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छिंदवाड़ा शहर की पहचान, 156 साल पुराना छोटा तालाब

गर्मी में नहीं सूखते हैं आसपास के कुएं और बोरपार्क होने से बच्चे, युवाओं व बुजुर्गों का पसंदीदा स्थल

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छिंदवाड़ा. शहर की मुख्य पहचान छोटा तालाब को 156 साल हो गए हैं। अंग्रेजों के जमाने से न जाने कितनी पीढिय़ों के लोग इस तालाब के किनारे हर साल होने वाले सांस्कृतिक उत्सव को देख चुके हैं। वर्तमान में यह आसपास के जल स्रोत कुआं-बोर में निरंतर पानी की मौजूदगी का हिस्सेदार है। इसके साथ ही टापू में सुभाष पार्क होने से बच्चे, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों का पसंदीदा मनोरंजन स्थल है।

चार फाटक नामक रेलवे क्रॉसिंग पर निर्मित रेलवे ओवर ब्रिज के पश्चिम में इस तालाब का निर्माण सन 1867 में हुआ था, जिसे छिंदवाड़ा जिले के ही उस समय के डिप्टी कमिश्नर मेजर जे. असवरनर ने बनवाया था। पहले असवरनर ताल के नाम से जाना जाता था। वर्तमान मेें इसकी पहचान छोटा तालाब के नाम से बनी है। तालाब के बीचों-बीच गोलाकार टापू में जाने के लिए पुराने समय में दो तरफ से रास्ते बनाए गए थे। नगर निगम के सौंदर्यीकरण में बाउंड्री के पुन: निर्माण के बाद एक मुख्य मार्ग अंदर टापू जाने के लिए बना हुआ है।

तालाब से नहीं सूखता कुएं और बोर का पानी
छोटा तालाब में साल भर पानी जमा होने से यह आसपास के कुएं-बोर को कभी सूखने नहीं देता। पुराने बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1984 के पहले कन्हरगांव डैम नहीं था और पेयजल की समस्या थी। तब लोग कुआं-बोर पर ही निर्भर थे। तब तालाब ही भू-जल बनाए रखने में अग्रणी भूमिका निभाता था। तालाब की वजह से अभी भी कभी पानी की किल्लत नहीं होती है।

वर्ष 1970 में बोस की प्रतिमा
जानकार बताते हैं कि इस पार्क में वर्ष 1970 में फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सहयोगी आरके हल्दुलकर ने सुभाष चंद्र बोस की सैनिक वेशभूषा में आदम कद की रंगीन प्रतिमा स्थापित कराई। तब से पार्क का नाम सुभाष पार्क पड़ा। हर साल नेताजी जयंती पर कार्यक्रम होते हैं।

सुबह-शाम लगता है प्रकृति प्रेमियों का मेला
छोटा तालाब व सुभाष पार्क/टापू नगर निगम के जीर्णोद्धार के बाद शहर का पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है। यहां सुबह-शाम प्रकृति प्रेमियों, महिला, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों का मेला लगा रहता है। एक्सरसाइज करने वालों के लिए ओपन जिम की व्यवस्था तथा बच्चों के झूले आदि की व्यवस्था भी है। सुबह और शाम के समय यहां की छटा मन को मोह लेती है। गुपचुप, गोल गप्पे समेत अन्य दुकानों होने से यह रोजगार भी उपलब्ध कराता है।