
Declaration of Dhanka and Sharda coal mines
छिंदवाड़ा/ गुड़ीअम्बाड़ा. कन्हान क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित भूमिगत कोयला खदान शारदा प्रोजेक्ट कहीं न कहीं राजनीति की भेंट चढ़ रही है। प्रदेश की कांग्रेस और केंद्र की भाजपा, इन दोनों ही सरकार की श्रेय की राजनीति कहीं न कहीं इस खदान के खुलने में रोड़ा बनती नजर आ रही है। वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती द्वारा भूमिपूजन और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ द्वारा प्रस्तावित खदान भूमि के निरीक्षण के बाद से आज तक इसकी शुरुआत को लेकर कोई खास हलचल देखने को नहीं मिली। हां अगस्त, 2018 को इसके टेंडर को लेकर चर्चा जरूर थी जो कोरी साबित हुई। इसके अलावा हर्राडोल और भाखरा परियोजना भी वर्षों से प्रस्तावित है, लेकिन इसे भी अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका।
उल्लेखनीय है कि उपक्षेत्र अम्बाड़ा के अंतर्गत आने वाले पांजरा के जंगल क्षेत्र में खोले जाने वाली भूमिगत कोयला खदान शारदा प्रोजेक्ट को लेकर गुढ़ी, पालाचौरई, अम्बाड़ा, नजरपुर, जमकुंडा पंचायत क्षेत्र के हजारों लोगों में उम्मीदें जगी थीं। खदान के खुलने से कहीं न कहीं क्षेत्र का मैनपावर स्थिर रहेगा। रोजगार भी बने रहेंगे। नए विकल्प मिलेंगे। खदान की शुरुआत के लिए कई बार भूमि पूजन किया गया, टेंडर प्रक्रिया भी की गई। वहीं करीब सौ पेड़ों की बलि भी ले ली गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
छाने लगी है मायूसी
शारदा प्रोजेक्ट को लेकर लोगों में बड़ी उम्मीद थी कि पहले विधानसभा उसके बाद लोकसभा चुनाव के बाद इस खदान का काम शुरू हो जाएगा। इसके शुरू होने से स्थानीय लोगों में ऊर्जा का नया संचार होगा और उन्हें पलायन का दंश नहीं झेलना पड़ेगा। रोजगार के विकल्प भी बढ़ेंगे, लेकिन वर्तमान में इस खदान को लेकर कोई भी सुगबुगाहट नजर नहीं आ रही। इससे लोगों में मायूसी छाई है।
घाटे का सौदा
सूत्रों के अनुसार खदान शुरू करने से पहले कोल इंडिया की ओर से सर्वे कराया जाता है। ऐसा माना जा रहा है कि सर्वे के दौरान शारदा प्रोजेक्ट में एफ ग्रेड का कोयला पाया गया है। यह निम्नतम श्रेणी का कोयला माना जाता है। बाजार में इस स्तर के कोयले के खरीदार मिलना मुश्किल है। सीधे तौर पर यह कह सकते हैं कि इस श्रेणी के कोयले की बाजार में कीमत उत्पादन की लागत से भी कम है। शारदा खदान में उत्पादन शुरू करना कोल इंडिया के लिए घाटे का सौदा हो सकता है।
मुआरी खदान के बंद होने से बिगड़ेंगे हालात
उपक्षेत्र अम्बाड़ा की एकमात्र मुआरी खदान के लगातार कम हो रहे उत्पादन और घटनाक्रम से बंद होने के कयास लगाए जा रहे हैं। खदान में कार्यरत कर्मचारियों पर स्थानांतरण की तलवार लटक रही है। इससे कर्मचारियों और उनके परिवार में भय का माहौल बना हुआ है। वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर समाप्त होने से पलायन का खतरा भी है। इससे यह तो तय है कि जिस दिन मुआरी खदान को ताला लगा क्षेत्र वीरान हो जाएगा।
शारदा प्रोजेक्ट
आरक्षित कोयला: 7.54 मिलि. टन
खदान का भविष्य: 28 वर्ष
कोयले का स्तर: एफ ग्रेड (सबसे निम्न स्तर)
मैन पावर: 425 कर्मचारी
भूमि पूजन: 2007 उमा भारती द्वारा
फारेस्ट क्लियरेंस: प्राप्त ओपनिंग होना बाकी
हर्राडोल प्रोजेक्ट
आरक्षित कोयला: 7.00 लाख टन
खदान का भविष्य: 5 वर्ष
कोयले का स्तर: बी ग्रेड (कुकिंग कोल व पावर हाउस के उपयोग का)
मैन पावर: 300 कर्मचारी
भूमि पूजन:2011 में कमलनाथ द्वारा
फॉरेस्ट क्लियरेंस: प्राप्त, खुलना बाकी
भाखरा प्रोजेक्ट
आरक्षित कोयला: 3.3मिलियन टन
खदान का भविष्य: 13 वर्ष
कोयले का स्तर: बी ग्रेड (कुकिंग कोल व पावर हाउस के उपयोग का)
मैन पावर: 450 कर्मचारी
भूमि पूजन: 1995 कमलनाथ
फॉरेस्ट क्लीयरेंस: प्रक्रिया में है, खुलना बाकी।
अब इनकी भी सुनो
शारदा प्रोजेक्ट खोलने को लेकर हमारे पास अभी तक अधिकारिक रूप से कोई भी पत्र नहीं आया है। प्रक्रिया चल रही है इसीलिए यह तो तय है कि खदान खोली जाएगी।
विपिन कुमार, उपक्षेत्रीय प्रबंधक, उपक्षेत्र अम्बाड़ा
शारदा प्रोजेक्ट को लेकर केवल लॉलीपॉप दी जा रही है। यह प्रोजेक्ट राजनीति की भेंट चढ़ चुका है। इसलिए शारदा प्रोजेक्ट का खुलना दूर तक मुमकिन नजर नहीं आ रहा।
अशोक भारती, सचिव, लाल झंडा (सीटू) कन्हान-पेंच क्षेत्र
बहुप्रतीक्षित शारदा प्रोजेक्ट खदान जल्द ही खुलेगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल से भी चर्चा की गई है।
नारायण राव सराठकर, वेकोलि, सेफ्टी बोर्ड सदस्य
अम्बाड़ा क्षेत्र का भविष्य अंधकार में है, क्योंकि एकमात्र मुआरी खदान भी बंद होने की कगार पर है। शारदा प्रोजेक्ट का खुलना बेहद जरूरी है।
शैलेंद्र कुरोलिया, अध्यक्ष, सहारा सोशल कल्याण समिति पालाचोरई
Published on:
22 Jun 2019 12:54 pm
बड़ी खबरें
View Allछिंदवाड़ा
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
