23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

College news: संस्कृत में कैसे बनेंगे विद्वान, कॉलेजों में मास्टर डिग्री तक की सुविधा नहीं

शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज में भी वर्षों से यह सुविधा नहीं है।

2 min read
Google source verification
College: पीजी कॉलेज को छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के शिफ्ट होने का इंतजार

College: पीजी कॉलेज को छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के शिफ्ट होने का इंतजार

छिंदवाड़ा. देववाणी कही जाने वाली संस्कृत भाषा जिले में उपेक्षा की शिकार हो गई है। बड़ी बात यह है कि जिले में 16 शासकीय कॉलेज हैं। इनमें से 15 में संस्कृत विषय में मास्टर डिग्री करने की सुविधा नहीं है। छिंदवाड़ा मुख्यालय में स्थित राजमाता सिंधिया गल्र्स कॉलेज में संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की जा सकती है। जबकि इस कॉलेज में केवल छात्राएं ही पढ़ती हैं। ऐसे में छिंदवाड़ा जिले के छात्रों को संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करने के लिए दूसरे जिले का रूख करना पड़ रहा है या फिर प्राइवेट पढ़ाई के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि जिले के लीड कॉलेज यानी शासकीय स्वशासी पीजी कॉलेज में भी वर्षों से यह सुविधा नहीं है। लोगों की मांग पर कॉलेज प्रबंधन ने कई बार उच्च शिक्षा विभाग का प्रस्ताव भेजा। संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर पढ़ाई की अनुमति मांगी गई, लेकिन विभाग ने इस पर आज तक विचार नहीं किया। पीजी कॉलेज वर्ष 1961 से संचालित हो रहा है। तब से लेकर अब तक कई बार स्नातकोत्तर में संस्कृत विषय की अनुमति के लिए प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में ही चला गया।

सुविधा बिना कैसे मिलेंगे संस्कृत विद्वान
समाजसेवी विनोद तिवारी ने बताया कि एक समय था जब संस्कृत भाषा को प्रमुखता दी जाती थी, लेकिन बदलते समय के साथ यह भाषा विलुप्त होती जा रही है। जबकि आज भी पूजा-पाठ या फिर अन्य कर्मकांड के लिए संस्कृत विद्वान को ही तवज्जों दी जाती है। छिंदवाड़ा जिले में स्नातकोत्तर में अध्ययन की सुविधा न होने से संस्कृत के विद्वान भी कम होते जा रहे हैं। जबकि इसके प्रोत्साहन के लिए सरकार को कदम उठाना चाहिए। रोजगार परक पाठ्यक्रमों की शुरुआत करनी चाहिए। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के जरिए आधुनिक विषयों का समावेश करना चाहिए। संस्कृत को लोकप्रिय भाषा बनाने के उद्देश्य से कई कदम उठाने पड़ेंगे।

स्ववित्तपोषित योजना से मिल जाएगी स्वीकृति
बताया जाता है कि उच्च शिक्षा विभाग स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत संस्कृत विषय में स्नातकोत्तर करने की सुविधा कॉलेजों को दे रहा है। हालांकि अगर कॉलेजों ने इस योजना को स्वीकार कर लिया तो विद्यार्थियों काफी अधिक फीस देनी होगी।

विद्यार्थी कर रहे डिमांड
जिले के कॉलेजों में स्नातक में तो संस्कृत विषय है, लेकिन स्नातकोत्तर में नहीं। जबकि छिंदवाड़ा के कई क्षेत्रों में विद्यार्थी संस्कृत पढऩा चाहते हैं एवं मास्टर डिग्री करना चाहते हैं। लेकिन विभाग की बेरूखी की वजह से संस्कृत की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। दूरदराज इलाकों के छात्रों के लिए तो संस्कृत की पढ़ाई एक स्वप्न बन कर रह गया है।


इनका कहना है...
आए दिन विद्यार्थी संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की सुविधा की मांग कर रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग को काफी समय पहले प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया है। जिले में 16 में से 15 शासकीय कॉलेज में संस्कृत विषय से मास्टर डिग्री करने की सुविधा नहीं है।
डॉ. अमिताभ पांडे, प्राचार्य, लीड कॉलेज, छिंदवाड़ा
---------------------------------------

छिंदवाड़ा में सुविधा न होने मुझे और मेरे जैसे कई लोगों को जिले के बाहर जाकर संस्कृत विषय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई करनी पड़ी। समय-समय पर मांग उठाई जा रही है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। कॉलेजों में सुविधा होगी तो संस्कृत के विद्वानों की संख्या में भी इजाफा होगा।
श्रवण शर्मा, पुजारी