ण जिले वासियों के लिए एक संबल स्तंभ है जो कि छिंदवाड़ा जिले को गौरवान्वित करता है।

जिला कायस्थ सभा के संरक्षक सदस्य जस्टिस कृष्ण शरण श्रीवास्तव वर्ष 1960 से निरंतर जिला कायस्थ सभा के संरक्षक सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि जिला कायस्थ सभा छिंदवाड़ा के वरिष्ठ अध्यक्ष स्व. राय बहादुर सक्सेना, स्व. मथुरा प्रसाद श्रीवास्तव, स्व. राय साहब हीरालाल वर्मा, स्व. अधिवक्ता बृजमोहन श्रीवास्तव, स्व. जगन्नाथ शरण श्रीवास्तव, स्व. गुरु प्रसाद श्रीवास्तव, स्व. कमला प्रसाद खरे, अधिवक्ता स्व. बजरंग दयाल वर्मा, स्व. भुवनेश्वर दयाल वर्मा के अथक प्रयासों से सन 1901 में कायस्थ समाज के ईष्ट देव भगवान श्री चित्रगुप्त महाराज के मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी गई थी जो कि धीरे-धीरे एक भव्य मंदिर के रूप में निर्मित हुआ।

वर्तमान में जिला कायस्थ सभा छिंदवाड़ा कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष कर्नल अनंत सक्सेना, सचिव डीपी श्रीवास्तव, कोषा अध्यक्ष प्रमोद वर्मा, उप सचिव एचडी वर्मा, कार्यकारिणी सदस्य रमाशंकर वर्मा, सुरेंद्र सक्सेना, शिव श्रीवास्तव, राजेश वर्मा, अभिषेक वर्मा, आदर्श सक्सेना, अंबुज वर्मा द्वारा निरंतर सामाजिक कार्य संचालित किए जा रहे हैं।