
Coal India will be wasted by exempting private company
परासिया. निजी कोयला कंपनियों को कोयला उत्पादन कर बेचने के अधिकार संबंधी केन्द्र सरकार के फैसले को गलत बताते हुए के न्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस संबंध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम सुनीता खंडायत को सौंपा गया। इसके पहले नुक्कड़ सभा के माध्यम से वक्ताओ ने बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा 20 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रीमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में कोयला कारोबार में निजी कंपनियों को शामिल करने का निर्णय लिया गया है जिसके अनुसार निजी कंपनिया अब कोयले का उत्पादन कर कोयले का व्यापार कर सके गीं। इससे सरकारी सार्वजनिक क्षेत्र का कोयला उद्योग तबाह हो जाएगा और निजी कोयला कंपनियों को फायदा मिलेगा। विधायक एवं इंटक अध्यक्ष सोहन वाल्मिक ने अपने संबोधन में कहा कि जबसे भाजपा की सरकार केन्द्र में आई है तबसे लगातार कोल इंडिया पर कुठाराघात हो रहा है। जिस तरीके से श्रम कानूनों में बदलाव किया जा रहा है तथा उद्योगपतियों को फायदा दिलाने के लिए ट्रेड यूनियन के अधिकारों को समाप्त करने की नीति अपनाई जा रही है उससे चंद पूंजीपतियों को लाभ मिलना है। उन्होंने बताया कि अभी तक निजी क्षेत्र की कंपनिया जिन्हें कैप्टिव कोल ब्लॉकों का आवंटन किया जाता है वह कोयले का उपयोग अपने निजी उद्योग के लिए ही इस्तेमाल कर सकती हैं लेकिन इस फैसले से वह कोयले के कारोबार में शामिल होकर बाजार में अपना कोयला बेच सकेंगे। जिससे कोल इंडिया एवं उसके कर्मचारियों का बहुत बड़ा अहित होगा। आगामी समय में कोल इंडिया का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। आंदोलन में महामंत्री रवि वर्मा, इंटक पेेंच अध्यक्ष मनोज तिवारी, कन्हान अध्यक्ष मदन जंघेला, गोपाल चौकसे, प्रमोद वर्मा, बसंत महात्मा, किशोर राव, भगवानदीन यादव, देवी प्रसाद, अमजद खान, हरिनाग मना, बिजेन्द्र सिंह, साबिर खान सहित कार्यकर्ता मौजूद रहे।
उजड़ जाएगा कोयलांचल
इंटक नेता दीनानाथ यादव ने कहा कि कोयला खदानों का राष्ट्रीयकरण का उदेश्य निजी क्षेत्र के कोयला मालिकों के अत्याचार और शोषण से मजदूरों को बचाना था इसके लिये कोल इंडिया का निर्माण किया गया एवं कामगारों को उनका अधिकार प्राप्त हुआ। परन्तु वर्तमान में केन्द्र सरकार व्यवसायिक तरीके से फैसले ले रही है। कोल इंडिया की 272 अंडर ग्राउंड खदानों को बन्द करने के आदेश दिए गए है। जिसके अंतर्गत पेंच-कन्हान क्षेत्र की 4 खदानों को बन्द कर दिया गया है। जिन स्थानो पर कोयला खदानों को बन्द किया जा रहा है वहां के रोजगार समाप्त हो रहे हैं इसका बुरा असर कोयलांचल पर भी पड़ेगा।
Published on:
27 Feb 2018 05:24 pm
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